14 अक्टूबर 2026
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यूपी 2027 से पहले भाजपा को मिली बड़ी ताकत, सपा के तीन बागी विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल

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यूपी 2027 से पहले भाजपा को मिली बड़ी ताकत, सपा के तीन बागी विधायक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल

सारांश

2027 के यूपी चुनाव से पहले सपा को बड़ा झटका — तीन बागी विधायकों ने 14 अक्टूबर को भाजपा की औपचारिक सदस्यता ली। गौरीगंज के तीन बार विजयी विधायक राकेश प्रताप सिंह का शामिल होना सबसे अहम है, जिन्हें 2025 में सपा ने निष्कासित किया था।

मुख्य बातें

सपा के तीन विधायकों — राकेश प्रताप सिंह (गौरीगंज, अमेठी), अभय सिंह (गोसाईगंज, अयोध्या) और विनोद चतुर्वेदी (कालपी, जालौन) — ने 14 अक्टूबर 2026 को भाजपा की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की।
सदस्यता कार्यक्रम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
राकेश प्रताप सिंह 2012, 2017 और 2022 — लगातार तीन बार गौरीगंज से विजयी रहे; जून 2025 में सपा ने उन्हें निष्कासित किया था।
सिंह ने करीब एक हजार वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधियों के भाजपा में शामिल होने का दावा किया, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह दल-बदल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में राजनीतिक हलचल तेज होने का संकेत है।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) को बड़ा झटका लगा है। सपा से बगावत कर चुके तीन विधायकों ने 14 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की औपचारिक सदस्यता ग्रहण कर ली। इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं।

सदस्यता कार्यक्रम का घटनाक्रम

अमेठी के गौरीगंज में जामो रोड स्थित राकेश प्रताप सिंह के आवास 'मंगलम' पर आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने तीनों विधायकों को औपचारिक सदस्यता दिलाई। तीनों को भगवा पटका पहनाकर पार्टी में स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी मौजूद रहे। तीनों विधायकों ने भाजपा के टोल-फ्री नंबर पर फोन कर पार्टी की सदस्यता भी ली।

राकेश प्रताप सिंह का सफ़र और सपा से दूरी

राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज से 2012 में पहली बार सपा के टिकट पर विधानसभा पहुँचे थे और इसके बाद 2017 तथा 2022 के चुनावों में भी जीत दर्ज की — यानी लगातार तीन बार विजयी रहे। परंतु सपा नेतृत्व से उनकी दूरियाँ धीरे-धीरे बढ़ती गईं।

2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने सपा के आधिकारिक रुख के विपरीत भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। रामचरितमानस और अन्य धार्मिक विषयों पर विवाद के दौरान भी उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाया। जून 2025 में सपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी से भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार भी किया था। उनके परिवार के कुछ सदस्य इससे पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके थे।

विधायकों के दावे और स्वतंत्र पुष्टि

भाजपा में शामिल होने के बाद राकेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि उनके क्षेत्र में बूथ स्तर पर सक्रिय करीब 98 प्रतिशत लोग सपा छोड़कर भाजपा में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 700 ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों समेत लगभग एक हजार वर्तमान व पूर्व जनप्रतिनिधि भी भाजपा का दामन थामेंगे। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सपा की चुनौती और भाजपा की रणनीति

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सभी दलों की राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो रही हैं। भाजपा के लिए इन नेताओं के जनाधार को संगठन के साथ जोड़ना और पुराने कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल बनाना अहम होगा।

वहीं, सपा के सामने अपने पुराने समर्थकों को एकजुट रखने और इन तीन विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की चुनौती खड़ी हो गई है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे दल-बदल का वास्तविक चुनावी असर स्थानीय संगठन की स्थिति और मतदाताओं की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करेगा। यह देखना होगा कि ये तीनों विधायक आगामी चुनाव में भाजपा की स्थिति कितनी मजबूत कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनका जमीनी प्रभाव उतना नहीं पड़ा जितना प्रेस कॉन्फ्रेंसों में दावा किया गया। राकेश प्रताप सिंह की व्यक्तिगत पकड़ गौरीगंज में वास्तविक है, लेकिन उनके साथ 'एक हजार जनप्रतिनिधियों' के शामिल होने के दावे अभी असत्यापित हैं। असली कसौटी यह होगी कि भाजपा का स्थानीय संगठन इन नेताओं को कैसे समायोजित करता है — अयोध्या और जालौन जैसे क्षेत्रों में पुराने कार्यकर्ताओं का असंतोष भी एक चर है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। सपा के लिए यह संकट कम नहीं है, पर 2027 अभी दूर है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा के कौन-से तीन विधायक भाजपा में शामिल हुए?
अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विनोद चतुर्वेदी — इन तीनों ने 14 अक्टूबर 2026 को भाजपा की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की।
राकेश प्रताप सिंह को सपा से क्यों निकाला गया था?
राकेश प्रताप सिंह ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के आधिकारिक रुख के विपरीत भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके अलावा, धार्मिक विषयों पर पार्टी नेतृत्व से अलग रुख और 2024 लोकसभा में स्मृति ईरानी के लिए प्रचार के बाद जून 2025 में सपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया।
भाजपा सदस्यता कार्यक्रम कहाँ और किसकी उपस्थिति में हुआ?
यह कार्यक्रम अमेठी के गौरीगंज में जामो रोड स्थित राकेश प्रताप सिंह के आवास 'मंगलम' पर हुआ। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने तीनों को सदस्यता दिलाई।
इस दल-बदल का यूपी 2027 चुनाव पर क्या असर होगा?
विश्लेषकों के अनुसार इसका वास्तविक प्रभाव स्थानीय जनाधार की भागीदारी, भाजपा के पुराने संगठन के साथ तालमेल और चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा। राकेश प्रताप सिंह के करीब एक हजार जनप्रतिनिधियों के भाजपा में शामिल होने के दावे अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
सपा के लिए इस घटनाक्रम की क्या चुनौती है?
सपा को अब गौरीगंज, गोसाईगंज और कालपी सीटों पर नए उम्मीदवार तैयार करने और इन क्षेत्रों में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की चुनौती का सामना करना होगा। इन तीन विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के पुराने समर्थकों को एकजुट रखना भी सपा के लिए अहम होगा।
राष्ट्र प्रेस
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