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पश्चिम बंगाल: 22 लाख प्रवासी मजदूर परिवारों को मिलेगा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड, 125 दिन काम की गारंटी

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पश्चिम बंगाल: 22 लाख प्रवासी मजदूर परिवारों को मिलेगा ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड, 125 दिन काम की गारंटी

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार ने 22 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर परिवारों को ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड देने की प्रक्रिया शुरू की है — यह वीबी-जी-राम जी एक्ट 2025 के तहत 125 दिन के काम की कानूनी गारंटी का दांव है, जो पलायन की दर घटाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 26 अगस्त 2026 को सभी जिलाधिकारियों को प्रवासी मजदूर परिवारों की पहचान का निर्देश दिया।
पहचाने गए परिवारों को 'ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड' (जीआरजीसी) जारी किए जाएंगे, जो 125 दिन के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी देते हैं।
राज्य में अब तक पहचाने गए प्रवासी मजदूरों की संख्या 22 लाख से अधिक है।
वीबी-जी-राम जी एक्ट, 2025 राज्य में 1 जुलाई 2025 से लागू है।
केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत राज्य को लगभग ₹1.265 करोड़ की सहायता पहले ही मंजूर कर दी है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 26 अगस्त 2026 को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में प्रवासी मजदूरों के परिवारों की पहचान तत्काल पूरी करें, ताकि उन्हें 'ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड' (जीआरजीसी) जारी किए जा सकें। ये कार्ड ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करते हैं, बशर्ते संबंधित सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों।

नया कानून और उसकी पृष्ठभूमि

राज्य के पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में एक आधिकारिक सर्कुलर सभी जिलाधिकारियों को भेजा है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई 2025 से 'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी-राम जी) एक्ट, 2025' लागू हो चुका है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को एक वित्त वर्ष में अधिकतम 125 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती है।

गौरतलब है कि यह कानून केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य स्तर पर लागू किया गया है, और इसके तहत राज्य के ग्रामीण विकास मंत्रालय को लगभग ₹1.265 करोड़ की केंद्रीय सहायता पहले ही मंजूर हो चुकी है।

प्रवासी मजदूरों पर विशेष फोकस

राज्य श्रम विभाग के अनुमान के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अब तक पहचाने गए प्रवासी मजदूरों की संख्या 22 लाख से अधिक है। यह सूची संबंधित जिला प्रशासनों को पहले ही सौंपी जा चुकी है। अब उस डेटा के आधार पर परिवारों की वास्तविक स्थिति की जाँच का काम शुरू होगा।

अधिकारी ने बताया कि पंचायत विभाग की दिशानिर्देशों में प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को विशेष प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य उन श्रमिकों के लिए अपने गृह राज्य लौटने की व्यावहारिक गुंजाइश बनाना है जो रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं।

सरकार की मंशा और प्रशासनिक निर्देश

राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट रूप से सलाह दी है कि प्रवासी मजदूर परिवारों की पहचान और उनके डेटा की जाँच को महज एक रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया न समझा जाए। प्रशासन का लक्ष्य इस गारंटी का उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित आय के अवसर पैदा करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और पलायन की दर को कम करना है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में श्रमिक पलायन एक दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक चुनौती रही है, और राज्य सरकार पर ग्रामीण रोजगार के ठोस विकल्प तैयार करने का दबाव बना हुआ है।

आगे क्या होगा

जिलाधिकारियों से अपेक्षा है कि वे प्रवासी परिवारों की पहचान प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी कर जीआरजीसी वितरण का रास्ता साफ करें। वीबी-जी-राम जी एक्ट, 2025 के तहत पात्र परिवारों को कार्ड मिलने के बाद वे स्थानीय स्तर पर काम की माँग कर सकेंगे और उन्हें निर्धारित समयसीमा में रोजगार उपलब्ध कराना प्रशासन की कानूनी जिम्मेदारी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन में है — 22 लाख प्रवासी मजदूरों की पहचान एक बात है, उन्हें समयबद्ध तरीके से काम देना बिल्कुल दूसरी। मनरेगा जैसी पिछली योजनाओं में भी ग्रामीण रोजगार गारंटी का कागजी ढाँचा मजबूत था, लेकिन माँग पर काम की उपलब्धता और भुगतान में देरी बड़ी समस्याएँ रहीं। यह भी देखना होगा कि जो मजदूर दूसरे राज्यों में बेहतर मजदूरी के लिए गए हैं, वे 125 दिन की स्थानीय गारंटी के भरोसे वापस लौटने को तैयार होंगे या नहीं — क्योंकि पलायन अक्सर मजबूरी नहीं, मजदूरी के अंतर की वजह से होता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड (जीआरजीसी) क्या है?
जीआरजीसी पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वीबी-जी-राम जी एक्ट, 2025 के तहत जारी किया जाने वाला कार्ड है, जो ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वेतन-रोजगार की कानूनी गारंटी देता है। यह सुविधा उन्हीं के लिए है जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों।
वीबी-जी-राम जी एक्ट, 2025 क्या है और यह कब लागू हुआ?
'विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025' पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई 2025 से लागू हुआ है। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देता है और इसके क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने लगभग ₹1.265 करोड़ की सहायता मंजूर की है।
पश्चिम बंगाल में कितने प्रवासी मजदूर हैं और उनकी पहचान कैसे होगी?
राज्य श्रम विभाग के अनुमान के अनुसार पश्चिम बंगाल में अब तक 22 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों की पहचान हो चुकी है। उनकी सूची जिला प्रशासनों को सौंपी जा चुकी है और अब जिलाधिकारी उस डेटा के आधार पर परिवारों की वास्तविक स्थिति की जाँच करेंगे।
इस योजना से प्रवासी मजदूरों को क्या फायदा होगा?
इस योजना का उद्देश्य प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जिले में ही नियमित आय का अवसर देना है, ताकि वे अपने परिवारों के पास रह सकें। स्थानीय रोजगार की गारंटी मिलने से पलायन की दर कम होने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलने की उम्मीद है।
जिलाधिकारियों को क्या विशेष निर्देश दिए गए हैं?
राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को स्पष्ट किया है कि प्रवासी परिवारों की पहचान और डेटा जाँच को महज एक रूटीन प्रक्रिया न माना जाए, बल्कि इसे प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए। पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है।
राष्ट्र प्रेस
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