आईआईटी मद्रास के 6 प्रोफेसरों को जेसी बोस अनुदान, हर साल मिलेंगे ₹25 लाख
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के 6 वरिष्ठ प्रोफेसरों को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के प्रतिष्ठित जेसी बोस अनुदान के लिए चुना गया है, जिसके तहत प्रत्येक वैज्ञानिक को 5 वर्षों तक हर साल ₹25 लाख की शोध निधि प्रदान की जाएगी। यह घोषणा 7 अगस्त 2026 को की गई। यह सम्मान देश के उन वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को दिया जाता है जिन्होंने अनुसंधान के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।
किन प्रोफेसरों को मिला यह सम्मान
इस बार चुने गए छह वैज्ञानिक हैं — प्रो. सुजाता श्रीनिवासन, प्रो. थलप्पिल प्रदीप, प्रो. दीपा वेंकिटेश, प्रो. जितेंद्र एस. सांगवई, प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन और प्रो. सुंदरगोपाल घोष। संस्थान के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी ने सभी चयनित वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान IIT मद्रास में हो रहे उच्च गुणवत्ता वाले शोध का प्रमाण है।
शोध के प्रमुख क्षेत्र और योगदान
प्रो. सुजाता श्रीनिवासन ने कृत्रिम अंग और दिव्यांगजन के लिए सहायक उपकरण विकसित किए हैं। संस्थान के अनुसार उनकी टीम ने कम लागत वाले ऐसे उपकरण तैयार किए हैं जो भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हैं — इनमें नियोफ्लाई-नियोबोल्ट प्रणाली, स्टैंडिंग व्हीलचेयर, कदम कृत्रिम घुटना और हल्की व्हीलचेयर शामिल हैं। उनके नाम भारत और विदेशों में कई पेटेंट दर्ज हैं।
प्रो. थलप्पिल प्रदीप ने स्वच्छ पेयजल तकनीक, नैनो पदार्थ और रसायन विज्ञान में विश्व स्तरीय शोध किया है। उनकी कम लागत वाली जल शुद्धिकरण तकनीक से देश के लाखों लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हुआ है। उन्हें पद्मश्री, विज्ञान श्री, एनी पुरस्कार और विनफ्यूचर पुरस्कार सहित कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं। गौरतलब है कि यह उनका तीसरा जेसी बोस कार्यकाल है।
प्रो. दीपा वेंकिटेश ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन तकनीक की विशेषज्ञ हैं। उनके नेतृत्व में भारत का पहला मल्टी कोर फाइबर परीक्षण केंद्र IIT मद्रास में स्थापित हुआ। उनका शोध उच्च क्षमता वाले संचार, सूक्ष्मतरंग प्रकाशिकी और संकेत प्रसंस्करण पर केंद्रित है।
प्रो. जितेंद्र एस. सांगवई का शोध कार्बन कैप्चर और भंडारण, गैस हाइड्रेट तथा तेल एवं गैस अभियांत्रिकी पर आधारित है। उनके 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, 43 पेटेंट दायर किए हैं और उनके शोध का उल्लेख लगभग 11,000 बार किया जा चुका है। उन्हें राष्ट्रीय भूविज्ञान पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हैं।
प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन ने चिकित्सा उपकरण और जैव-चिकित्सा यंत्रों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका शोध मस्तिष्क और मांसपेशियों की कार्यप्रणाली को समझने वाले उपकरणों पर केंद्रित है। वे 550 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और 50 से अधिक शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर चुके हैं।
प्रो. सुंदरगोपाल घोष का शोध बोरॉन आधारित रसायन विज्ञान पर केंद्रित है। उनके कार्य से उत्प्रेरण और छोटे अणुओं की सक्रियता के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खुली हैं। उन्होंने 325 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और उन्हें IIT मद्रास का अनुसंधान एवं विकास पुरस्कार भी मिल चुका है।
अनुदान राशि का उपयोग
जेसी बोस अनुदान के तहत प्रत्येक वैज्ञानिक को 5 वर्षों तक प्रतिवर्ष ₹25 लाख की निधि प्राप्त होगी। यह राशि मानव संसाधन, उपकरण, शोध सामग्री, यात्रा, प्रयोग और अन्य अनुसंधान कार्यों पर खर्च की जा सकेगी।
पात्रता और चयन प्रक्रिया
जेसी बोस अनुदान के लिए 45 से 65 वर्ष आयु के वैज्ञानिक और इंजीनियर पात्र होते हैं। चयन उनके शोध, पेटेंट, तकनीक विकास, शोध अनुदान और वैज्ञानिक उपलब्धियों के आधार पर किया जाता है। यह अनुदान देश के श्रेष्ठ वैज्ञानिकों को विज्ञान और अभियांत्रिकी के उभरते क्षेत्रों में प्रभावशाली शोध करने के लिए प्रोत्साहित करता है। IIT मद्रास का यह प्रदर्शन देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में उसकी शोध-केंद्रित पहचान को और मज़बूत करता है।