पश्चिम बंगाल: BJP सरकार ने मनरेगा में 2.56 करोड़ जॉब कार्ड की जाँच और 100% ई-केवाईसी अनिवार्य किया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 8 जून 2026 को जारी निर्देशों में राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निगरानी बढ़ाने और हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। इस महीने की शुरुआत से पुनः शुरू की गई 100 दिवसीय कार्य योजना में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अपारदर्शिता को बर्दाश्त न करने की नीति अपनाई गई है।
2.56 करोड़ जॉब कार्ड डेटाबेस की समीक्षा
राज्य सचिवालय नबन्ना के अधिकारियों के अनुसार, मुख्य सचिव के निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य में लगभग 2 करोड़ 56 लाख जॉब कार्ड लाभार्थियों के डेटाबेस को पूरी तरह संशोधित किया जाएगा। फर्जी नामों की लंबे समय से चली आ रही समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रत्येक सक्रिय कर्मचारी का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। श्रमिकों को वेतन भुगतान केवल आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) के माध्यम से किया जाएगा।
डिजिटल निगरानी का नया ढाँचा
फर्जी मास्टर रोल और वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए अब सभी महत्वपूर्ण कार्य एक विशिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरे किए जाने अनिवार्य होंगे। इनमें कार्यस्थलों की जियो-टैगिंग, सटीक लागत निर्धारण, मास्टर रोल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तिका (ई-एमबी) और निधि हस्तांतरण प्रस्ताव (FTO) शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अतीत में अपर्याप्त योजना, कम पर्यवेक्षण, अत्यधिक कार्य की स्वीकृति और धोखाधड़ीपूर्ण गणनाओं के कारण परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी।
'बांग्लार बाड़ी' लाभार्थी सूची पर भी सख्ती
सरकार ने पिछली सरकार के कार्यकाल में संचालित 'बांग्लार बाड़ी' परियोजना के लाभार्थियों की सूची पर भी कड़ा रुख अपनाया है। फर्जी लाभार्थियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्रीय योजनाओं के पुराने क्रियान्वयन की व्यापक जाँच की माँग उठ रही थी।
जिला अधिकारियों की जवाबदेही तय
निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करने के लिए जिला मजिस्ट्रेटों और ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) को जिला कार्यक्रम समन्वयक की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यस्थल की भौतिक स्थिति, परिसंपत्तियों की गुणवत्ता, माप अभिलेख, सामग्री खरीद और मजदूरी भुगतान के लिए नियमित और अनिवार्य निरीक्षण प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अनियमितता साबित होने पर कानूनी कार्रवाई
मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने दिशानिर्देशों में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल सूचना के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा। यदि लेखापरीक्षा रिपोर्ट, निरीक्षण डेटा और डिजिटल साक्ष्य के आधार पर अनियमितताएँ सिद्ध होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब राज्य में मनरेगा के लिए इतनी व्यापक डिजिटल जवाबदेही प्रणाली एक साथ लागू की जा रही है।