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पद्मिनी कोल्हापुरे का सफर: आशा भोसले की सिफारिश से देव आनंद तक, कोरस से फिल्मफेयर तक

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पद्मिनी कोल्हापुरे का सफर: आशा भोसले की सिफारिश से देव आनंद तक, कोरस से फिल्मफेयर तक

सारांश

कोरस में गाने से शुरू हुआ सफर, आशा भोसले की एक सिफारिश और देव आनंद का एक मौका — पद्मिनी कोल्हापुरे की कहानी बताती है कि बॉलीवुड में रास्ते कभी-कभी सबसे अप्रत्याशित जगहों से खुलते हैं। 15 साल की उम्र में फिल्मफेयर और 'प्रेम रोग' में मुख्य भूमिका — यह सफर किसी मिसाल से कम नहीं।

मुख्य बातें

पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ; पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे शास्त्रीय संगीतकार थे।
उन्होंने 7 साल की उम्र से फिल्मों में काम शुरू किया, पहले बहन शिवांगी के साथ कोरस गायिका के रूप में।
दिग्गज गायिका आशा भोसले की सिफारिश पर देव आनंद ने उन्हें फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' में पहली भूमिका दी।
1980 में 'इंसाफ का तराजू' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस और 1982 में 'प्रेम रोग' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस पुरस्कार मिला।
उनकी भतीजी श्रद्धा कपूर (बहन शिवांगी और शक्ति कपूर की बेटी) आज बॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्री हैं।
1986 में फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा से विवाह; पुत्र प्रियंक शर्मा अभिनय-निर्माण से जुड़े हैं।

पद्मिनी कोल्हापुरे — हिंदी सिनेमा की वह अभिनेत्री जिन्होंने महज सात साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और 15 साल की उम्र तक फिल्मफेयर पुरस्कार अपने नाम कर लिया — का सफर किसी परीकथा से कम नहीं। मुंबई में 1 नवंबर 1965 को जन्मी पद्मिनी ने अपनी पहली फिल्म तक पहुँचने के लिए पहले कोरस गायिका का रास्ता अपनाया, और यह रास्ता खुला दिग्गज गायिका आशा भोसले की सिफारिश से।

संगीत से सजा बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

पद्मिनी के पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे, जबकि माँ अनुपमा एयरलाइन उद्योग में कार्यरत थीं। इस संगीतमय माहौल में पली-बढ़ी पद्मिनी ने बचपन से ही गाने और नृत्य में गहरी रुचि विकसित कर ली।

उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे भी संगीत और फिल्मों से जुड़ी रहीं। शिवांगी का विवाह अभिनेता शक्ति कपूर से हुआ और उनकी बेटी श्रद्धा कपूर आज बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। इस नाते पद्मिनी का रिश्ता कपूर परिवार से भी जुड़ता है।

गौरतलब है कि पद्मिनी के पिता पंढरीनाथ, आशा भोसले और लता मंगेशकर के फर्स्ट कजिन थे। इस पारिवारिक जुड़ाव के कारण पद्मिनी, आशा भोसले को प्यार से 'आशा आत्या' कहती थीं।

कोरस से शुरुआत: पहचान बनाने का पहला पड़ाव

पद्मिनी ने अपनी बहन शिवांगी के साथ मिलकर फिल्मों के गानों में कोरस गाना शुरू किया। 'यादों की बारात', 'किताब' और 'दुश्मन दोस्त' जैसी फिल्मों के गानों में उनकी आवाज़ शामिल रही। यह वह दौर था जब वह अभी स्कूली उम्र में थीं, लेकिन फिल्म उद्योग की बारीकियाँ सीख रही थीं।

यह ऐसे समय में आया जब हिंदी सिनेमा में बाल कलाकारों के लिए अवसर सीमित थे और कोरस गायन ही कई प्रतिभाओं के लिए मुख्यधारा का प्रवेश द्वार बनता था। पद्मिनी के लिए भी यही रास्ता निर्णायक साबित हुआ।

आशा भोसले की सिफारिश और देव आनंद का मौका

पद्मिनी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आशा भोसले ने ही उन्हें अभिनेता देव आनंद से मिलवाया था। आशा भोसले ने देव आनंद से अनुरोध किया कि यदि उनके पास पद्मिनी के लिए कोई उपयुक्त भूमिका हो, तो उन्हें अवसर दें।

