IIT मद्रास में ₹3.30 करोड़ की रोबोटिक्स लैब, निर्माण क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक पर होगी रिसर्च
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास ने 22 सितंबर 2026 को अपने परिसर में ₹3.30 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक रोबोटिक्स प्रयोगशाला का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य निर्माण और बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में स्वचालन और नई तकनीकों को व्यावहारिक स्तर तक पहुँचाना है। यह प्रयोगशाला बेक्टेल इंडिया के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) सहयोग से स्थापित की गई है।
प्रयोगशाला की प्रमुख विशेषताएँ
इस लैब में रोबोटिक्स, स्वचालन और उन्नत निर्माण तकनीकों पर केंद्रित शोध किया जाएगा। संस्थान के अनुसार, यहाँ विकसित होने वाली तकनीकें केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेंगी — उन्हें परखा जाएगा, प्रदर्शित किया जाएगा और वास्तविक निर्माण परियोजनाओं में उपयोग की संभावनाएँ तलाशी जाएँगी। नए प्रोटोटाइप तैयार किए जाएँगे, और भविष्य में शोध पत्र तथा पेटेंट भी सामने आ सकते हैं।
छात्रों और शोधकर्ताओं को सीधा लाभ
इस पहल के तहत IIT मद्रास के छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का अवसर मिलेगा। बेक्टेल के विशेषज्ञ तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे और पाठ्यक्रम निर्माण में अपना उद्योग अनुभव साझा करेंगे। इसके अतिरिक्त, चयनित छात्रों के लिए इंटर्नशिप के अवसर भी तलाशे जाएँगे, जिससे उन्हें शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों की राय
IIT मद्रास के डीन प्रो. अश्विन महालिंगम ने कहा कि उद्योग और अकादमिक संस्थानों की साझेदारी रोबोटिक्स जैसे विशेष क्षेत्रों में शोध को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। उनके अनुसार, इससे निर्माण क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों पर काम करने और नई तकनीकों को व्यावहारिक उपयोग के करीब लाने में मदद मिलेगी। प्रयोगशाला का नेतृत्व प्रो. टी. असोकन और प्रो. कोशी वर्गीज करेंगे।
दीर्घकालिक लक्ष्य और आगे की राह
संस्थान के अनुसार यह सहयोग दीर्घकालिक है — अगले पाँच से दस वर्षों में उद्योग से जुड़े कई परियोजनाओं और तकनीकी अनुप्रयोगों पर काम करने की योजना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में बुनियादी ढाँचा विस्तार की रफ्तार बढ़ रही है और निर्माण क्षेत्र में कुशल तकनीकी जनशक्ति की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। इस पहल का अंतिम लक्ष्य निर्माण रोबोटिक्स और उन्नत इंजीनियरिंग में भविष्य की ज़रूरतों के अनुरूप कुशल प्रतिभाएँ तैयार करना है।