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पृथ्वी मुद्रा के फायदे: बाल झड़ना, कमजोर हड्डियाँ और त्वचा की समस्याओं में असरदार योग हस्त मुद्रा

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पृथ्वी मुद्रा के फायदे: बाल झड़ना, कमजोर हड्डियाँ और त्वचा की समस्याओं में असरदार योग हस्त मुद्रा

सारांश

पृथ्वी मुद्रा सिर्फ एक हाथ की मुद्रा नहीं — यह पंचमहाभूत सिद्धांत पर आधारित एक समग्र स्वास्थ्य पद्धति है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, अनामिका और अंगूठे का संयोजन मूलाधार चक्र को जागृत कर बाल, हड्डियाँ और त्वचा — तीनों को पोषण देता है।

मुख्य बातें

पृथ्वी मुद्रा शरीर में पृथ्वी तत्व को संतुलित करने वाली एक प्रमुख हस्त मुद्रा है, जिसे आयुष मंत्रालय ने मान्यता दी है।
इस मुद्रा में अनामिका उंगली के अग्रभाग को अंगूठे से मिलाया जाता है, जिससे मूलाधार चक्र सक्रिय होता है।
यह मुद्रा बाल झड़ने, कमजोर हड्डियों, रूखी त्वचा और कमजोर पाचन में सहायक बताई गई है।
रक्त संचार में सुधार और विषाक्त पदार्थों के निष्कासन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है।
कफ दोष की अधिकता, अस्थमा या गंभीर सर्दी-खाँसी के रोगियों को अभ्यास से पहले योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

पृथ्वी मुद्रा — योग की एक प्रमुख हस्त मुद्रा — शरीर में पृथ्वी तत्व को संतुलित कर बालों के झड़ने, हड्डियों की कमजोरी और त्वचा की समस्याओं सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं में राहत दिला सकती है, ऐसा आयुष मंत्रालय के अनुसार माना गया है। 1 नवंबर 2026 को उपलब्ध आयुर्वेदिक जानकारी के अनुसार, यह मुद्रा मूलाधार चक्र की ऊर्जा को सक्रिय कर शारीरिक और मानसिक स्थिरता प्रदान करती है।

पंचमहाभूत और शरीर का संतुलन

आयुर्वेद के अनुसार, मानव शरीर का निर्माण पाँच महाभूतों — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — से हुआ है। जब इन तत्वों में असंतुलन आता है, तो शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियाँ और कमजोरियाँ उत्पन्न होती हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार, मुद्राएँ इन तत्वों को संतुलित करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम हैं।

आयुर्वेद में अनामिका उंगली को पृथ्वी तत्व का और अंगूठे को अग्नि तत्व का प्रतीक माना गया है। जब अनामिका उंगली के अग्रभाग को अंगूठे से मिलाया जाता है, तो पृथ्वी तत्व सक्रिय हो जाता है — यही पृथ्वी मुद्रा का मूल आधार है।

पृथ्वी मुद्रा कैसे काम करती है

आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मुद्रा मूलाधार चक्र को सक्रिय करती है, जो रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है। जब यह चक्र असंतुलित होता है, तो मन में भय, बेचैनी और अस्थिरता बनी रहती है। पृथ्वी मुद्रा के नियमित अभ्यास से इस चक्र में स्थिरता आती है और मन वर्तमान क्षण में टिकना सीखता है।

पृथ्वी तत्व का मूल गुण स्थिरता और धैर्य है। इसलिए यह मुद्रा मन की व्यग्रता को कम कर मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक मानी गई है।

त्वचा, बाल और हड्डियों पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर में पृथ्वी तत्व संतुलित होता है, तो त्वचा के ऊतकों को पर्याप्त पोषण मिलता है। यह मुद्रा शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और रक्त संचार को बेहतर करने में सहायक मानी जाती है। इससे त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है, रूखापन दूर होता है और त्वचा स्वस्थ दिखती है।

