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प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सेहत के लिए सीधा खतरा: IIT-ISM धनबाद में राज्यपाल गंगवार का आह्वान

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प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सेहत के लिए सीधा खतरा: IIT-ISM धनबाद में राज्यपाल गंगवार का आह्वान

सारांश

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने धनबाद में IIT-ISM की राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला में साफ कहा — प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन अब सीधे हमारी सेहत का सवाल है। सरकार से समाज तक, हर किसी को जिम्मेदारी उठानी होगी और जीवनशैली में बदलाव लाना होगा।

मुख्य बातें

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 20 सितंबर 2026 को IIT (ISM) धनबाद में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और जीवनशैली में बदलाव अनिवार्य है।
पर्यावरण संरक्षण में सरकार, समाज, वैज्ञानिक, उद्योग और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी की ज़रूरत पर बल दिया।
योग को शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली से जोड़कर देखने की अपील की।
IIT-ISM जैसे संस्थानों से स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आग्रह।

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 20 सितंबर 2026 को धनबाद स्थित IIT (ISM) में आयोजित 'राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला' को संबोधित करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का संकट अब केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि सीधे मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर डालने वाली चुनौती बन चुकी है। उन्होंने जोर दिया कि इस संकट से निपटने के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली में बदलाव अब अपरिहार्य है। यह कार्यशाला आरोग्य भारती और IIT-ISM के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का अटूट संबंध

राज्यपाल गंगवार ने कहा कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और जीवनशैली — ये तीनों आपस में गहराई से जुड़े हैं। बढ़ते वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव अब लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर प्रत्यक्ष रूप से दिखने लगे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रकृति का सम्मान भारतीय जीवन-पद्धति का आधारभूत अंग रहा है और आज उसी परंपरा को पुनर्जीवित करने की ज़रूरत है।

सामूहिक जिम्मेदारी पर बल

गंगवार ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी अकेले सरकार की नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें समाज, शैक्षणिक संस्थान, वैज्ञानिक, डॉक्टर, उद्योग जगत और आम नागरिकों की समान भागीदारी अनिवार्य है। जल एवं बिजली की बचत, कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार दैनिक आचरण — ऐसे छोटे कदम भी सामूहिक रूप से बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

योग और समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण

राज्यपाल ने स्वस्थ जीवनशैली को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए योग की महत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य, बल्कि मानसिक संतुलन और बेहतर जीवन-गुणवत्ता में भी सहायक है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य व्यवस्था में रोग-उपचार के साथ-साथ रोकथाम, संतुलित पोषण, योग और स्वच्छ पर्यावरण को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों को एकीकृत कर समग्र स्वास्थ्य के लिए ठोस प्रयास करने की वकालत की।

तकनीकी संस्थानों की भूमिका

IIT (ISM) धनबाद जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के क्षेत्र में व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने आरोग्य भारती की गतिविधियों को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

युवाओं से अपील

गंगवार ने युवाओं और छात्रों से आग्रह किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी रोजमर्रा की आदतों में शामिल करें और परिवार तथा समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई औद्योगिक शहर वायु गुणवत्ता सूचकांक में लगातार खतरनाक स्तर पर बने हुए हैं और स्वास्थ्य विशेषज्ञ पर्यावरण-जनित बीमारियों में वृद्धि की चेतावनी दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें मापने योग्य नीतिगत प्रतिबद्धता का अभाव है — 'जीवनशैली बदलो' की अपील तब तक अधूरी है जब तक झारखंड जैसे कोयला-केंद्रित राज्य में औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण के ठोस कदमों की बात न हो। धनबाद — जो देश के सबसे प्रदूषित शहरों में लगातार शामिल रहता है — में यह कार्यशाला आयोजित होना प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, परंतु असली सवाल यह है कि शैक्षणिक मंचों से उठी आवाज़ें नीति-निर्माण की मेज तक कब पहुँचती हैं। व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर देना सही है, लेकिन संरचनात्मक बदलाव — उद्योग नियमन, स्वच्छ ईंधन नीति, हरित क्षेत्र विस्तार — के बिना यह बातें केवल सेमिनार तक सीमित रह जाती हैं।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने धनबाद में क्या कहा?
राज्यपाल गंगवार ने IIT-ISM धनबाद में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला में कहा कि वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन सीधे लोगों की सेहत पर असर डाल रहे हैं और इससे निपटने के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली में बदलाव ज़रूरी है। उन्होंने सरकार के साथ-साथ समाज, वैज्ञानिकों और उद्योगों की सामूहिक भूमिका पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला धनबाद का आयोजन किसने किया?
यह कार्यशाला आरोग्य भारती और IIT (ISM) धनबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। इसका उद्देश्य पर्यावरण, स्वास्थ्य और जीवनशैली के परस्पर संबंध पर चर्चा करना था।
पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की क्या भूमिका बताई गई?
राज्यपाल गंगवार ने युवाओं और छात्रों से अपील की कि वे पर्यावरण-संरक्षण की आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और परिवार व समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं। उन्होंने IIT-ISM जैसे तकनीकी संस्थानों से व्यावहारिक पर्यावरण-समाधान विकसित करने का भी आग्रह किया।
योग को पर्यावरण से कैसे जोड़ा गया?
राज्यपाल ने कहा कि योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए उपयोगी है और यह एक पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली का हिस्सा है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य व्यवस्था में रोग-उपचार के साथ-साथ रोकथाम, संतुलित पोषण और स्वच्छ पर्यावरण को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ता वायु प्रदूषण श्वसन, हृदय और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बनता है, जबकि जलवायु परिवर्तन से उष्मा-जनित बीमारियाँ, जलजनित रोग और कुपोषण बढ़ता है। राज्यपाल गंगवार ने इसी संदर्भ में जीवनशैली बदलने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
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