27 अगस्त 2026
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नीमच में 'आजीविका राखी मेला': एनआरएलएम की 30 स्टॉलों पर ग्रामीण दीदियों के हस्तनिर्मित उत्पाद, लखपति दीदी विजन को मिली रफ्तार

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नीमच में 'आजीविका राखी मेला': एनआरएलएम की 30 स्टॉलों पर ग्रामीण दीदियों के हस्तनिर्मित उत्पाद, लखपति दीदी विजन को मिली रफ्तार

सारांश

नीमच के जनपद पंचायत परिसर में एनआरएलएम का चार दिवसीय 'आजीविका राखी मेला' ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता का जीवंत उदाहरण बन गया है — जहाँ इको-फ्रेंडली राखियों से लेकर ऑर्गेनिक मसालों तक, 30 स्टॉलें 'लखपति दीदी' विजन को ज़मीन पर उतार रही हैं।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने नीमच के जनपद पंचायत परिसर में 24 से 27 अगस्त 2026 तक 'आजीविका राखी मेला' आयोजित किया।
मेले में ग्रामीण स्व सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की लगभग 30 स्टॉलें लगाई गई हैं।
हस्तनिर्मित इको-फ्रेंडली राखियाँ, ऑर्गेनिक मसाले, बांस शिल्प, अगरबत्ती और डिजाइनर परिधान बाज़ार से कम दरों पर उपलब्ध।
डूंगलावदा की अन्नू बैरवा 2018 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं और मेले से आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि बता रही हैं।
विकास खंड प्रबंधक राजेंद्र कुमार चौहान के अनुसार यह आयोजन प्रधानमंत्री के महिला सशक्तिकरण विजन के अनुरूप है।

मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने नीमच के जनपद पंचायत परिसर में 24 से 27 अगस्त 2026 तक चार दिवसीय 'आजीविका राखी मेला' आयोजित किया, जिसमें ग्रामीण स्व सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की लगभग 30 स्टॉलें लगाई गई हैं। यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लखपति दीदी' विजन को ज़मीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

मेले में क्या-क्या उपलब्ध है

मेले में ग्रामीण महिलाओं द्वारा हाथ से बनाई गई इको-फ्रेंडली राखियाँ, शुद्ध मसाले (हल्दी, धनिया), पापड़, अचार, पूजन सामग्री, अगरबत्ती, बरी, लड्डू गोपाल की पोशाकें, बांस शिल्प उत्पाद और डिजाइनर परिधान प्रदर्शित एवं विक्रय किए जा रहे हैं। रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए इस मेले में राखी को विशेष केंद्र बिंदु बनाया गया है। स्थानीय उपभोक्ताओं ने उत्पादों की शुद्धता, गुणवत्ता और बाज़ार से कम दरों की सराहना की।

स्व सहायता समूह की महिलाओं की आवाज़

डूंगलावदा की स्व सहायता समूह सदस्य अन्नू बैरवा ने बताया कि वे 2018 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं और इस मेले में स्टॉल लगाने से उनकी आमदनी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, 'जो पहले कुछ नहीं कर पाते थे, अब हम आत्मनिर्भर बन गए।' उनके अनुसार किराना, राखी, साड़ी, अगरबत्ती और दोना-पत्तल सहित विभिन्न प्रकार की स्टॉलें आसपास के ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने लगाई हैं।

वैष्णवी स्व सहायता समूह की अलका सेन ने बताया कि उनके समूह ने मिलकर राखियाँ बनाईं और जनपद पंचायत में स्टॉल लगाई। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से उन जैसी महिलाओं को रोज़गार मिला और किफायती दरों पर राखियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया

मेले में खरीदारी करने पहुँचीं भारती सिंघल ने कहा कि यहाँ हाथ से बनी चीज़ें — मसाले, राखियाँ, अचार, पापड़ — बाज़ार के मुकाबले बहुत कम दाम पर मिल रही हैं और उन्होंने स्वयं खरीदारी की। एक अन्य उपभोक्ता गुणवंत जैन ने बताया कि यहाँ मिलने वाली राखियाँ रासायनिक मुक्त और हस्तनिर्मित हैं, जबकि बाज़ार में मिलावट की समस्या आम है। उन्होंने इसे सरकार का सराहनीय कदम बताया।

