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ताजमहल में लॉकर रूम फुल: पर्यटकों ने पेड़ों पर लटकाए बैग, 2 घंटे इंतज़ार के बाद भी नहीं मिली सुविधा

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ताजमहल में लॉकर रूम फुल: पर्यटकों ने पेड़ों पर लटकाए बैग, 2 घंटे इंतज़ार के बाद भी नहीं मिली सुविधा

सारांश

ताजमहल में रविवार को लॉकर रूम फुल होने पर पर्यटकों ने पेड़ों पर बैग लटकाए — पेड़ की डालियों पर 8-10 बैग और बेंचों पर सूटकेस का ढेर। टिकट और बैग जमा करने में दो-दो घंटे की कतार ने विश्व धरोहर स्थल पर बुनियादी सुविधाओं की पोल खोली।

मुख्य बातें

ताजमहल के पश्चिमी गेट का लॉकर रूम 1 नवंबर 2026 को रविवार की भीड़ में पूरी तरह भर गया।
पर्यटकों को मजबूरन पेड़ की डालियों पर 8 से 10 बैग लटकाने पड़े; बेंचों पर भी सूटकेस का ढेर लग गया।
पर्यटक अनिल कुमार और बांदा से आए विकास ने टिकट व बैग जमा करने में दो घंटे से अधिक इंतज़ार किया।
पर्यटकों का आरोप — रविवार की अधिक भीड़ के बावजूद प्रशासन ने पर्याप्त इंतज़ाम नहीं किए।
ASI और स्थानीय पर्यटन प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

आगरा के ताजमहल में 1 नवंबर 2026 को रविवार की भारी भीड़ के बीच पर्यटकों को गंभीर अव्यवस्था का सामना करना पड़ा, जब पश्चिमी गेट पर स्थित लॉकर रूम की क्षमता भर जाने के कारण बड़ी संख्या में सैलानियों को अपने बैग और कीमती सामान पास के पेड़ों की डालियों पर लटकाने के लिए मजबूर होना पड़ा। टिकट काउंटरों और बैग जमा केंद्रों पर लगी लंबी कतारों ने पर्यटकों का अनुभव बुरी तरह प्रभावित किया।

मुख्य घटनाक्रम

पर्यटक अनिल कुमार ने बताया कि वे लंबी कतार में खड़े थे, लेकिन जब उनका नंबर आया तो काउंटर कर्मचारियों ने स्पष्ट कह दिया कि अब बैग जमा नहीं होंगे। अनिल के अनुसार, टिकट लेने और बैग जमा करने की कोशिश में उन्हें दो घंटे से अधिक का समय गंवाना पड़ा और टिकट भी बड़ी मशक्कत के बाद मिल सका।

बांदा जिले से आए पर्यटक विकास ने भी इसी तरह की परेशानी बयान की। उन्होंने बताया कि दो घंटे कतार में खड़े रहने के बाद भी बैग जमा नहीं हो सका, क्योंकि सभी काउंटर बंद पड़े थे। मजबूरन उन्हें भी अपना सामान पेड़ पर ही रखना पड़ा।

आँखों देखा हाल

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पेड़ों की डालियों पर फलों की जगह 8 से 10 बैग लटकते दिखे। बेंचों पर भी पर्यटकों के सूटकेस और बैग का ढेर लग गया था। कई सैलानी अपने कीमती सामान की सुरक्षा को लेकर चिंतित नज़र आए, क्योंकि भीड़भाड़ वाले इलाके में बेरोकटोक छोड़ा गया सामान चोरी के खतरे से खाली नहीं था।

प्रशासन पर आरोप

पर्यटकों का आरोप है कि रविवार को स्वाभाविक रूप से भीड़ अधिक रहती है, फिर भी प्रशासन ने न तो अतिरिक्त लॉकर की व्यवस्था की और न ही काउंटरों की संख्या बढ़ाई। लॉकर रूम की सीमित क्षमता बड़ी समस्या बनकर उभरी, जिसने पर्यटन अनुभव को प्रभावित किया। गौरतलब है कि ताजमहल भारत का सर्वाधिक देखा जाने वाला विश्व धरोहर स्थल है और यहाँ सप्ताहांत में हज़ारों की संख्या में सैलानी आते हैं।

आम पर्यटकों पर असर

बुनियादी सुविधाओं की इस कमी ने न केवल स्थानीय पर्यटकों को बल्कि दूर-दराज़ से आए सैलानियों को भी निराश किया। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बड़े-बड़े दावे करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विश्व धरोहर स्थलों पर बुनियादी ढाँचे की उपेक्षा भारत की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन छवि को नुकसान पहुँचा सकती है।

क्या होगा आगे

फिलहाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और स्थानीय पर्यटन प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पर्यटकों की शिकायतों के मद्देनज़र उम्मीद की जाती है कि अधिकारी लॉकर क्षमता बढ़ाने और काउंटरों की संख्या बढ़ाने पर विचार करेंगे, ताकि आने वाले सप्ताहांतों और त्योहारी मौसम में इस तरह की अव्यवस्था न दोहराई जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी अतिरिक्त क्षमता की योजना अनुपस्थित रही। जब सरकार 'अतुल्य भारत' के ब्रांड पर करोड़ों खर्च करती है, तो मूलभूत सुविधाओं की यह विफलता विरोधाभासी है। ASI को तत्काल डायनेमिक क्षमता प्रबंधन और पर्याप्त लॉकर अवसंरचना की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताजमहल में लॉकर रूम की समस्या क्या हुई?
1 नवंबर 2026 को रविवार की भारी भीड़ के कारण ताजमहल के पश्चिमी गेट का लॉकर रूम पूरी तरह भर गया। काउंटर कर्मचारियों ने बैग जमा करने से मना कर दिया, जिससे पर्यटकों को अपना सामान पेड़ों की डालियों और बेंचों पर छोड़ना पड़ा।
पर्यटकों को कितनी देर प्रतीक्षा करनी पड़ी?
पर्यटक अनिल कुमार के अनुसार, टिकट लेने और बैग जमा करने की कोशिश में दो घंटे से अधिक का समय लग गया। बांदा से आए पर्यटक विकास ने भी लगभग दो घंटे कतार में खड़े रहने की बात कही।
पेड़ों पर कितने बैग लटके थे?
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, पेड़ की डालियों पर 8 से 10 बैग लटके हुए थे और बेंचों पर भी सूटकेस और बैग का ढेर लग गया था।
इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
पर्यटकों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि रविवार को स्वाभाविक रूप से अधिक भीड़ होने के बावजूद अतिरिक्त लॉकर और काउंटरों की व्यवस्था नहीं की गई। ताजमहल का रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है।
क्या ASI ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया दी?
अभी तक ASI या स्थानीय पर्यटन प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उम्मीद की जा रही है कि शिकायतों के बाद लॉकर क्षमता बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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