'झाड़ फूंक' से बॉलीवुड में वापसी करेंगी पद्मिनी कोल्हापुरे, बोलीं — 'खुद भी नहीं देख पाऊंगी यह फिल्म'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे हॉरर फिल्म 'झाड़ फूंक' के साथ बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। फिल्म की कहानी इतनी रोंगटे खड़े करने वाली है कि खुद पद्मिनी ने स्वीकार किया कि जब निर्देशक ने उन्हें पटकथा सुनाई, तभी उनके मन में यह सवाल आया कि क्या वे इसे पर्दे पर देख भी पाएंगी।
दूसरी हॉरर फिल्म में कदम
पद्मिनी कोल्हापुरे ने बताया कि 'झाड़ फूंक' उनकी दूसरी हॉरर फिल्म है। इससे पहले वे 'गहराई' नामक हॉरर फिल्म में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कहा, "यह मेरी दूसरी हॉरर फिल्म है। मैंने 'गहराई' नाम की एक फिल्म की थी।"
फिल्म की विषय वस्तु पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "भारत में रहने वाले लोग 'झाड़ फूंक' पर बहुत ज़्यादा विश्वास करते हैं। हमारे निर्देशक राजन जी ने जिस तरह से यह फिल्म बनाई है, वह काफी काबिले तारीफ है। जब उन्होंने मुझे इसके बारे में बताया था, तभी मैंने कह दिया था कि मुझे नहीं लगता मैं यह फिल्म देख पाऊंगी।"
यशपाल शर्मा की तारीफ
फिल्म में पद्मिनी ने दिग्गज अभिनेता यशपाल शर्मा के साथ पर्दा साझा किया है। उन्होंने उनके समर्पण और पेशेवर रवैये की भूरि भूरि प्रशंसा की। पद्मिनी ने कहा, "इंसान हमेशा सीखता है, चाहे वह कितना भी सीनियर क्यों न हो। जूनियर्स सीनियर्स से सीखते हैं, सीनियर्स जूनियर्स से। इस फिल्म के दौरान मैंने बहुत कुछ सीखा। यशपाल जी थे और उनके बारे में मैं क्या कहूं? उनका किरदार बहुत अच्छा है और इसे लेकर उनका समर्पण कमाल का है। वह बहुत प्रोफेशनल, समर्पित और बहुत ही वर्सेटाइल एक्टर हैं।"
किरदार और सह कलाकार
फिल्म में पद्मिनी कामिनी का किरदार निभा रही हैं। उनके साथ सुम्बुल तौकीर और हर्ष राजपूत भी अहम भूमिकाओं में हैं। गौरतलब है कि सुम्बुल तौकीर टेलीविज़न की जानी मानी चेहरा हैं और यह उनके लिए भी एक अलग शैली की फिल्म होगी।
निर्देशक राजन ने बताई पद्मिनी को चुनने की वजह
फिल्म के निर्देशक राजन ने पद्मिनी कोल्हापुरे को 'कामिनी' के किरदार के लिए चुनने का कारण साझा किया। उन्होंने कहा, "मैं पद्मिनी जी का बहुत बड़ा फैन हूं। उनकी मासूमियत और खूबसूरती उन्हें सबसे अलग बनाती है। जब वह फ्रेम में आती हैं, तो लोग कहते हैं — 'वाह!' जहाँ तक कामिनी के किरदार के अलग अलग रंगों की बात है, मुझे नहीं लगता कि मैम से बेहतर कोई इसे निभा सकता था।"
बॉलीवुड और हॉरर शैली
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी सिनेमा में हॉरर शैली ने नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। 'स्त्री 2' जैसी फिल्मों की अपार सफलता के बाद दर्शकों में इस विधा के प्रति रुचि काफी बढ़ी है। 'झाड़ फूंक' अंधविश्वास और तंत्र मंत्र की उस सामाजिक परत को उठाती है जो भारतीय ग्रामीण और शहरी — दोनों समाजों में आज भी गहरी जड़ें जमाए हुए है। यह फिल्म एक अनुभवी अभिनेत्री की वापसी और एक उभरती हुई शैली का संगम है — जो इसे देखने लायक बनाती है।