गंगा दशहरा पर काशी विश्वनाथ धाम में भव्य आरती: 51 पुजारियों ने 21 लीटर दूध से किया दुग्धाभिषेक
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में गंगा दशहरा के अवसर पर 26 मई को श्री काशी विश्वनाथ धाम के घाट पर प्रातःकाल विशेष गंगा आरती और अभिषेक का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए।
मुख्य आयोजन और अनुष्ठान
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पवन शुक्ला ने बताया कि भाजपा विधायक नीलकंठ तिवारी के नेतृत्व में देवी अहिल्याबाई घाट पर यह भव्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। आचार्य उदित नारायण मिश्रा के मार्गदर्शन में 51 युवा पुजारियों ने 21 लीटर दूध से मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया। इसके साथ ही षोडशोपचार पूजा संपन्न की गई और गंगा आरती की गई।
धाम परिसर में स्थापित मां गंगा की प्रतिमा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत पूजन-अर्चना किया गया। बाबा की नगरी काशी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और देश के कोने-कोने से आए भक्तों ने इस पावन पर्व में भाग लिया।
गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन मां गंगा राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के फलस्वरूप स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। स्कंद पुराण में इस दिन को विशेष महत्व दिया गया है — मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान, पूजन और आराधना करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सनातन धर्म में गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवनदायिनी और मोक्ष प्रदायिनी माँ माना गया है। प्रयागराज में एक श्रद्धालु ने कहा, 'आज गंगा दशहरा है। इसी दिन भागीरथी मां गंगा को धरती पर लाए थे और धरती पर अवतरित होने के बाद मां गंगा ने मानवता का उद्धार किया था।'
नमामि गंगे और राजनीतिक संदर्भ
भाजपा विधायक नीलकंठ तिवारी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गंगा नदी की सफाई और पुनरुद्धार के लिए शुरू किए गए कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां गंगा के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा है। उन्होंने एक बार कहा था कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है। इसी भावना के साथ गंगा की सफाई और पुनरुद्धार के लिए 'नमामि गंगे' जैसी योजनाएं शुरू की गईं।'
विशेषज्ञ और संत क्या कहते हैं
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महंत बलवीर गिरि महाराज ने इस अवसर के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, 'इस पवित्र काल का बहुत अधिक आध्यात्मिक महत्व है। इस समय गंगा दशहरा का पर्व और 'नौ तपा' का काल चल रहा है। भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। पवन देव के पुत्र होने के कारण मान्यता है कि भगवान हनुमान भीषण गर्मी में लोगों को शीतलता और राहत प्रदान करते हैं।'
आगे का क्रम
गंगा दशहरा का यह पर्व प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है और काशी में इसकी विशेष धार्मिक परंपरा रही है। इस वर्ष के आयोजन ने एक बार फिर वाराणसी को देश की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित किया, जहाँ आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।