बड़ा फैसला: तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में फॉर्म 17ए जांच पूरी, कहीं पुनर्मतदान नहीं
सारांश
Key Takeaways
- भारत निर्वाचन आयोग ने 25 अप्रैल 2026 को घोषणा की कि फॉर्म 17ए जांच दोनों राज्यों में सफलतापूर्वक पूरी हुई।
- पश्चिम बंगाल के 152 विधानसभा क्षेत्रों के 44,376 मतदान केंद्रों पर जांच संपन्न, पुनर्मतदान की कोई सिफारिश नहीं।
- तमिलनाडु के 234 विधानसभा क्षेत्रों के 75,064 मतदान केंद्रों की जांच शांतिपूर्वक पूरी हुई।
- बंगाल में 1,478 उम्मीदवार और तमिलनाडु में 4,023 उम्मीदवार — सभी को जांच की पूर्व सूचना दी गई थी।
- ईवीएम और वीवीपैट डबल-लॉक, सीसीटीवी और 24 घंटे सुरक्षा के साथ स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित।
- पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और दस्तावेज पुनः सील कर दिए गए।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल: भारत निर्वाचन आयोग ने शनिवार को घोषणा की कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल (प्रथम चरण) में हुए विधानसभा चुनावों के बाद फॉर्म 17ए तथा अन्य मतदान दस्तावेजों की विस्तृत जांच सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस जांच के बाद दोनों राज्यों के किसी भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई, जो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
जांच प्रक्रिया कैसे हुई संपन्न
चुनाव आयोग ने बताया कि 23 अप्रैल 2026 को हुए मतदान के बाद फॉर्म 17ए सहित मतदान दिवस के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच शुक्रवार को शांतिपूर्ण माहौल में पूरी की गई। यह प्रक्रिया पारदर्शिता सुनिश्चित करने, किसी भी अनियमितता का पता लगाने और आवश्यकता होने पर पुनर्मतदान की सिफारिश करने के उद्देश्य से की जाती है।
पश्चिम बंगाल के प्रथम चरण में 152 विधानसभा क्षेत्रों के 44,376 मतदान केंद्रों पर यह जांच रिटर्निंग अधिकारियों (आरओ) की देखरेख में सामान्य पर्यवेक्षकों और 600 से अधिक उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संपन्न हुई। पहले चरण के सभी 1,478 उम्मीदवारों को जांच की तिथि, समय और स्थान की पूर्व सूचना दी गई थी।
तमिलनाडु में भी क्लीन चिट
तमिलनाडु में 234 विधानसभा क्षेत्रों के 75,064 मतदान केंद्रों की जांच भी बिना किसी विवाद के पूरी हुई। यहां 4,023 उम्मीदवारों को पूर्व सूचना दी गई थी और 1,825 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया संचालित की गई। जांच के बाद तमिलनाडु में भी किसी एक भी मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान की जरूरत नहीं पाई गई।
यह उल्लेखनीय है कि दोनों राज्यों में मिलाकर कुल 1,19,440 से अधिक मतदान केंद्रों की जांच की गई और हर जगह प्रक्रिया निर्विघ्न रही — यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
ईवीएम और वीवीपैट की सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में डबल-लॉक सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और 24 घंटे सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ सुरक्षित रखा गया है। पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और जांच के बाद सभी दस्तावेज पुनः सील कर दिए गए।
रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दिन में दो बार स्ट्रॉन्ग रूम का निरीक्षण करें। जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) मुख्यालय के स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा दिन में एक बार और मुख्यालय से बाहर स्थित स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा हर 3-4 दिनों में करेंगे। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी निगरानी के लिए वहां शिविर लगाने की अनुमति दी गई है।
चुनावी पारदर्शिता का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि फॉर्म 17ए वह दस्तावेज है जिसमें प्रत्येक मतदाता के मतदान का विवरण दर्ज होता है। इसकी जांच से यह सुनिश्चित होता है कि बूथ स्तर पर कोई फर्जी मतदान या गड़बड़ी तो नहीं हुई। विपक्षी दलों और चुनाव सुधार की मांग करने वाले संगठनों ने लंबे समय से इस तरह की पारदर्शी जांच की मांग की थी।
यह प्रक्रिया ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर कई दलों ने सवाल उठाए थे। इस बार की पारदर्शी जांच और उसके निष्कर्ष चुनाव आयोग की साख को मजबूत करने वाले हैं।
मतगणना की तारीख नजदीक आने के साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।