आईआईटी मद्रास 'भारत इनोवेट्स 2026' में 15 स्टार्टअप्स और 5 डीप-टेक प्रोजेक्ट्स करेगा प्रदर्शित
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास फ्रांस में 14 से 16 जून 2026 के बीच आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी शोकेस 'भारत इनोवेट्स 2026' में अपने 15 इनक्यूबेटेड स्टार्टअप्स, 5 रणनीतिक शोध परियोजनाओं और अत्याधुनिक डीप-टेक नवाचारों का प्रदर्शन करेगा। संस्थान ने 9 जून को यह घोषणा करते हुए बताया कि वह इस आयोजन के 13 थीम-आधारित क्षेत्रों में से दो — ब्लू इकोनॉमी और नेक्स्ट-जेनरेशन कम्युनिकेशंस — का नेतृत्व करेगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व
फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित 'भारत इनोवेट्स 2026' का लक्ष्य भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्रीय वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों से उभरने वाले सबसे संभावनाशील तकनीकी उद्यमों की पहचान कर उन्हें वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है। यह कार्यक्रम 'इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026' के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। आईआईटी मद्रास के अनुसार, यह मंच भारतीय नवाचारकर्ताओं को निवेशकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शोध संस्थानों और वैश्विक तकनीकी साझेदारों से सीधे जोड़ने का अवसर प्रदान करेगा।
प्रमुख तकनीकी प्रदर्शन
संस्थान के पवेलियन में पाँच प्रमुख शोध परियोजनाएँ प्रदर्शित की जाएंगी — हाइपरलूप तकनीक, लैब-ग्रोन डायमंड टेक्नोलॉजी, 5जी और 6जी संचार, स्मार्ट पोर्ट ऑटोमेशन और कम कंप्यूटिंग क्षमता वाले स्वदेशी एआई मॉडल्स। गौरतलब है कि रेल मंत्रालय ने आईआईटी मद्रास को हाइपरलूप तकनीक के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस घोषित किया है, जहाँ संस्थान टीयूटीआर हाइपरलूप स्टार्टअप के साथ मिलकर प्रोपल्शन, लेविटेशन और वैक्यूम ट्यूब तकनीकों पर काम कर रहा है।
स्टार्टअप्स की भागीदारी
कम्युनिकेशन सेगमेंट में आरईआईओ सिस्टम्स, एस्ट्रोम टेक्नोलॉजीज और विसिग नेटवर्क्स अपने स्वदेशी सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो प्लेटफॉर्म, वायरलेस बैकहॉल सिस्टम और ओपेन आरएएन-आधारित 5जी समाधान प्रदर्शित करेंगे। ब्लू इकोनॉमी सेगमेंट में प्लानिस टेक्नोलॉजीज समुद्री और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी), ऑटोनॉमस सिस्टम और एआई-आधारित अंडरवॉटर निरीक्षण समाधान पेश करेगा। जीरोसर्कल स्टार्टअप समुद्री शैवाल से बने प्राकृतिक पॉलिमर उत्पाद प्रस्तुत करेगा, जिन्हें पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग का टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है।
निदेशक का बयान
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने कहा कि यह कार्यक्रम संस्थान और फ्रांस के विश्वविद्यालयों, शोध प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा, '6जी तकनीक, साझा टेस्टबेड, मानक विकास, स्टार्टअप साझेदारी, तकनीक हस्तांतरण और प्रतिभा आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध के द्वार खुलेंगे।' इसके अतिरिक्त, इंडियन सेंटर फॉर लैब ग्रोन डायमंड्स द्वारा विकसित लेजर तकनीक भी प्रदर्शित होगी, जो हीरों के भीतर अदृश्य पहचान चिन्ह अंकित कर उनकी प्रमाणिकता और ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित करती है।
आगे की राह
यह आयोजन भारतीय संस्थानों के लिए वैश्विक निवेश और तकनीकी साझेदारी आकर्षित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनने की संभावना है। आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के माध्यम से विकसित स्वदेशी एआई मॉडल्स भी प्रदर्शित किए जाएंगे, जो कम कंप्यूटिंग संसाधनों में उन्नत परिणाम देने में सक्षम हैं। इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भारत के डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक ठोस कदम है।