पर्वतासन: हड्डियाँ मजबूत, मन शांत — जानिए इस एक योगासन के 7 चमत्कारी फायदे

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पर्वतासन: हड्डियाँ मजबूत, मन शांत — जानिए इस एक योगासन के 7 चमत्कारी फायदे

सारांश

पर्वतासन — पहाड़ की मुद्रा — रीढ़ की हड्डी को मजबूत, पाचन को दुरुस्त और मन को शांत रखता है। आयुष मंत्रालय ने इसे सरल व प्रभावी माना है। रोज 5-10 मिनट का अभ्यास शरीर और मन दोनों को बदल सकता है।

Key Takeaways

  • पर्वतासन संस्कृत के शब्द 'पर्वत' (पहाड़) और 'आसन' (मुद्रा) से बना है और शरीर को पर्वत की तरह स्थिर बनाता है।
  • आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने इसे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सरल व प्रभावी योगासन घोषित किया है।
  • रोजाना 5 से 10 मिनट के अभ्यास से पैरों, जाँघों, पीठ, कंधों की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और रीढ़ की हड्डी लचीली रहती है।
  • यह आसन एकाग्रता बढ़ाता है, तनाव कम करता है और निर्णय लेने की क्षमता सुदृढ़ करता है।
  • छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी बताया गया है।
  • गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हाल में सर्जरी हुए लोगों को यह आसन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पर्वतासन — यानी पहाड़ की मुद्रा — आज के डिजिटल युग में उन लोगों के लिए एक वरदान बन चुका है जो घंटों स्क्रीन के सामने बैठकर काम करते हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत प्रभावी बताया है। रोजाना केवल 5 से 10 मिनट के अभ्यास से यह आसन शरीर को ऊर्जावान और मन को स्थिर बनाता है।

पर्वतासन क्या है और इसका अर्थ

पर्वतासन दो संस्कृत शब्दों — 'पर्वत' (पहाड़) और 'आसन' (मुद्रा) — के संयोग से बना है। इस आसन में शरीर की संपूर्ण आकृति एक ऊँचे, स्थिर और सुदृढ़ पर्वत के समान दिखती है। यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए भी सहज है और इसे किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।

यह आसन प्राचीन भारतीय योग परंपरा का हिस्सा है, जो न केवल शरीर को बल देता है बल्कि चेतना को भी जागृत करता है। आधुनिक जीवनशैली में जहाँ पीठ दर्द और मानसिक तनाव सामान्य समस्याएँ बन चुकी हैं, वहाँ पर्वतासन एक निःशुल्क और प्राकृतिक उपचार की भूमिका निभाता है।

शारीरिक लाभ — हड्डी से मांसपेशी तक

आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, पर्वतासन के नियमित अभ्यास से पैरों, जाँघों, पीठ और कंधों की मांसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और लचीला बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस आसन के दौरान पेट की मांसपेशियों पर सक्रिय दबाव पड़ता है, जिससे पाचन तंत्र बेहतर कार्य करता है। नियमित अभ्यास से शरीर की मुद्रा (posture) में सुधार आता है और व्यक्ति का कद भी अधिक प्रभावशाली दिखने लगता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, उनके लिए पर्वतासन स्पॉन्डिलाइटिस और कमर दर्द की रोकथाम में सहायक हो सकता है। यह आसन हड्डियों में कैल्शियम के अवशोषण को भी बेहतर बनाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव

पर्वतासन केवल शरीर तक सीमित नहीं है — यह मस्तिष्क को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। इस आसन के अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है, तनाव और चिंता में कमी आती है और मन में स्थिरता का भाव उत्पन्न होता है।

छात्रों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि यह स्मरण शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। कामकाजी पेशेवरों के लिए यह कार्यालय के दबाव से उबरने का एक सरल और त्वरित माध्यम है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, पर्वतासन के दौरान शरीर में एंडोर्फिन का स्राव बढ़ता है — यही वह रसायन है जो मूड को बेहतर बनाता है और अवसाद के लक्षणों को कम करता है।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

हालाँकि पर्वतासन अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन जिन्हें गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हाल ही में कोई शल्य चिकित्सा (सर्जरी) हुई हो, उन्हें इसे करने से पहले किसी चिकित्सक या योग प्रशिक्षक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं और उच्च रक्तचाप के रोगियों को भी विशेषज्ञ की देखरेख में ही यह आसन करना चाहिए। आसन की अवधि धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए — शुरुआत में 30 सेकंड से करें और क्रमशः 5-10 मिनट तक पहुँचें।

व्यापक परिप्रेक्ष्य — योग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति

गौरतलब है कि भारत सरकार ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्थापित कराया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 2015 में मान्यता दी। तब से भारत में योग को स्वास्थ्य नीति का अभिन्न अंग बनाया जा रहा है। आयुष मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, देश में 30 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में योग का अभ्यास करते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी मानसिक स्वास्थ्य संकट को वैश्विक महामारी घोषित कर चुका है। ऐसे में पर्वतासन जैसे सरल आसन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को कम करने में भी योगदान दे सकते हैं।

आने वाले समय में 21 जून 2025 को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पर्वतासन को और अधिक प्रचारित किए जाने की संभावना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूलों और कार्यालयों में इसे दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो देश की उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य दोनों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।

Point of View

तो क्या हमारी प्राचीन योग परंपरा एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प नहीं बन सकती? विडंबना यह है कि भारत ने दुनिया को योग दिया, लेकिन खुद के स्कूलों और कार्यालयों में इसे अनिवार्य नहीं किया। आयुष मंत्रालय के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन जब तक नीतिगत स्तर पर योग को स्वास्थ्य बजट से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक यह केवल जागरूकता अभियान तक सीमित रहेगा।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

पर्वतासन कैसे किया जाता है?
पर्वतासन में दोनों हाथों को ऊपर की ओर सीधा उठाकर हथेलियाँ जोड़ी जाती हैं और शरीर को पहाड़ की तरह स्थिर रखा जाता है। रीढ़ सीधी, दृष्टि सामने और श्वास सामान्य रखें। इसे बैठकर या खड़े होकर दोनों तरह किया जा सकता है।
पर्वतासन के क्या फायदे हैं?
पर्वतासन से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली होती है, पाचन तंत्र बेहतर होता है और मानसिक तनाव कम होता है। यह एकाग्रता बढ़ाता है और शरीर की मुद्रा सुधारता है।
क्या पर्वतासन रोज करना चाहिए?
हाँ, रोजाना 5 से 10 मिनट पर्वतासन का अभ्यास करने से सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं। आयुष मंत्रालय इसे दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता है।
पर्वतासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हाल ही में सर्जरी हुए लोगों को पर्वतासन से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाएँ और उच्च रक्तचाप के रोगी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करें।
पर्वतासन और अन्य योगासनों में क्या अंतर है?
पर्वतासन विशेष रूप से रीढ़, कंधे और मानसिक स्थिरता पर केंद्रित है, जबकि अन्य आसन अलग-अलग अंगों को लक्षित करते हैं। यह शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए सबसे सरल और सुरक्षित आसनों में से एक है।
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