17 सितंबर 2026
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ट्रंप ने PM मोदी की नशा-रोधी कोशिशों को सराहा, भारत 2027 की अमेरिकी ड्रग-ट्रांज़िट सूची में

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ट्रंप ने PM मोदी की नशा-रोधी कोशिशों को सराहा, भारत 2027 की अमेरिकी ड्रग-ट्रांज़िट सूची में

सारांश

ट्रंप ने मोदी की नशा-रोधी नीतियों की खुलकर तारीफ की — और साथ ही भारत को 2027 की अमेरिकी ड्रग-ट्रांज़िट सूची में भी रखा। अमेरिका का स्पष्टीकरण: सूची भौगोलिक कारकों पर आधारित है, विफलता की मुहर नहीं। यह भारत-अमेरिका मादक पदार्थ नीति ढाँचे के तहत बढ़ते सहयोग का संकेत है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 सितंबर 2026 को PM नरेंद्र मोदी के अवैध मादक पदार्थ-विरोधी प्रयासों की सराहना की।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, दोनों देश मिलकर मादक पदार्थों से लड़ना जारी रखेंगे।
अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत द्वारा अफीम की खेती रोकने और आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत करने के प्रयासों का स्वागत किया।
भारत को 2027 के लिए अमेरिका की प्रमुख ड्रग उत्पादक/पारगमन देशों की सूची में शामिल किया गया; अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यह भौगोलिक/वाणिज्यिक आधार पर है, विफलता का प्रमाण नहीं।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी दक्षिणी सीमा पर मादक पदार्थों की जब्ती आधे से अधिक घटी और ओवरडोज़ मौतों में 'भारी गिरावट' आई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अवैध मादक पदार्थों से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की। यह सराहना उस वैश्विक रिपोर्ट के साथ आई, जिसे ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में अवैध नशीले पदार्थों की स्थिति पर जारी किया। उल्लेखनीय है कि इसी रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत को 2027 के लिए प्रमुख अवैध मादक पदार्थों के उत्पादक या पारगमन देशों की सूची में रखा है।

राजदूत का बयान और सराहना

भारत में नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार सुबह यह वैश्विक रिपोर्ट जारी की। राजदूत गोर ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने अवैध मादक पदार्थों से लड़ने में सराहनीय कार्य किया है और संयुक्त राज्य अमेरिका उनके प्रयासों की सराहना करता है। हमारे दोनों देश मिलकर मादक पदार्थों से लड़ना जारी रखेंगे।'

अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, 'मैं प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार द्वारा अवैध अफीम की खेती को रोकने और आपूर्ति श्रृंखला की अखंडता को मज़बूत करने के प्रयासों का स्वागत करता हूँ। मैं अमेरिका-भारत मादक पदार्थ नीति ढाँचे के माध्यम से निरंतर सहयोग की आशा करता हूँ।'

भारत पारगमन सूची में — लेकिन संदर्भ ज़रूरी

अमेरिका ने भारत को अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज़, बोलीविया, बर्मा, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन गणराज्य, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, जमैका, लाओस, मेक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेज़ुएला के साथ 2027 के लिए प्रमुख अवैध मादक पदार्थों के उत्पादक या पारगमन देशों की सूची में शामिल किया है।

हालाँकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इस सूची में शामिल होने का अर्थ यह नहीं कि किसी देश की सरकार नशे से लड़ने में विफल रही है। भौगोलिक, वाणिज्यिक और आर्थिक कारकों के चलते किसी देश को 'प्राकृतिक पारगमन या उत्पादन केंद्र' माना जाता है — भले ही उस देश की सरकार ने सख्त और सक्रिय प्रवर्तन उपाय लागू किए हों।

