27 अक्टूबर 2026
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यूनिसेफ 'वॉइसेज ऑफ चेंज कन्क्लेव 2026': राज्यपाल गंगवार ने बाल पत्रकारों से कहा — सामाजिक कुरीतियों पर निर्भीक होकर उठाएं सवाल

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यूनिसेफ 'वॉइसेज ऑफ चेंज कन्क्लेव 2026': राज्यपाल गंगवार ने बाल पत्रकारों से कहा — सामाजिक कुरीतियों पर निर्भीक होकर उठाएं सवाल

सारांश

रांची में यूनिसेफ के 'वॉइसेज ऑफ चेंज कन्क्लेव 2026' में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बाल पत्रकारों को बाल विवाह, कुपोषण और बाल श्रम जैसी कुरीतियों पर निर्भीक होकर सवाल उठाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की आवाज़ ही विकसित भारत@2047 की नींव है।

मुख्य बातें

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 27 अक्टूबर 2026 को रांची में यूनिसेफ के 'वॉइसेज ऑफ चेंज कन्क्लेव 2026' को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।
राज्यपाल ने बाल विवाह, बाल श्रम, कुपोषण, बच्चों के खिलाफ हिंसा और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को आज भी गंभीर सामाजिक चुनौती बताया।
यूनिसेफ द्वारा प्रशिक्षित बाल पत्रकारों को हिदायत दी — खबर साझा करने से पहले तथ्यों की सत्यता और संबंधित व्यक्तियों की गरिमा का ध्यान रखें।
अभिभावकों और शिक्षकों से अपील — बच्चों की जिज्ञासाओं को दबाएं नहीं, उन्हें प्रश्न पूछने और राय व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें।
राज्यपाल ने 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्य के लिए भावी पीढ़ी को शिक्षित, स्वस्थ और आत्मविश्वासी बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को रांची में यूनिसेफ द्वारा आयोजित 'वॉइसेज ऑफ चेंज कन्क्लेव 2026' में बाल पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों में सवाल पूछने की आदत और खुलकर विचार रखने का साहस विकसित होने पर ही वे समाज में सकारात्मक बदलाव के प्रभावी वाहक बन सकेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उन्होंने यूनिसेफ द्वारा प्रशिक्षित बाल पत्रकारों से सामाजिक समस्याओं और विषमताओं पर निर्भीक होकर पहल करने का आह्वान किया।

कन्क्लेव का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

यूनिसेफ द्वारा आयोजित इस कन्क्लेव का मकसद उन बाल पत्रकारों को एक मंच देना था जिन्हें संस्था ने विशेष रूप से प्रशिक्षित किया है। राज्यपाल गंगवार ने कहा कि बच्चों की बुलंद आवाज उन असंख्य बच्चों की तकलीफों को शासन और समाज के सामने ला सकती है, जिन्हें अपनी बात रखने का मंच या अवसर नहीं मिल पाता। गौरतलब है कि झारखंड जैसे राज्य में बाल अधिकारों से जुड़े मुद्दे — बाल विवाह, बाल श्रम और कुपोषण — अब भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं।

सामाजिक कुरीतियों पर राज्यपाल की चिंता

राज्यपाल ने गहरा दुख व्यक्त किया कि बाल विवाह, बाल श्रम, कुपोषण, शिक्षा से वंचना, बच्चों के खिलाफ हिंसा और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव जैसी गंभीर चुनौतियाँ आज भी समाज के सामने खड़ी हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन समस्याओं के पूर्ण उन्मूलन के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक सोच और व्यावहारिक दृष्टिकोण में बदलाव लाना बेहद ज़रूरी है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आँकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में बाल विवाह और कुपोषण की दरें अभी भी चिंताजनक स्तर पर हैं।

