क्या झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने युवाओं से रक्तदान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया?
सारांश
Key Takeaways
- रक्तदान का महत्व समझना जरुरी है।
- हर स्वस्थ युवा को रक्तदान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
- स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रेरणादायक हैं।
- राज्य में रक्त की कमी को दूर करने के लिए रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।
रांची, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोमवार को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर लोक भवन, रांची स्थित बिरसा मंडप में आयोजित रक्तदान शिविर में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से रक्तदान को जनआंदोलन बनाने की अपील की।
राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि समय पर रक्त की कमी के कारण कई अनमोल जीवन संकट में पड़ सकते हैं। यदि हर स्वस्थ युवा साल में कुछ बार रक्तदान का संकल्प ले, तो राज्य में रक्त की कोई कमी नहीं होगी। इस शिविर में कुल 406 लोगों ने रक्तदान किया।
भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, झारखंड शाखा द्वारा आयोजित इस शिविर का उद्घाटन करने से पहले, राज्यपाल ने महान दार्शनिक स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनके चित्र पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं और मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है। राज्यपाल ने रक्तदान को एक सर्वोच्च मानवीय कार्य बताते हुए इसे किसी एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन भर की जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि यदि हर स्वस्थ युवा वर्ष में तीन बार रक्तदान करे, तो राज्य में किसी भी रक्त समूह की कमी नहीं होगी और इससे रक्तदाता को किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी भी नहीं होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं पहले नियमित रूप से रक्तदान करते रहे हैं। आने वाले समय में राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने कहा कि राज्यपाल के निदेश पर झारखंड रेड क्रॉस सोसाइटी का प्रभावी गठन किया गया है और अधिक से अधिक रक्त उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह शिविर आयोजित किया गया।
इस शिविर में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव, अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण एवं आधुनिकीकरण) सुमन गुप्ता, राज्यपाल के परिसहाय मेजर नवीन धत्तरवाल, रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य, विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं और स्वयंसेवक शामिल हुए।