ट्रंप प्रशासन के दावे

राष्ट्रपति ट्रंप ने इस अवसर पर मादक पदार्थों की तस्करी और नार्कोटेररिस्ट संगठनों से निपटने में अपने प्रशासन द्वारा की गई 'ऐतिहासिक प्रगति' का उल्लेख किया। उन्होंने कड़ी सीमा सुरक्षा, मादक पदार्थों की कम जब्ती और ओवरडोज़ से होने वाली मौतों में कमी को प्रगति के प्रमाण के रूप में पेश किया।

ट्रंप ने दावा किया कि चार साल की 'खुली सीमा अराजकता' के बाद अमेरिकी दक्षिणी सीमा पर मादक पदार्थों की जब्ती आधे से अधिक कम हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ओवरडोज़ से होने वाली मौतों में 'भारी गिरावट' आई है और दावा किया कि प्रशासन ने हज़ारों अमेरिकी नागरिकों की जान बचाई है।

भारत-अमेरिका सहयोग का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका के बीच व्यापक रणनीतिक और राजनयिक सहयोग नई ऊँचाइयों पर है। अवैध अफीम की खेती — विशेष रूप से अफगानिस्तान-पाकिस्तान मार्ग से होने वाली तस्करी — भारत के लिए एक दीर्घकालिक चुनौती रही है। गौरतलब है कि अमेरिका-भारत मादक पदार्थ नीति ढाँचा दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बनता जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस ढाँचे के तहत किस तरह के ठोस कदम उठाते हैं और भारत की पारगमन सूची में उपस्थिति द्विपक्षीय वार्ताओं को किस दिशा में ले जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सूची में भारत की उपस्थिति — चाहे भौगोलिक आधार पर ही क्यों न हो — घरेलू राजनीति में विपक्ष को हथियार दे सकती है। असली सवाल यह है कि अमेरिका-भारत मादक पदार्थ नीति ढाँचा ठोस नतीजे देता है या केवल कागज़ पर सहयोग बना रहता है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान मार्ग से भारत में आने वाले नशे के प्रवाह को देखते हुए, द्विपक्षीय सहयोग की यह घोषणा जितनी प्रतीकात्मक है, उतनी ही परिचालनात्मक प्रतिबद्धता की माँग भी करती है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने PM मोदी के किस प्रयास की सराहना की?
ट्रंप ने अवैध मादक पदार्थों — विशेष रूप से अफीम की अवैध खेती रोकने और आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने — के मोर्चे पर PM मोदी के प्रयासों को सराहा। यह सराहना 16 सितंबर 2026 को जारी अमेरिकी वैश्विक ड्रग रिपोर्ट के साथ आई।
भारत को अमेरिका की ड्रग-पारगमन सूची में क्यों रखा गया?
अमेरिका ने भारत को 2027 के लिए प्रमुख अवैध मादक पदार्थों के उत्पादक या पारगमन देशों की सूची में रखा है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि यह वर्गीकरण भौगोलिक, वाणिज्यिक और आर्थिक कारकों पर आधारित है, न कि किसी सरकार की विफलता का प्रमाण।
अमेरिका-भारत मादक पदार्थ नीति ढाँचा क्या है?
यह दोनों देशों के बीच अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए बना द्विपक्षीय सहयोग ढाँचा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस ढाँचे के ज़रिए निरंतर सहयोग की आशा जताई है।
ट्रंप ने अपने प्रशासन की किन उपलब्धियों का उल्लेख किया?
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी दक्षिणी सीमा पर मादक पदार्थों की जब्ती आधे से अधिक घट गई है और ओवरडोज़ मौतों में भारी गिरावट आई है। उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक प्रगति' बताते हुए हज़ारों अमेरिकी नागरिकों की जान बचाने का दावा किया।
क्या सूची में शामिल होना भारत के लिए नकारात्मक संकेत है?
अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि सूची में होना सरकार की विफलता का संकेत नहीं है। देशों को उनकी भौगोलिक स्थिति और वाणिज्यिक कारकों के चलते शामिल किया जाता है, और जिन देशों ने सक्रिय प्रवर्तन उपाय लागू किए हैं, वे भी इस सूची में हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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