प्रशासन का नज़रिया

विकास खंड प्रबंधक राजेंद्र कुमार चौहान ने बताया कि यह मेला प्रधानमंत्री की उस मंशा के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है जिसमें महिला दीदियों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि मेले में ऑर्गेनिक मसाले, बांस उत्पाद, हस्तनिर्मित रुई-बत्ती और डिजाइनर परिधान भी विक्रय के लिए उपलब्ध हैं।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार 'लखपति दीदी' योजना के तहत देशभर में करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को वार्षिक ₹1 लाख से अधिक की आय के दायरे में लाने का लक्ष्य रख रही है। गौरतलब है कि एनआरएलएम जैसे मिशन इस लक्ष्य को पूरा करने में स्व सहायता समूहों को मुख्य माध्यम के रूप में उपयोग कर रहे हैं। नीमच का यह मेला उस व्यापक प्रयास की एक स्थानीय अभिव्यक्ति है, जो त्योहारी सीज़न को ग्रामीण उद्यमिता के अवसर में बदलने की कोशिश करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या त्योहारी सीज़न की इन बिक्री से महिलाओं की आय में साल भर का टिकाऊ बदलाव आता है या यह सिर्फ मौसमी राहत तक सीमित रहता है। एनआरएलएम के माध्यम से स्व सहायता समूहों को बाज़ार से जोड़ना सही दिशा है, पर बिना नियमित बाज़ार पहुँच, डिजिटल भुगतान एकीकरण और आपूर्ति श्रृंखला समर्थन के, ये प्रयास छिटपुट रहने का जोखिम उठाते हैं। मेले जैसे आयोजन दृश्यता देते हैं — पर दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर संस्थागत समर्थन अनिवार्य है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजीविका राखी मेला नीमच क्या है और कब तक चलेगा?
यह एनआरएलएम द्वारा नीमच के जनपद पंचायत परिसर में आयोजित चार दिवसीय मेला है, जो 24 से 27 अगस्त 2026 तक चलता है। इसमें ग्रामीण स्व सहायता समूहों की महिलाओं के हस्तनिर्मित उत्पादों की लगभग 30 स्टॉलें लगाई गई हैं।
मेले में कौन-से उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं?
मेले में इको-फ्रेंडली राखियाँ, ऑर्गेनिक मसाले (हल्दी, धनिया), पापड़, अचार, अगरबत्ती, बरी, लड्डू गोपाल की पोशाकें, बांस शिल्प उत्पाद और डिजाइनर परिधान उपलब्ध हैं। ये सभी उत्पाद बाज़ार के मुकाबले कम दरों पर मिल रहे हैं।
'लखपति दीदी' विजन से इस मेले का क्या संबंध है?
केंद्र सरकार की 'लखपति दीदी' योजना का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को सालाना ₹1 लाख से अधिक की आय दिलाना है। एनआरएलएम का यह मेला उसी विजन को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास है, जिसमें स्व सहायता समूहों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जाता है।
एनआरएलएम से जुड़ी महिलाओं को इस मेले से क्या फायदा हो रहा है?
डूंगलावदा की अन्नू बैरवा जैसी महिलाएँ, जो 2018 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं, बताती हैं कि मेले में स्टॉल लगाने से उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जो महिलाएँ पहले घर से बाहर नहीं निकल पाती थीं, वे अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं।
क्या मेले में मिलने वाले उत्पाद बाज़ार से अलग हैं?
उपभोक्ताओं के अनुसार मेले में मिलने वाली राखियाँ रासायनिक मुक्त और हस्तनिर्मित हैं, जबकि बाज़ार में मिलावट की समस्या आम है। मसाले, अचार और पापड़ भी घर पर बने हैं और बाज़ार दरों से सस्ते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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