3 अक्टूबर 2026
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छिंदवाड़ा: सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस से मजदूर की मौत, दूसरा अस्पताल में भर्ती

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छिंदवाड़ा: सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस से मजदूर की मौत, दूसरा अस्पताल में भर्ती

सारांश

छिंदवाड़ा के कुरसीढाना गाँव में सेप्टिक टैंक के भीतर काम करते दो मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आए। 35 वर्षीय मोहन कुमरे की मौत हो गई और 36 वर्षीय दियालाल धुर्वे अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

मुख्य बातें

छिंदवाड़ा के कुरसीढाना गाँव में 3 अक्टूबर 2026 को नवनिर्मित सेप्टिक टैंक में काम करते दो मजदूर बेहोश हो गए।
35 वर्षीय मोहन कुमरे की शनिवार को मृत्यु हो गई; 36 वर्षीय दियालाल धुर्वे को छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बंद टैंक में जमा जहरीली गैस को दोनों की हालत बिगड़ने का कारण माना जा रहा है।
तामिया थाना प्रभारी आशीष जैतवार ने पुष्टि की कि मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
पुलिस निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतज़ामों की पड़ताल कर रही है; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है।

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 3 अक्टूबर 2026 को एक नवनिर्मित सेप्टिक टैंक के भीतर काम करते समय दो मजदूर बेहोश हो गए। इनमें से 35 वर्षीय मोहन कुमरे की बाद में मृत्यु हो गई, जबकि 36 वर्षीय दियालाल धुर्वे को उपचार के लिए छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

घटना का विवरण

यह घटना तामिया थाना क्षेत्र के कुरसीढाना गाँव में स्थित एक निर्माण स्थल पर हुई। दोनों मजदूर नवनिर्मित सेप्टिक टैंक के अंदर शटरिंग हटाने के काम के लिए उतरे थे। पुलिस के अनुसार, टैंक में प्रवेश के कुछ ही देर बाद दोनों बेहोश हो गए।

निर्माण स्थल पर मौजूद अन्य लोगों ने तत्काल दोनों को टैंक से बाहर निकाला और तामिया अस्पताल पहुँचाया। प्रारंभिक उपचार के बाद दियालाल धुर्वे को बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया, जबकि मोहन कुमरे की शनिवार को मृत्यु हो गई।

जहरीली गैस की आशंका

पुलिस और अधिकारियों का कहना है कि बंद सेप्टिक टैंक के भीतर जमा जहरीली गैस की चपेट में आने के कारण दोनों की हालत बिगड़ी। नवनिर्मित टैंकों में ऑक्सीजन की कमी और हानिकारक गैसों का जमाव एक सामान्य परंतु घातक खतरा माना जाता है। तामिया थाना प्रभारी आशीष जैतवार ने पुष्टि की कि टैंक में उतरने के बाद दोनों मजदूर बेहोश हुए और बाद में एक की जान चली गई।

सुरक्षा उपायों पर जाँच

पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि निर्माण स्थल पर सेप्टिक टैंक में काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम किए गए थे या नहीं। जाँच अधिकारी निर्माण स्थल पर उपस्थित लोगों के बयान दर्ज कर रहे हैं और उन परिस्थितियों की भी पड़ताल हो रही है जिनके चलते यह हादसा हुआ।

पुलिस ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाँच पूरी होने के बाद मामले में और जानकारी सामने आएगी। गौरतलब है कि सीमित स्थानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नियम मौजूद हैं, लेकिन उनके अनुपालन को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

आम मजदूरों पर असर

यह घटना उस व्यापक चिंता को फिर उजागर करती है जो निर्माण क्षेत्र में असंगठित मजदूरों की सुरक्षा से जुड़ी है। सेप्टिक टैंक, मैनहोल और सीवर जैसे बंद स्थानों में काम करते हुए मजदूरों की मौत के मामले देशभर में समय-समय पर सामने आते हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना उचित वेंटिलेशन जाँच, सुरक्षा उपकरण और पूर्व प्रशिक्षण के इन स्थानों में मजदूरों को उतारना जानलेवा साबित होता है।

आगे क्या होगा

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मृत्यु के सटीक कारण की पुष्टि होगी। निर्माण स्थल के ठेकेदार और जिम्मेदार पक्षों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका अनुपालन अक्सर नदारद रहता है। असली सवाल यह है कि निर्माण स्थल के ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए जाँच कितनी दूर जाती है — क्योंकि अक्सर ऐसे मामले पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद फाइलों में दब जाते हैं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छिंदवाड़ा सेप्टिक टैंक हादसे में क्या हुआ?
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के कुरसीढाना गाँव में 3 अक्टूबर 2026 को दो मजदूर नवनिर्मित सेप्टिक टैंक में शटरिंग हटाने उतरे और जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए। इनमें से मोहन कुमरे की मौत हो गई और दियालाल धुर्वे अस्पताल में भर्ती हैं।
मजदूरों की मौत का कारण क्या बताया जा रहा है?
पुलिस के अनुसार, बंद सेप्टिक टैंक के भीतर जमा जहरीली गैस की चपेट में आने से दोनों मजदूरों की हालत बिगड़ी। मृत्यु के सटीक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।
इस मामले में पुलिस क्या जाँच कर रही है?
तामिया पुलिस यह पता लगा रही है कि निर्माण स्थल पर सेप्टिक टैंक में काम के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे या नहीं। जाँच अधिकारी गवाहों के बयान दर्ज कर रहे हैं और ठेकेदार की जिम्मेदारी भी जाँच के दायरे में है।
घायल मजदूर दियालाल धुर्वे की स्थिति कैसी है?
36 वर्षीय दियालाल धुर्वे को पहले तामिया अस्पताल में प्रारंभिक उपचार दिया गया, फिर आगे के इलाज के लिए छिंदवाड़ा जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
सेप्टिक टैंक में काम करना इतना खतरनाक क्यों है?
नवनिर्मित या बंद सेप्टिक टैंक में ऑक्सीजन की कमी और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जो कुछ ही मिनटों में व्यक्ति को बेहोश कर सकती हैं। बिना वेंटिलेशन जाँच और सुरक्षा उपकरणों के ऐसी जगहों में उतरना जानलेवा होता है।
राष्ट्र प्रेस
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