'भारत इनोवेट्स 2026': PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों 14 जून को नीस में करेंगे संयुक्त उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 14 जून 2026 को फ्रांस के नीस शहर में 'भारत इनोवेट्स 2026' का संयुक्त उद्घाटन करेंगे — एक अंतरराष्ट्रीय मंच जिसका उद्देश्य भारत के डीप टेक और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के सामने प्रस्तुत करना है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पहल पर आयोजित यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 के अंतर्गत आ रहा है, जिसकी शुरुआत फरवरी 2026 में मुंबई में दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से की थी।
कार्यक्रम में क्या होगा खास
इस आयोजन में भारत के 120 नवोन्मेषकों, लगभग 15 उच्च शिक्षण संस्थानों और 500 से अधिक निवेशकों की भागीदारी होगी। इनमें प्रमुख कॉर्पोरेट कंपनियाँ, वेंचर कैपिटल फर्में, वैश्विक मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। 13 प्रमुख क्षेत्रों — जिनमें उन्नत कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण शामिल हैं — पर विशेष फोकस रहेगा।
कार्यक्रम के दौरान डीप टेक, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्ट-अप विस्तार तथा सीमा-पार निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं की उम्मीद है। भारतीय और फ्रांसीसी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच संस्थागत सहयोग को और मज़बूत करने पर भी विशेष ज़ोर रहेगा।
कौन-कौन होंगे शामिल
प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद — जिन्होंने भारत से 120 स्टार्ट-अप के चयन के लिए गठित तकनीकी पर्यवेक्षण समिति का नेतृत्व किया — भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।
भारत-फ्रांस नवाचार साझेदारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 'भारत इनोवेट्स 2026' इस श्रृंखला का पहला संस्करण है। यह आयोजन भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 के तहत हो रहा है, जो दोनों देशों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार सहयोग को नई दिशा देने की व्यापक पहल का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक डीप टेक निवेश आकर्षित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मंच भारतीय नवोन्मेषकों और संस्थानों को निवेशकों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संगठनों और सरकारी संस्थाओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। सह-विकास, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान और उभरती तकनीकों के त्वरित विकास के लिए नए रास्ते तलाशे जाएंगे। इस आयोजन से भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी और उद्यमिता मानचित्र पर और मज़बूती से स्थापित करने की उम्मीद है।