श्रीनगर में शी-लाइफ कार्यशाला: NRLM के तहत ग्रामीण महिलाओं को कृषि-पशुपालन उद्यमी बनाने का मंथन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत स्वयं-सहायता उद्यमी कार्यक्रम 'शी-लाइफ' पर एक महत्वपूर्ण परामर्श कार्यशाला 22 सितंबर 2026 को श्रीनगर में शुरू हुई, जो 24 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस कार्यशाला का केंद्रीय उद्देश्य स्वयं-सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को खेती और पशुपालन से संबंधित उद्यमों में स्वावलंबी बनाना है।
कार्यशाला का उद्देश्य और संरचना
कार्यशाला में कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जो ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक सशक्तता में आने वाली बाधाओं और कमियों की पहचान करेंगे। डॉ. राजेश्वरी ने बताया, 'इस कार्यशाला में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मंथन किया जाएगा। महिलाओं को खेती से जुड़ी उद्यमी बनाने और उनकी मदद के लिए कार्यशाला में चर्चा की जाएगी।'
उन्होंने आगे कहा कि कार्यशाला का एक प्रमुख लक्ष्य एक व्यावहारिक दिशानिर्देश (गाइडलाइन) तैयार करना है, जो ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में दीर्घकालिक मदद करे।
जम्मू-कश्मीर में स्वयं-सहायता समूहों की स्थिति
डॉ. राजेश्वरी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में इस समय 96,000 स्वयं-सहायता समूहों के माध्यम से 8.50 लाख महिलाएँ NRLM से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, 'ग्रामीण महिलाएँ बहुत संपन्न हैं और उनमें काम करने की लगन होती है। इन महिलाओं को सिर्फ मार्गदर्शन करने की ज़रूरत होती है।' यह आँकड़ा दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर में SHG नेटवर्क एक व्यापक आधार पर खड़ा है, जिसे उद्यमिता के लिए तैयार किया जा सकता है।
लखपति दीदी लक्ष्य और राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
कार्यक्रम में उपस्थित एक महिला अधिकारी ने बताया कि देश भर में अब तक 87 लाख उद्यमी तैयार किए जा चुके हैं और वर्तमान में 3 करोड़ लखपति दीदी कार्यक्रम से लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं तक पहुँचाना है। यह कार्यशाला उसी व्यापक लक्ष्य की दिशा में एक कदम है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि NRLM के शी-लाइफ जैसे कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाते हैं, बल्कि कृषि और पशुपालन क्षेत्र में उत्पादकता भी बढ़ाते हैं। जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्र में, जहाँ पारंपरिक रोज़गार के अवसर सीमित हैं, महिला उद्यमिता की यह लहर स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।
आगे की राह
कार्यशाला 24 सितंबर 2026 तक चलेगी, और इसमें तैयार की जाने वाली गाइडलाइन भविष्य में अन्य राज्यों में भी लागू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशानिर्देश को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो लखपति दीदी के 6 करोड़ के लक्ष्य को हासिल करना अधिक व्यावहारिक हो सकेगा।