13 अक्टूबर 2026
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अखिलेश यादव के बयान पर BJP का पलटवार: 'सपा में नहीं दिखते लोहिया के आदर्श', 2027 में हार का दावा

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अखिलेश यादव के बयान पर BJP का पलटवार: 'सपा में नहीं दिखते लोहिया के आदर्श', 2027 में हार का दावा

सारांश

अखिलेश यादव के बयान ने लखनऊ की सियासत में आग लगा दी। BJP ने सपा पर डॉ. लोहिया के आदर्शों से भटकने और दोहरे मापदंड का आरोप लगाया, जबकि सपा ने लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर पलटवार किया। 2027 UP चुनाव की छाया में यह वैचारिक जंग और गहरी होती जा रही है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने 12 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि सपा में डॉ.
राम मनोहर लोहिया के आदर्श नहीं दिखते।
भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव के कार्यों में लोहियावादी सामाजिक समरसता की सोच नहीं झलकती।
भाजपा ने दावा किया कि सपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 नहीं जीत सकती और पार्टी आंतरिक दरारों से जूझ रही है।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने पलटवार करते हुए कहा कि पूरा विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट है।
सपा ने भाजपा पर विरोध प्रदर्शनों को पुलिस बल से दबाने का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के हालिया बयान पर लखनऊ में सियासी तापमान चढ़ गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी और विधायक राजेश चौधरी ने 12 अक्टूबर 2026 को सपा पर डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों से भटकने और दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में सपा की हार तय है।

भाजपा के आरोप: लोहिया के नाम पर सियासत

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने तीखे शब्दों में कहा, 'आज समाजवादी पार्टी में डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्श कहाँ नज़र आते हैं? डॉ. लोहिया हमेशा रामायण मेलों के आयोजन की वकालत करते थे, लेकिन समाजवादी पार्टी ने बार-बार भगवान राम का अलग-अलग तरीकों से अपमान करने का काम किया है।' उनका यह बयान उस समय आया जब देशभर में डॉ. लोहिया की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे।

त्रिपाठी ने यह भी कहा कि सपा को स्वयं एहसास हो चुका है कि 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव उसके पक्ष में नहीं जाएगा। उन्होंने राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सपा ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा होता, तो पार्टी में बड़ी टूट हो सकती थी।

राजेश चौधरी का आरोप: अखिलेश के कार्यों में नहीं दिखती लोहियावादी सोच

भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव के विचारों का डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया सामाजिक समरसता के पक्षधर थे, जबकि अखिलेश यादव पीडीए और सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं, लेकिन उनके कार्यों में वह दृष्टिकोण दिखाई नहीं देता।

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों पर भाजपा विधायक ने कहा कि जब भी विपक्ष चुनाव जीतता है, चुनाव आयोग को सही मानता है, और जब हारता है तो ईवीएम और आयोग पर सवाल उठाने लगता है। चौधरी ने कहा कि विपक्ष ने 2024 के चुनावों में एक बार भी ये मुद्दे नहीं उठाए — यह उनके दोहरे मापदंड को उजागर करता है।

सपा का पलटवार: लोकतंत्र बचाने के लिए सड़क पर

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, 'समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव विपक्षी सांसदों के विरोध मार्च में शामिल हुए। सभी विपक्षी नेता एकजुट हैं और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़कों पर एक साथ खड़े हैं।' उन्होंने कहा कि जब पूरा विपक्ष डॉ. लोहिया को श्रद्धांजलि दे रहा है, तब भाजपा और चुनाव आयोग के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

फखरुल हसन चांद ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी पुलिस बल का इस्तेमाल कर विरोध प्रदर्शनों को दबा रही है, जो कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध और निंदनीय है।

2027 चुनाव की पृष्ठभूमि में बढ़ती तकरार

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और दोनों दल अपनी-अपनी वैचारिक स्थिति को मज़बूत करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि डॉ. लोहिया की विरासत पर दावेदारी उत्तर प्रदेश की सियासत में दशकों से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। भाजपा और सपा दोनों समय-समय पर लोहियावादी विचारधारा को अपनी राजनीति से जोड़ने की कोशिश करते आए हैं।

आने वाले हफ्तों में यह वाकयुद्ध और तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब दोनों पक्ष जनाधार बनाने के लिए वैचारिक मोर्चे पर भी सक्रिय हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार का तीखापन 2027 की राजनीतिक चिंताओं को साफ दर्शाता है। भाजपा की असली रणनीति सपा के पीडीए गठजोड़ की वैचारिक नींव को कमज़ोर करना है, जबकि सपा चुनाव आयोग-ईवीएम विमर्श को जिंदा रखकर विपक्षी एकता की तस्वीर पेश करना चाहती है। दोनों दलों के तर्कों में लोहिया केवल साधन हैं, साध्य 2027 की सत्ता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि राज्यसभा चुनाव की आंतरिक टूट का जो संकेत भाजपा दे रही है, वह सपा के लिए एक वास्तविक संगठनात्मक प्रश्न है जिसका जवाब अभी नहीं मिला।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव के किस बयान पर भाजपा ने आपत्ति जताई?
स्रोत में अखिलेश यादव के बयान का पूरा ब्यौरा नहीं दिया गया है, लेकिन भाजपा ने उनके बयान को डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा के विरुद्ध बताते हुए सपा पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने 12 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में यह प्रतिक्रिया दी।
भाजपा ने सपा पर डॉ. लोहिया के आदर्शों से भटकने का आरोप क्यों लगाया?
भाजपा का कहना है कि डॉ. लोहिया सामाजिक समरसता और रामायण मेलों के समर्थक थे, जबकि सपा के कार्यों में यह दृष्टिकोण नहीं दिखता। भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव पीडीए की बात करते हैं, लेकिन व्यवहार में लोहियावादी सोच अनुपस्थित है।
2027 UP चुनाव को लेकर भाजपा ने क्या दावा किया?
भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत नहीं पाएगी। उन्होंने राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि सपा में आंतरिक दरार की स्थिति बनी हुई है।
सपा ने भाजपा के आरोपों का क्या जवाब दिया?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि पूरा विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट है और सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने भाजपा पर पुलिस बल से विरोध प्रदर्शन दबाने का आरोप लगाया, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध और निंदनीय बताया।
ईवीएम और चुनाव आयोग पर भाजपा का क्या पक्ष है?
भाजपा विधायक राजेश चौधरी ने कहा कि विपक्ष जब जीतता है तो चुनाव आयोग को सही मानता है और जब हारता है तो ईवीएम व आयोग पर सवाल उठाने लगता है। उन्होंने कहा कि 2024 के चुनावों में विपक्ष ने एक बार भी ये मुद्दे नहीं उठाए, जो उनके दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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