बाल पत्रकारों को विशेष निर्देश

राज्यपाल गंगवार ने बाल पत्रकारों को विशेष हिदायत दी कि कोई भी खबर या जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की सत्यता की पुष्टि अवश्य करें और संबंधित व्यक्तियों की गरिमा व संवेदनशीलता का हमेशा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि बच्चों की आवाज सुनना जितना आवश्यक है, उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान निकालना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

परिवारों और शिक्षकों से अपील

राज्यपाल ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की जिज्ञासाओं को दबाने के बजाय उन्हें प्रश्न पूछने, अपनी राय व्यक्त करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए लगातार प्रोत्साहित करें। उन्होंने ज़ोर दिया कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएँ, सुरक्षित परिवेश और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए सरकार, पुलिस-प्रशासन, शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समूचे नागरिक समाज को अपनी सामूहिक ज़िम्मेदारी निभानी होगी।

विकसित भारत@2047 और भावी पीढ़ी की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश 'विकसित भारत@2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की भावी पीढ़ी को शिक्षित, स्वस्थ, हुनरमंद और आत्मविश्वासी बनाना पहली प्राथमिकता है। बाल पत्रकारों में नया उत्साह भरते हुए उन्होंने जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और निरंतर परिश्रम करने का मूलमंत्र दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बाल पत्रकारिता के ये प्रशिक्षण कार्यक्रम कन्क्लेव से निकलकर ज़मीनी बदलाव कितना ला पाते हैं। झारखंड में बाल विवाह और कुपोषण की दरें राष्ट्रीय औसत से अभी भी ऊपर हैं, और इन समस्याओं के लिए बच्चों को 'आवाज़' बनाने की ज़िम्मेदारी उन्हीं संस्थाओं पर भी है जो वयस्क स्तर पर नीतिगत विफलताओं की जवाबदेही से बचती हैं। बाल पत्रकारों को प्रोत्साहित करना सराहनीय है, परंतु उनकी रिपोर्टों पर शासन-तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना यह प्रयास प्रतीकात्मक ही रहेगा।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनिसेफ का 'वॉइसेज ऑफ चेंज कन्क्लेव 2026' क्या है?
यह यूनिसेफ द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम है जिसमें संस्था द्वारा प्रशिक्षित बाल पत्रकारों को सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाने का मंच दिया जाता है। 27 अक्टूबर 2026 को रांची में आयोजित इस कन्क्लेव में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि थे।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बाल पत्रकारों को क्या संदेश दिया?
राज्यपाल गंगवार ने बाल पत्रकारों से कहा कि वे बाल विवाह, बाल श्रम, कुपोषण और बच्चों के खिलाफ हिंसा जैसी सामाजिक कुरीतियों पर निर्भीक होकर सवाल उठाएं। साथ ही उन्होंने हिदायत दी कि कोई भी जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की सत्यता जाँचें और संबंधित व्यक्तियों की गरिमा का सम्मान करें।
झारखंड में बाल अधिकारों से जुड़ी कौन-सी प्रमुख चुनौतियाँ हैं?
राज्यपाल ने बाल विवाह, बाल श्रम, कुपोषण, शिक्षा से वंचना, बच्चों के खिलाफ हिंसा और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इनके समाधान के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक सोच में भी बदलाव ज़रूरी है।
अभिभावकों और शिक्षकों की क्या भूमिका बताई गई?
राज्यपाल ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों की जिज्ञासाओं को दबाने के बजाय उन्हें प्रश्न पूछने, अपनी राय व्यक्त करने और निर्णय-प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन, शिक्षण संस्थान और नागरिक समाज सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
विकसित भारत@2047 और बच्चों की भूमिका का क्या संबंध बताया गया?
राज्यपाल गंगवार ने कहा कि 'विकसित भारत@2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने के लिए देश की भावी पीढ़ी को शिक्षित, स्वस्थ, हुनरमंद और आत्मविश्वासी बनाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाल पत्रकारिता इस दिशा में बच्चों को सक्रिय भागीदार बनाने का एक माध्यम है।
राष्ट्र प्रेस
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