'एक बगिया मां के नाम' योजना: नीमच की महिला किसान बन रही हैं आत्मनिर्भर, फलदार बगीचों से बढ़ रही आय
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के नीमच जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की 'एक बगिया मां के नाम' योजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का नया अध्याय लिख रही है। वर्ष 2025-26 में शुरू की गई इस पहल के तहत नीमच विकासखंड में 100 महिला हितग्राहियों का चयन किया गया है, जिनके पास कम से कम दो बीघा भूमि और पर्याप्त सिंचाई सुविधा है। स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के माध्यम से चुनी गई ये महिलाएं अब फलदार बगीचों की मदद से स्थायी आजीविका की नींव रख रही हैं।
योजना की संरचना और लाभ
एनआरएलएम और अन्य सरकारी योजनाओं के समन्वय से हितग्राहियों को आम, संतरा, अनार, जामुन और नींबू जैसे फलदार पौधे, तार की बाउंड्री फेंसिंग और तीन वर्षों तक मजदूरी का लाभ दिया जा रहा है। जब तक पौधे फल देने योग्य नहीं हो जाते, तब तक किसान उसी भूमि पर गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलें उगाकर आय अर्जित कर सकती हैं। करीब तीन वर्ष बाद फल उत्पादन आरंभ होने पर परिवारों के लिए स्थायी और अतिरिक्त आमदनी का मार्ग खुलेगा। उत्पादन को उचित बाज़ार उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
ज़मीनी बदलाव: हितग्राहियों की कहानी
बांसखेड़ा गांव की महिला किसान टीना मेघवाल, जो तेजाजी महाराज स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, ने बताया कि योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने फलदार पौधे लगाए और उनकी देखभाल की। उन्हें पौधों के साथ-साथ तार फेंसिंग का भी लाभ मिला और मजदूरी के रूप में नियमित आय भी मिल रही है।
टीना मेघवाल ने कहा, 'पौधे लगाए हुए करीब एक वर्ष हुआ है और अब इनमें फल भी आने शुरू हो गए हैं। इस योजना से हमारी आमदनी बढ़ी है और हमें काफी लाभ मिला है। हमारे लिए यह बहुत अच्छी और लाभकारी योजना है।'
कृषि सखी की भूमिका
संगीता मालवीय, जो एनआरएलएम के तहत कृषि सखी के रूप में कार्यरत हैं, अन्य महिलाओं को इस योजना से जोड़ने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि नीमच जनपद में 100 हितग्राहियों के चयन का लक्ष्य था, जिसमें ऐप के माध्यम से 72 आवेदन प्राप्त हुए और 22 हितग्राहियों का चयन किया गया। इन हितग्राहियों के आम, जामुन और नींबू के पौधे लगाए गए हैं।
संगीता मालवीय ने यह भी बताया कि महिलाओं ने बगीचे में साग-सब्जियां भी उगाई हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण
पंचायत विकास प्रबंधक राजेंद्र कुमार चौहान ने बताया कि नीमच विकासखंड में चयनित सभी हितग्राहियों के पास कम से कम दो बीघा भूमि और सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था है। चयन प्रक्रिया स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संगठनों और सीएलएफ के माध्यम से पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है।
लखपति दीदी से जुड़ाव और आगे की राह
यह पहल केंद्र सरकार की 'लखपति दीदी' अवधारणा से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सालाना ₹1 लाख या उससे अधिक की आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब ग्रामीण महिला रोज़गार के आँकड़े चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। फलदार बगीचों के माध्यम से दीर्घकालिक आय सुनिश्चित करने की यह रणनीति, एकमुश्त सहायता की बजाय टिकाऊ आजीविका मॉडल पर आधारित है — और यही इसे पारंपरिक सरकारी योजनाओं से अलग बनाती है।