ओम बिड़ला की थाईलैंड सीनेट अध्यक्ष मोंगकोल से मुलाकात, व्यापार-रक्षा-पर्यटन सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, रक्षा, आयुर्वेद और योग सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ। यह मुलाकात संसद भवन स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित दो दिवसीय 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम 2026 के दौरान हुई।
बैठक के मुख्य घटनाक्रम
दोनों नेताओं ने भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों की पुष्टि करते हुए इन्हें नई ऊंचाई देने का संकल्प व्यक्त किया। बैठक में संसदीय सहयोग को और गहरा करने, अच्छी संसदीय प्रक्रियाओं को परस्पर साझा करने तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय मामलों में मिलकर काम करने पर भी सहमति बनी।
बिड़ला ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'थाईलैंड की सीनेट के अध्यक्ष मोंगकोल सुरासज्जा से मुलाकात कर खुशी हुई। भारत और थाईलैंड के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित गहरी मित्रता की हमने फिर से पुष्टि की।'
एक्ट ईस्ट पॉलिसी की भूमिका
बिड़ला ने स्पष्ट किया कि भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' दोनों देशों की साझेदारी को नई गति प्रदान कर रही है। यह नीति दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ रही है। गौरतलब है कि थाईलैंड इस नीति के तहत भारत के प्रमुख साझेदारों में से एक है।
ब्रिक्स फोरम और सहयोग का विस्तार
बैठक में ब्रिक्स के तहत द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी विशेष रूप से विचार हुआ, ताकि दोनों देशों की साझा प्राथमिकताओं और जनकल्याण को प्रोत्साहन दिया जा सके। 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार राष्ट्रों के संसदीय नेता भाग ले रहे हैं, और इसका उद्देश्य संसदीय सहयोग को सुदृढ़ करना तथा जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना है।
मोंगकोल सुरासज्जा 25 अक्टूबर 2026 को इस फोरम में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुँचे थे। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत सांसद संध्या राय और दिलीप सैकिया ने किया था।
आम जनता और व्यापार जगत पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और थाईलैंड के बीच व्यापार संबंधों को और मजबूत करने की माँग उद्योग जगत की ओर से लगातार उठती रही है। आयुर्वेद, योग और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार दोनों देशों के नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित कर सकता है। रक्षा और आपदा प्रबंधन में साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या होगा आगे
इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच संसदीय स्तर पर संवाद की नई कड़ियाँ जुड़ने की उम्मीद है। ब्रिक्स फोरम के अगले चरणों में इन चर्चाओं को औपचारिक ढाँचे में ढाला जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत इस तरह की उच्चस्तरीय मुलाकातें दीर्घकालिक राजनयिक और आर्थिक साझेदारी की नींव रखती हैं।