इसके अतिरिक्त, कमजोर पाचन और दुबलेपन से परेशान लोगों में यह मुद्रा पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाकर वजन को स्वस्थ रूप से संतुलित करने में सहायक बताई गई है। बालों की जड़ों को पोषण मिलने से बाल झड़ने की समस्या में भी राहत मिल सकती है, ऐसा आयुर्वेद के अनुसार माना जाता है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

जिन लोगों के शरीर में कफ दोष की अधिकता है या जिन्हें सर्दी-खाँसी अथवा अस्थमा की गंभीर समस्या है, उन्हें इस मुद्रा का निरंतर अभ्यास शुरू करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए। यह सावधानी इसलिए जरूरी है, क्योंकि पृथ्वी तत्व की अधिकता से कफ संबंधी विकार बढ़ सकते हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

आयुष मंत्रालय ने पृथ्वी मुद्रा को शारीरिक और आध्यात्मिक आरोग्यता को बढ़ावा देने वाली एक प्रभावशाली हस्त मुद्रा के रूप में मान्यता दी है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में है जब योग और आयुर्वेद-आधारित स्वास्थ्य समाधानों के प्रति जनसाधारण में रुचि तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी मुद्रा का अभ्यास नियमित रूप से और सही तकनीक के साथ किया जाए, तभी उसका पूरा लाभ मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके दावों को क्लिनिकल परीक्षणों के माध्यम से प्रमाणित करने की जरूरत अभी भी बनी हुई है। आयुर्वेद के सिद्धांत हजारों साल पुराने हैं, पर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इन्हें पूरी तरह सत्यापित नहीं करता। ऐसे में पाठकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह मुद्रा किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि एक पूरक स्वास्थ्य अभ्यास है। जब तक बड़े पैमाने पर शोध सामने नहीं आते, इन दावों को 'आयुर्वेदिक मान्यता' के दायरे में ही समझना उचित रहेगा।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पृथ्वी मुद्रा क्या है और इसे कैसे करते हैं?
पृथ्वी मुद्रा एक हस्त मुद्रा है जिसमें अनामिका उंगली के अग्रभाग को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाया जाता है और बाकी उंगलियाँ सीधी रखी जाती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह मुद्रा शरीर में पृथ्वी तत्व को सक्रिय कर मूलाधार चक्र की ऊर्जा को जागृत करती है।
पृथ्वी मुद्रा से बाल झड़ने में कैसे मदद मिलती है?
आयुर्वेद के अनुसार, पृथ्वी मुद्रा शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण और रक्त संचार को बेहतर बनाती है, जिससे बालों की जड़ों को उचित पोषण मिलता है और बाल झड़ने की समस्या में राहत मिल सकती है। यह दावा आयुर्वेदिक सिद्धांत पर आधारित है और इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास कितने समय तक करना चाहिए?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, पृथ्वी मुद्रा का अभ्यास प्रतिदिन 15 से 30 मिनट तक किया जा सकता है। बेहतर परिणाम के लिए इसे सुबह ध्यान या प्राणायाम के साथ करने की सलाह दी जाती है।
किन लोगों को पृथ्वी मुद्रा से बचना चाहिए?
जिन लोगों में कफ दोष की अधिकता है या जिन्हें अस्थमा, गंभीर सर्दी-खाँसी की समस्या है, उन्हें इस मुद्रा का निरंतर अभ्यास शुरू करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। पृथ्वी तत्व की अधिकता कफ संबंधी विकारों को बढ़ा सकती है।
पृथ्वी मुद्रा मानसिक स्वास्थ्य पर कैसे असर करती है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, पृथ्वी मुद्रा मूलाधार चक्र को संतुलित कर मन में स्थिरता और धैर्य लाती है। यह भय, बेचैनी और मानसिक अस्थिरता को कम करने में सहायक मानी गई है और मन को वर्तमान क्षण में टिकाए रखने में मदद करती है।
राष्ट्र प्रेस
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