भाजपा पूर्व पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी सपा में शामिल, बोले— 'भाजपा हाईजैक हो चुकी है, ब्राह्मण बनाएंगे अखिलेश की सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने 16 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। त्रिपाठी ने भाजपा पर भ्रष्टाचार, संगठनात्मक अव्यवस्था और ब्राह्मण व शिक्षक समुदाय के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार बनेगी।
मुख्य घटनाक्रम
सपा में शामिल होने के बाद विश्वजीत त्रिपाठी ने कहा, 'दिल्ली वाले नेताओं की गोरखपुर में नहीं चलती है। आज के समय में पूरी भाजपा हिंदू युवा वाहिनी की गोद में जाकर बैठ गई है। पूरा संगठन हाईजैक हो चुका है। अब ये अटल बिहारी वाजपेयी के समय की भाजपा नहीं है।'
उन्होंने गोरखपुर के भाजपा पूर्व राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी संगठन ने उन्हें भी लगातार अपमानित किया और उनका दर्द सोशल मीडिया पर उजागर हुआ। त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े गोरखपुर में कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि वहाँ पार्टी पहले से 'हाईजैक' है।
ब्राह्मण समुदाय पर दावा
त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव सर्वसमाज के नेता हैं और उत्तर प्रदेश में उनके कार्यकाल में जो विकास हुआ उसका कोई सानी नहीं है। उनके अनुसार, प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय के साथ जिस तरह का व्यवहार हो रहा है, उससे यह वर्ग धीरे-धीरे सपा की ओर खिंच रहा है। उन्होंने दावा किया, 'ब्राह्मण अब सपा की सरकार बनाने जा रहा है।'
विकास और शासन पर आरोप
त्रिपाठी के अनुसार, वर्तमान सरकार के नौ वर्षों में विकास की यह दशा है कि आज भी बरसात में गली-मोहल्ले डूब जाते हैं। उन्होंने अफसरशाही और भ्रष्टाचार को बेलगाम बताया। शिक्षकों के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूर्व में शिक्षकों का जो अपमान हुआ, उस वक्त भाजपा के सांसद कहीं नहीं थे।
शिक्षक संगठन पर आरोप
त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जिस 'शर्मा गुट' ने सरकार से अलग रहकर शिक्षकों के हितों के लिए एक संगठन बनाया, उसे ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने 'बेच दिया'। उन्होंने कहा कि शिक्षक अब ध्रुव कुमार त्रिपाठी को नकार चुके हैं और सपा की ओर से संजय कुमार त्रिपाठी शिक्षक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरणों को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज़ हो रही है।