25 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पश्चिम बंगाल: BJP सरकार ने मनरेगा में 2.56 करोड़ जॉब कार्ड की जाँच और 100% ई-केवाईसी अनिवार्य किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पश्चिम बंगाल: BJP सरकार ने मनरेगा में 2.56 करोड़ जॉब कार्ड की जाँच और 100% ई-केवाईसी अनिवार्य किया

सारांश

पश्चिम बंगाल की नई BJP सरकार ने मनरेगा में जड़ जमाए भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार किया है — 2.56 करोड़ जॉब कार्डों की जाँच, 100% ई-केवाईसी और पूर्ण डिजिटल निगरानी के साथ। यह पिछली सरकार की विरासत से सीधा टकराव है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने 8 जून 2026 को जिला मजिस्ट्रेटों को मनरेगा निगरानी के सख्त निर्देश जारी किए।
राज्य में 2 करोड़ 56 लाख जॉब कार्ड लाभार्थियों के डेटाबेस की पूर्ण समीक्षा और 100% ई-केवाईसी सत्यापन अनिवार्य किया गया।
श्रमिकों को वेतन भुगतान अब केवल आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) से होगा।
कार्यस्थलों की जियो-टैगिंग , ई-एमबी और FTO सहित सभी कार्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य।
पिछली सरकार की 'बांग्लार बाड़ी' परियोजना के फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई के निर्देश।
अनियमितता साबित होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल की नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 8 जून 2026 को जारी निर्देशों में राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निगरानी बढ़ाने और हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। इस महीने की शुरुआत से पुनः शुरू की गई 100 दिवसीय कार्य योजना में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अपारदर्शिता को बर्दाश्त न करने की नीति अपनाई गई है।

2.56 करोड़ जॉब कार्ड डेटाबेस की समीक्षा

राज्य सचिवालय नबन्ना के अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सचिव के निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य में लगभग 2 करोड़ 56 लाख जॉब कार्ड लाभार्थियों के डेटाबेस को पूरी तरह संशोधित किया जाएगा। फर्जी नामों की लंबे समय से चली आ रही समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रत्येक सक्रिय कर्मचारी का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। श्रमिकों को वेतन भुगतान केवल आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) के माध्यम से किया जाएगा।

डिजिटल निगरानी का नया ढाँचा

फर्जी मास्टर रोल और वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए अब सभी महत्वपूर्ण कार्य एक विशिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरे किए जाने अनिवार्य होंगे। इनमें कार्यस्थलों की जियो-टैगिंग, सटीक लागत निर्धारण, मास्टर रोल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका (ई-एमबी) और निधि हस्तांतरण प्रस्ताव (FTO) शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अतीत में अपर्याप्त योजना, कम पर्यवेक्षण, अत्यधिक कार्य की स्वीकृति और धोखाधड़ीपूर्ण गणनाओं के कारण परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी।

'बांग्लार बाड़ी' लाभार्थी सूची पर भी सख्ती

सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल में संचालित 'बांग्लार बाड़ी' परियोजना के लाभार्थियों की सूची पर भी कड़ा रुख अपनाया है। फर्जी लाभार्थियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्रीय योजनाओं के पुराने क्रियान्वयन की व्यापक जाँच की माँग उठ रही थी।

जिला अधिकारियों की जवाबदेही तय

निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने के लिए जिला मजिस्ट्रेटों और ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) को जिला कार्यक्रम समन्वयक की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यस्थल की भौतिक स्थिति, परिसंपत्तियों की गुणवत्ता, माप अभिलेख, सामग्री खरीद और मजदूरी भुगतान के लिए नियमित और अनिवार्य निरीक्षण प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अनियमितता साबित होने पर कानूनी कार्रवाई

मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने दिशानिर्देशों में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल सूचना के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा। यदि लेखापरीक्षा रिपोर्ट, निरीक्षण डेटा और डिजिटल साक्ष्य के आधार पर अनियमितताएँ सिद्ध होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब राज्य में मनरेगा के लिए इतनी व्यापक डिजिटल जवाबदेही प्रणाली एक साथ लागू की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। 2.56 करोड़ जॉब कार्डों का सत्यापन एक विशाल प्रशासनिक कार्य है, और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने की क्षमता अभी अप्रमाणित है। 'बांग्लार बाड़ी' पर कार्रवाई पिछली सरकार को घेरने की राजनीतिक मंशा भी दर्शाती है — जो जवाबदेही और राजनीतिक एजेंडे के बीच की रेखा को धुंधला करती है। डिजिटल निगरानी तंत्र मजबूत दिखता है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर कनेक्टिविटी और प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी इसकी सबसे बड़ी चुनौती बनेगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में मनरेगा की 100 दिवसीय कार्य योजना दोबारा कब शुरू की गई?
यह योजना जून 2026 की शुरुआत में पुनः शुरू की गई है, ताकि ग्रामीण रोजगार चाहने वालों को रोजगार के अवसर मिल सकें। नई BJP सरकार ने इसके साथ ही कड़ी निगरानी व्यवस्था भी लागू की है।
मनरेगा में ई-केवाईसी सत्यापन क्यों अनिवार्य किया गया है?
राज्य में जॉब कार्ड डेटाबेस में फर्जी नामों की लंबे समय से चली आ रही समस्या को दूर करने के लिए 100% ई-केवाईसी अनिवार्य किया गया है। इससे 2.56 करोड़ लाभार्थियों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।
'बांग्लार बाड़ी' परियोजना पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
नई सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल में चलाई गई 'बांग्लार बाड़ी' परियोजना के लाभार्थियों की सूची की जाँच के आदेश दिए हैं। फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था में क्या-क्या शामिल है?
नई व्यवस्था में कार्यस्थलों की जियो-टैगिंग, इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका (ई-एमबी), निधि हस्तांतरण प्रस्ताव (FTO), मास्टर रोल निर्माण और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) शामिल हैं। ये सभी कार्य एक विशिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनिवार्य रूप से पूरे किए जाने हैं।
अनियमितता पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ क्या होगा?
मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल के निर्देशों के अनुसार, लेखापरीक्षा रिपोर्ट, निरीक्षण डेटा और डिजिटल साक्ष्य के आधार पर अनियमितताएँ सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन में किसी भी लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले