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IIT मद्रास में ₹3.30 करोड़ की रोबोटिक्स लैब, निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक पर होगी रिसर्च

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IIT मद्रास में ₹3.30 करोड़ की रोबोटिक्स लैब, निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक पर होगी रिसर्च

सारांश

IIT मद्रास ने ₹3.30 करोड़ की रोबोटिक्स लैब खोली — बेक्टेल इंडिया की CSR साझेदारी से। शोध सिर्फ कागज़ तक नहीं, वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में उतरेगा। अगले पाँच से दस साल में प्रोटोटाइप, पेटेंट और इंटर्नशिप — भारत के इंफ्रा बूम के लिए तैयार होंगे अगले दौर के इंजीनियर।

मुख्य बातें

IIT मद्रास ने 22 सितंबर 2026 को ₹3.30 करोड़ की रोबोटिक्स प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।
प्रयोगशाला बेक्टेल इंडिया के CSR सहयोग से स्थापित; निर्माण व बुनियादी ढाँचा क्षेत्र पर फोकस।
तकनीक केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं — वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में उपयोग की योजना।
छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अवसर; बेक्टेल विशेषज्ञ पाठ्यक्रम व मार्गदर्शन में सहयोग करेंगे।
लैब का नेतृत्व प्रो.
सहयोग पाँच से दस वर्षों के लिए; शोध पत्र और पेटेंट भी अपेक्षित।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने 22 सितंबर 2026 को अपने परिसर में ₹3.30 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक रोबोटिक्स प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य निर्माण और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में स्वचालन और नई तकनीकों को व्यावहारिक स्तर तक पहुँचाना है। यह प्रयोगशाला बेक्टेल इंडिया के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सहयोग से स्थापित की गई है।

प्रयोगशाला की प्रमुख विशेषताएँ

इस लैब में रोबोटिक्स, स्वचालन और उन्नत निर्माण तकनीकों पर केंद्रित शोध किया जाएगा। संस्थान के अनुसार, यहाँ विकसित होने वाली तकनीकें केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेंगी — उन्हें परखा जाएगा, प्रदर्शित किया जाएगा और वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाएँ तलाशी जाएँगी। नए प्रोटोटाइप तैयार किए जाएँगे, और भविष्य में शोध पत्र तथा पेटेंट भी सामने आ सकते हैं।

छात्रों और शोधकर्ताओं को सीधा लाभ

इस पहल के तहत IIT मद्रास के छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का अवसर मिलेगा। बेक्टेल के विशेषज्ञ तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे और पाठ्यक्रम निर्माण में अपना उद्योग अनुभव साझा करेंगे। इसके अतिरिक्त, चयनित छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अवसर भी तलाशे जाएँगे, जिससे उन्हें शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त होगा।

विशेषज्ञों की राय

IIT मद्रास के डीन प्रो. अश्विन महालिंगम ने कहा कि उद्योग और अकादमिक संस्थानों की साझेदारी रोबोटिक्स जैसे विशेष क्षेत्रों में शोध को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। उनके अनुसार, इससे निर्माण क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने और नई तकनीकों को व्यावहारिक उपयोग के करीब लाने में मदद मिलेगी। प्रयोगशाला का नेतृत्व प्रो. टी. असोकन और प्रो. कोशी वर्गीज करेंगे।

दीर्घकालिक लक्ष्य और आगे की राह

संस्थान के अनुसार यह सहयोग दीर्घकालिक है — अगले पाँच से दस वर्षों में उद्योग से जुड़े कई परियोजनाओं और तकनीकी अनुप्रयोगों पर काम करने की योजना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बुनियादी ढाँचा विस्तार की रफ्तार बढ़ रही है और निर्माण क्षेत्र में कुशल तकनीकी जनशक्ति की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। इस पहल का अंतिम लक्ष्य निर्माण रोबोटिक्स और उन्नत इंजीनियरिंग में भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप कुशल प्रतिभाएँ तैयार करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और स्वचालन की रफ्तार वैश्विक औसत से पीछे है। असली कसौटी यह होगी कि यहाँ विकसित प्रोटोटाइप कितनी तेज़ी से व्यावसायिक परियोजनाओं में उतरते हैं — क्योंकि भारत में कई शोध पहल 'लैब-टु-फील्ड' की दहलीज़ पर ही रुक जाती हैं। पेटेंट और शोध पत्रों के साथ-साथ यदि वास्तविक तैनाती के आँकड़े सामने आएँ, तभी यह पहल देश के इंफ्रा बूम में सार्थक भूमिका निभा सकती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IIT मद्रास की रोबोटिक्स प्रयोगशाला क्या है?
यह 22 सितंबर 2026 को IIT मद्रास परिसर में ₹3.30 करोड़ की लागत से स्थापित एक अत्याधुनिक शोध सुविधा है, जो निर्माण और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में रोबोटिक्स, स्वचालन और नई तकनीकों पर केंद्रित है। इसे बेक्टेल इंडिया के CSR सहयोग से बनाया गया है।
इस लैब में किस तरह का शोध होगा?
प्रयोगशाला में निर्माण रोबोटिक्स, स्वचालन और उन्नत निर्माण तकनीकों पर काम होगा। नए प्रोटोटाइप तैयार किए जाएँगे, तकनीकों का प्रदर्शन होगा और उन्हें वास्तविक परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाएँ तलाशी जाएँगी। शोध पत्र और पेटेंट भी अपेक्षित हैं।
इस पहल से छात्रों को क्या फायदा होगा?
छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग की वास्तविक समस्याओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। बेक्टेल के विशेषज्ञ तकनीकी मार्गदर्शन देंगे, पाठ्यक्रम में उद्योग अनुभव शामिल होगा, और चयनित छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अवसर भी तलाशे जाएँगे।
इस सहयोग की अवधि कितनी है?
IIT मद्रास के अनुसार यह एक दीर्घकालिक सहयोग है। अगले पाँच से दस वर्षों में उद्योग से जुड़े कई परियोजनाओं और तकनीकी अनुप्रयोगों पर काम करने की योजना है।
प्रयोगशाला का नेतृत्व कौन करेगा?
प्रयोगशाला का नेतृत्व IIT मद्रास के प्रो. टी. असोकन और प्रो. कोशी वर्गीज करेंगे। संस्थान के डीन प्रो. अश्विन महालिंगम ने इस उद्योग-अकादमिक साझेदारी को रोबोटिक्स शोध के लिए महत्त्वपूर्ण बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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