इस मुलाकात का परिणाम यह रहा कि देव आनंद ने पद्मिनी को अपनी फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' में काम दिया — और इस तरह उन्हें उनकी पहली फिल्म मिली। पद्मिनी के अनुसार उस समय उन्हें इसका अंदाज़ा भी नहीं था कि यह छोटा-सा कदम उनके जीवन की दिशा बदल देगा।

बाल कलाकार से मुख्य अभिनेत्री तक का उत्थान

पहली फिल्म के बाद पद्मिनी ने 'जिंदगी', 'ड्रीम गर्ल' और 'सत्यम शिवम सुंदरम' में बाल कलाकार के रूप में काम किया। राज कपूर की फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' में उन्होंने छोटी रूपा का किरदार निभाया, जिसने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।

1980 में आई फिल्म 'इंसाफ का तराजू' में उनके अभिनय की भूरि-भूरि प्रशंसा हुई और उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस पुरस्कार से नवाज़ा गया — उस समय वह केवल 15 वर्ष की थीं। इसके दो वर्ष बाद 1982 में 'प्रेम रोग' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस पुरस्कार मिला।

'प्रेम रोग' में उन्होंने मनोरमा नाम की एक विधवा महिला का किरदार निभाया जो सामाजिक भेदभाव और कठिनाइयों से जूझती है। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर थे और यह फिल्म भी राज कपूर द्वारा निर्देशित थी।

विस्तृत फिल्मोग्राफी और निजी जीवन

करियर के आगे के वर्षों में पद्मिनी ने 'आहिस्ता आहिस्ता', 'विधाता', 'वो सात दिन', 'प्यार झुकता नहीं', 'सौतन', 'स्वर्ग से सुंदर' और 'प्यार के काबिल' जैसी फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई।

कुछ समय के अंतराल के बाद उन्होंने अभिनय में वापसी की और 'चिमनी पाखर', 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'पानीपत' तथा 'प्रवास' जैसी फिल्मों में नज़र आईं।

निजी जीवन में पद्मिनी ने 1986 में फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा से विवाह किया। दोनों के पुत्र प्रियंक शर्मा अभिनय और फिल्म निर्माण से जुड़े हैं। पद्मिनी का सफर इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और सही मार्गदर्शन मिले तो एक कोरस गायिका भी हिंदी सिनेमा के शीर्ष पर पहुँच सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उस दशक के सिनेमा की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। यह भी विचारणीय है कि श्रद्धा कपूर की पीढ़ी तक आते-आते उसी परिवार की विरासत बॉलीवुड में कितनी विस्तृत हो गई — जबकि पद्मिनी का योगदान अक्सर उनकी भतीजी की चर्चा में दब जाता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मिनी कोल्हापुरे को पहली फिल्म कैसे मिली?
दिग्गज गायिका आशा भोसले ने अभिनेता देव आनंद से पद्मिनी के लिए सिफारिश की, जिसके बाद देव आनंद ने उन्हें फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' में काम दिया। पद्मिनी ने खुद एक इंटरव्यू में यह किस्सा साझा किया था।
पद्मिनी कोल्हापुरे और आशा भोसले का क्या रिश्ता है?
पद्मिनी के पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे, आशा भोसले और लता मंगेशकर के फर्स्ट कजिन थे। इसी पारिवारिक जुड़ाव के कारण पद्मिनी आशा भोसले को 'आशा आत्या' (बुआ) कहती थीं।
पद्मिनी कोल्हापुरे ने फिल्मफेयर पुरस्कार कब और किस फिल्म के लिए जीता?
पद्मिनी ने 1980 में 'इंसाफ का तराजू' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस और 1982 में 'प्रेम रोग' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस पुरस्कार जीता। पहला पुरस्कार जीतते समय वह केवल 15 वर्ष की थीं।
श्रद्धा कपूर का पद्मिनी कोल्हापुरे से क्या रिश्ता है?
पद्मिनी की बहन शिवांगी कोल्हापुरे का विवाह अभिनेता शक्ति कपूर से हुआ और उनकी बेटी श्रद्धा कपूर हैं। इस तरह श्रद्धा, पद्मिनी की भतीजी लगती हैं।
पद्मिनी कोल्हापुरे ने अभिनय से पहले क्या किया था?
पद्मिनी ने अभिनय से पहले अपनी बहन शिवांगी के साथ फिल्मों के गानों में कोरस गाया। 'यादों की बारात', 'किताब' और 'दुश्मन दोस्त' जैसी फिल्मों के गानों में उनकी आवाज़ शामिल रही।
राष्ट्र प्रेस
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