कासिमेडु मछली बाजार में महीनों की मंदी के बाद रौनक लौटी, वंजरम ₹1,300 प्रति किलो पर पहुंची
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई का प्रसिद्ध कासिमेडु मछली बाजार महीनों की सुस्ती के बाद 1 नवंबर 2026 को एक बार फिर खरीदारों की भीड़ से गुलजार हो गया, जहाँ सीर फिश (वंजरम) का भाव ₹800 से उछलकर ₹1,300 प्रति किलो तक जा पहुँचा। पुरट्टासी व्रत, नवरात्रि उत्सव और उसके बाद चक्रवात एवं भारी बारिश की चेतावनियों ने पिछले कई महीनों से बाजार की रफ्तार थाम रखी थी, लेकिन अब माँग और आपूर्ति दोनों ने जोर पकड़ लिया है।
क्यों थमी थी बाजार की रफ्तार
कासिमेडु, जिसे रॉयपुरम मछली पकड़ने के बंदरगाह के नाम से भी जाना जाता है, बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित दक्षिण भारत के सबसे बड़े समुद्री भोजन बाजारों में से एक है। पुरट्टासी माह के दौरान तमिल परंपरा में मांसाहार से परहेज किया जाता है, जिस कारण हर साल इस दौर में मछली की माँग लगभग ठप हो जाती है। इस बार नवरात्रि और उसके बाद चक्रवात की चेतावनियों ने इस मंदी को और लंबा खींच दिया।
गौरतलब है कि मंदी के दौरान दाम काफी गिर गए थे, जिससे मछुआरों और व्यापारियों दोनों की आमदनी पर गहरा असर पड़ा था। यह ऐसे समय में आया है जब तटीय क्षेत्रों में आजीविका के सवाल पहले से ही चर्चा में हैं।
मछलियों के दामों में कितना उछाल
बाजार में वापस लौटी माँग के साथ कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सीर फिश (वंजरम) जो पहले ₹800 प्रति किलो थी, अब ₹1,300 पर बिक रही है। बैराकुडा (कोडुवा) ₹600 से ₹800, शंकरा ₹300 से ₹500, और एंकोवीज (नेथिली) ₹200 से ₹400 प्रति किलो हो गई है।
ब्लैक पॉमफ्रेट का भाव ₹500 से बढ़कर ₹900, व्हाइट पॉमफ्रेट ₹700 से ₹1,000, शीला ₹350 से ₹550, केकड़ा ₹350 से ₹600, और झींगा ₹350 से ₹500 प्रति किलो पर पहुँच गया है। रीफ कॉड (पारई) ₹400 से ₹600, सोल फिश (नाक्कू) ₹400 से ₹600, कटलफिश (कदंबा) ₹300 से ₹500, और टाइगर प्रॉन्स ₹700 से ₹1,200 प्रति किलो तक जा पहुँचा है।
रविवार को उमड़ी भारी भीड़
छुट्टी के दिन होने के कारण रविवार, 1 नवंबर की सुबह से ही बाजार में खरीदारों की लंबी कतारें दिखीं। पिछले रविवार जहाँ बाजार में आम कारोबारी दिनों जैसी सपाट रौनक थी, इस हफ्ते नजारा बिल्कुल अलग रहा। ताजी मछली की माँग में एकाएक आई यह तेजी मौसमी प्रतिबंधों के खत्म होने और उपभोक्ताओं के बाजार में वापस लौटने का संकेत है।
आम जनता पर असर
दामों में यह उछाल उन परिवारों की जेब पर सीधा असर डालता है जो रोजाना के भोजन में मछली को प्राथमिकता देते हैं, खासकर चेन्नई और तटीय तमिलनाडु में। टाइगर प्रॉन्स और वंजरम जैसी प्रीमियम मछलियों के दाम लगभग दोगुने होने से मध्यम वर्गीय परिवारों को बजट में फेरबदल करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, मछुआरों और खुदरा विक्रेताओं के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि महीनों की कम आमदनी के बाद बाजार फिर से लाभदायक स्थिति में आता दिख रहा है। आने वाले हफ्तों में माँग और आपूर्ति का संतुलन यह तय करेगा कि दाम इसी स्तर पर टिकते हैं या नरम होते हैं।