पद्मिनी कोल्हापुरे का खुलासा: ऋषि कपूर संग 'पूछो ना यार' शूट से पहले थीं बेहद नर्वस
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे ने हाल ही में दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर के साथ फिल्म 'नसीब' के मशहूर गाने 'पूछो ना यार क्या हुआ' की शूटिंग से जुड़ा एक भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि लीड एक्ट्रेस के तौर पर किसी बड़े रोमांटिक गाने में पहली बार काम करने का वह अनुभव उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था।
मुख्य खुलासा: घबराहट और ऋषि कपूर का सहारा
पद्मिनी ने बताया, 'यह पहला मौका था जब मैं एक लीड एक्ट्रेस के तौर पर किसी बड़े रोमांटिक गाने में काम कर रही थी। इस गाने में मेरे साथ ऋषि कपूर थे, जो उस समय इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते थे।' उन्होंने स्वीकार किया कि शूट से पहले उनके मन में बार-बार यही डर था कि कहीं कोई गलती न हो जाए। हालाँकि ऋषि कपूर के सहज और दोस्ताना व्यवहार ने उनकी सारी घबराहट धीरे-धीरे दूर कर दी। उन्होंने पूरे शूट के दौरान पद्मिनी का ध्यान रखा और उन्हें आत्मविश्वास दिलाया।
ऊटी में हुई थी शूटिंग, आज भी जीवित है गाने की यादें
पद्मिनी ने बताया कि 'नसीब' के इस गाने की शूटिंग ऊटी में हुई थी और पूरी टीम ने इसे खास बनाने के लिए खूब मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि फिल्म के दूसरे गाने जैसे 'होगा तुमसे प्यारा कौन' और 'जमाने को दिखाना है' भी आज तक दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पुराने हिंदी सिनेमा के गानों के प्रति नई पीढ़ी में भी गहरी रुचि देखी जा रही है।
आशा भोसले की तारीफ: भावना को समझने की अद्भुत क्षमता
शो के दौरान पद्मिनी ने मशहूर गायिका आशा भोसले की भी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आशा भोसले हर गाने की भावना को पूरी तरह समझती थीं और रिकॉर्डिंग से पहले यह जानने की कोशिश करती थीं कि अभिनेत्री परदे पर किस भाव में दिखेगी। पद्मिनी ने बताया कि 'यशोमती मैया से' गाने को लेकर आज भी लोग उनसे पूछते हैं कि क्या उन्होंने खुद यह गाना गाया था — और इसका श्रेय वे आशा भोसले की आवाज़ और समझ को देती हैं।
इंडियन आइडल में विशेष अतिथि के रूप में आईं पद्मिनी
पद्मिनी कोल्हापुरे इंडियन आइडल के आने वाले एपिसोड में विशेष अतिथि के तौर पर नज़र आएंगी। इस मंच के बारे में उन्होंने कहा कि यहाँ आना उनके लिए हमेशा खास अनुभव होता है, क्योंकि यहाँ संगीत के प्रति सच्चा प्यार और असली प्रतिभा एक साथ देखने को मिलती है। गौरतलब है कि पद्मिनी कोल्हापुरे हिंदी सिनेमा के उस दौर की प्रतिनिधि हैं जब गाने और अभिनय का संगम अपने शिखर पर था।