22 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

श्रीनगर में शी-लाइफ कार्यशाला: NRLM के तहत ग्रामीण महिलाओं को कृषि-पशुपालन उद्यमी बनाने का मंथन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
श्रीनगर में शी-लाइफ कार्यशाला: NRLM के तहत ग्रामीण महिलाओं को कृषि-पशुपालन उद्यमी बनाने का मंथन

सारांश

श्रीनगर में NRLM की शी-लाइफ कार्यशाला सिर्फ एक बैठक नहीं — यह 8.50 लाख ग्रामीण महिलाओं के लिए एक रोडमैप बनाने की कोशिश है। 3 करोड़ लखपति दीदी की उपलब्धि के बाद अब लक्ष्य 6 करोड़ का है, और इस कार्यशाला में तैयार गाइडलाइन उस सपने को ज़मीन पर उतारने की कुंजी बन सकती है।

मुख्य बातें

NRLM के तहत ' शी-लाइफ ' परामर्श कार्यशाला 22 सितंबर से 24 सितंबर 2026 तक श्रीनगर में आयोजित हो रही है।
जम्मू-कश्मीर में 96,000 स्वयं-सहायता समूहों से 8.50 लाख महिलाएँ NRLM से जुड़ी हैं।
देश भर में अब तक 87 लाख उद्यमी तैयार किए जा चुके हैं और 3 करोड़ लखपति दीदी कार्यक्रम से लाभान्वित हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य 6 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है।
कार्यशाला में कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल; महिलाओं के लिए एक व्यावहारिक गाइडलाइन तैयार करने पर ज़ोर।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत स्वयं-सहायता उद्यमी कार्यक्रम 'शी-लाइफ' पर एक महत्वपूर्ण परामर्श कार्यशाला 22 सितंबर 2026 को श्रीनगर में शुरू हुई, जो 24 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस कार्यशाला का केंद्रीय उद्देश्य स्वयं-सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को खेती और पशुपालन से संबंधित उद्यमों में स्वावलंबी बनाना है।

कार्यशाला का उद्देश्य और संरचना

कार्यशाला में कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जो ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तता में आने वाली बाधाओं और कमियों की पहचान करेंगे। डॉ. राजेश्वरी ने बताया, 'इस कार्यशाला में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मंथन किया जाएगा। महिलाओं को खेती से जुड़ी उद्यमी बनाने और उनकी मदद के लिए कार्यशाला में चर्चा की जाएगी।'

उन्होंने आगे कहा कि कार्यशाला का एक प्रमुख लक्ष्य एक व्यावहारिक दिशानिर्देश (गाइडलाइन) तैयार करना है, जो ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में दीर्घकालिक मदद करे।

जम्मू-कश्मीर में स्वयं-सहायता समूहों की स्थिति

डॉ. राजेश्वरी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में इस समय 96,000 स्वयं-सहायता समूहों के माध्यम से 8.50 लाख महिलाएँ NRLM से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, 'ग्रामीण महिलाएँ बहुत संपन्न हैं और उनमें काम करने की लगन होती है। इन महिलाओं को सिर्फ मार्गदर्शन करने की ज़रूरत होती है।' यह आँकड़ा दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में SHG नेटवर्क एक व्यापक आधार पर खड़ा है, जिसे उद्यमिता के लिए तैयार किया जा सकता है।

लखपति दीदी लक्ष्य और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

कार्यक्रम में उपस्थित एक महिला अधिकारी ने बताया कि देश भर में अब तक 87 लाख उद्यमी तैयार किए जा चुके हैं और वर्तमान में 3 करोड़ लखपति दीदी कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं तक पहुँचाना है। यह कार्यशाला उसी व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक कदम है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि NRLM के शी-लाइफ जैसे कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाते हैं, बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र में उत्पादकता भी बढ़ाते हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्र में, जहाँ पारंपरिक रोज़गार के अवसर सीमित हैं, महिला उद्यमिता की यह लहर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।

आगे की राह

कार्यशाला 24 सितंबर 2026 तक चलेगी, और इसमें तैयार की जाने वाली गाइडलाइन भविष्य में अन्य राज्यों में भी लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशानिर्देश को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो लखपति दीदी के 6 करोड़ के लक्ष्य को हासिल करना अधिक व्यावहारिक हो सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी देखना ज़रूरी है कि इनमें से कितनी महिलाएँ वास्तव में टिकाऊ आय अर्जित कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर में 8.50 लाख महिलाओं की भागीदारी एक मज़बूत आधार है, फिर भी पहाड़ी भूगोल, बाज़ार तक सीमित पहुँच और ऋण सुविधाओं की कमी जैसी संरचनात्मक चुनौतियाँ बनी हैं। असली कसौटी यह होगी कि इस कार्यशाला में बनी गाइडलाइन क्या इन बाधाओं का व्यावहारिक समाधान देती है, या यह भी सफल आँकड़ों की एक और सूची बनाने तक सीमित रह जाती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शी-लाइफ कार्यशाला क्या है और यह श्रीनगर में क्यों आयोजित की गई?
शी-लाइफ (SHE-LIFE) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की एक पहल है, जिसका उद्देश्य स्वयं-सहायता समूहों की महिलाओं को कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सफल उद्यमी बनाना है। श्रीनगर में 22 से 24 सितंबर 2026 के बीच आयोजित यह कार्यशाला एक व्यावहारिक गाइडलाइन तैयार करने और कई राज्यों के अनुभव साझा करने के लिए बुलाई गई है।
जम्मू-कश्मीर में NRLM से कितनी महिलाएँ जुड़ी हैं?
जम्मू-कश्मीर में 96,000 स्वयं-सहायता समूहों के माध्यम से 8.50 लाख महिलाएँ NRLM से जुड़ी हैं। इन समूहों के ज़रिए ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है और उन्हें उद्यमिता की ओर प्रेरित किया जाता है।
लखपति दीदी योजना का लक्ष्य क्या है और अब तक कितनी महिलाएँ लाभान्वित हो चुकी हैं?
अब तक देश भर में 3 करोड़ महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं तक पहुँचाना है, और शी-लाइफ जैसी कार्यशालाएँ इसी दिशा में काम कर रही हैं।
इस कार्यशाला से ग्रामीण महिलाओं को क्या फायदा होगा?
कार्यशाला में एक गाइडलाइन तैयार की जाएगी जो ग्रामीण महिलाओं को खेती और पशुपालन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ाने में मदद करेगी। कई राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर उन बाधाओं और कमियों की पहचान करेंगे जो महिलाओं की आर्थिक उन्नति में रुकावट बनती हैं।
देश में अब तक कितने उद्यमी तैयार किए जा चुके हैं?
कार्यशाला में उपस्थित एक महिला अधिकारी के अनुसार, देश भर में अब तक 87 लाख उद्यमी तैयार किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य भविष्य में यह आँकड़ा और बढ़ाने का है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 5 दिन पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले