27 अक्टूबर 2026
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ओम बिड़ला की थाईलैंड सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल से मुलाकात, व्यापार-रक्षा-पर्यटन सहयोग पर बनी सहमति

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ओम बिड़ला की थाईलैंड सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल से मुलाकात, व्यापार-रक्षा-पर्यटन सहयोग पर बनी सहमति

सारांश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और थाईलैंड के सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा की मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के मंच पर व्यापार, रक्षा, आयुर्वेद और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर बनी सहमति भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को ठोस संसदीय आधार देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में थाईलैंड के सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से मुलाकात की।
बैठक में व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा, आयुर्वेद और योग में सहयोग विस्तार पर सहमति बनी।
आतंकवाद-रोधी प्रयासों, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मामलों में मिलकर काम करने पर भी चर्चा हुई।
ब्रिक्स के तहत साझा प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
मुलाकात 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 के दौरान संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में हुई।
मोंगकोल सुरासज्जा 25 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुँचे थे; उनका स्वागत सांसद संध्या राय और दिलीप सैकिया ने किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा, आयुर्वेद और योग सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ। यह मुलाकात संसद भवन स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 के दौरान हुई।

बैठक के मुख्य घटनाक्रम

दोनों नेताओं ने भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों की पुष्टि करते हुए इन्हें नई ऊंचाई देने का संकल्प व्यक्त किया। बैठक में संसदीय सहयोग को और गहरा करने, अच्छी संसदीय प्रक्रियाओं को परस्पर साझा करने तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मामलों में मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी।

बिड़ला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित गहरी मित्रता की हमने फिर से पुष्टि की।'

एक्ट ईस्ट पॉलिसी की भूमिका

बिड़ला ने स्पष्ट किया कि भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' दोनों देशों की साझेदारी को नई गति प्रदान कर रही है। यह नीति दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ रही है। गौरतलब है कि थाईलैंड इस नीति के तहत भारत के प्रमुख साझेदारों में से एक है।

ब्रिक्स फोरम और सहयोग का विस्तार

बैठक में ब्रिक्स के तहत द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विशेष रूप से विचार हुआ, ताकि दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं और जनकल्याण को प्रोत्साहन दिया जा सके। 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार राष्ट्रों के संसदीय नेता भाग ले रहे हैं, और इसका उद्देश्य संसदीय सहयोग को सुदृढ़ करना तथा जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना है।

मोंगकोल सुरासज्जा 25 अक्टूबर 2026 को इस फोरम में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँचे थे। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत सांसद संध्या राय और दिलीप सैकिया ने किया था।

आम जनता और व्यापार जगत पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और थाईलैंड के बीच व्यापार संबंधों को और मजबूत करने की माँग उद्योग जगत की ओर से लगातार उठती रही है। आयुर्वेद, योग और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित कर सकता है। रक्षा और आपदा प्रबंधन में साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या होगा आगे

इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच संसदीय स्तर पर संवाद की नई कड़ियाँ जुड़ने की उम्मीद है। ब्रिक्स फोरम के अगले चरणों में इन चर्चाओं को औपचारिक ढाँचे में ढाला जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत इस तरह की उच्चस्तरीय मुलाकातें दीर्घकालिक राजनयिक और आर्थिक साझेदारी की नींव रखती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संसदीय कूटनीति के ज़रिए भी आगे बढ़ाना चाहता है। ब्रिक्स फोरम का मंच चुनना रणनीतिक है — इससे द्विपक्षीय चर्चाओं को बहुपक्षीय वैधता मिलती है। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि ऐसी उच्चस्तरीय मुलाकातें तब तक नतीजे नहीं देती जब तक उनके पीछे ठोस समझौतों और क्रियान्वयन की रूपरेखा न हो। आयुर्वेद-योग जैसे सॉफ्ट पॉवर क्षेत्रों का उल्लेख भारत की उस वृहत्तर रणनीति का हिस्सा है जो दक्षिण-पूर्व एशिया में सांस्कृतिक प्रभाव को आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी का पूरक बनाना चाहती है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम बिड़ला और मोंगकोल सुरासज्जा की बैठक में क्या हुआ?
27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा, आयुर्वेद और योग सहित कई क्षेत्रों में भारत-थाईलैंड सहयोग विस्तार पर चर्चा हुई। साथ ही आतंकवाद-रोधी प्रयासों और आपदा प्रबंधन में साझेदारी पर भी सहमति बनी।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 नई दिल्ली के संसद भवन स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम है, जिसमें ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय नेता शामिल हुए। इसका उद्देश्य संसदीय सहयोग को मजबूत करना और जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना है।
भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का थाईलैंड से क्या संबंध है?
भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा संबंधों को गहरा करने की रणनीति है, जिसमें थाईलैंड एक प्रमुख साझेदार है। बिड़ला ने इस बैठक में स्पष्ट किया कि यह नीति दोनों देशों की साझेदारी को नई गति दे रही है।
मोंगकोल सुरासज्जा भारत कब और क्यों आए?
थाईलैंड के सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा 25 अक्टूबर 2026 को 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँचे थे। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सांसद संध्या राय और दिलीप सैकिया ने उनका स्वागत किया था।
क्या भारत-थाईलैंड के बीच रक्षा सहयोग पर कोई ठोस निर्णय हुआ?
बैठक में रक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ, हालाँकि किसी विशेष समझौते या संधि की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
राष्ट्र प्रेस
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