सूरत में ईटीपी टैंक सफाई के दौरान जहरीली गैस से 4 मौतें, तीन मजदूर और सुपरवाइजर की गई जान
सारांश
मुख्य बातें
सूरत की एक ज्वेलरी सफाई फैक्ट्री में 7 जून 2026 को जमीन के नीचे बने ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों और एक सुपरवाइजर की मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज से पुष्टि हुई है कि चारों में से किसी ने भी कोई सेफ्टी उपकरण नहीं पहना था।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, रविवार सुबह तीन मजदूर और कंपनी का एक सुपरवाइजर फैक्ट्री के भूमिगत ईटीपी टैंक की नियमित सफाई के लिए उतरे। टैंक में पहला मजदूर उतरते ही बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे बचाने के लिए दो अन्य मजदूर अंदर गए, वे भी जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए।
इसके बाद सुपरवाइजर ने दमकल विभाग को कॉल किया, लेकिन कॉल करने के बाद वह खुद भी टैंक में उतर गया और बेहोश हो गया। जोन-1 के डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि दमकल टीम के पहुँचने तक चारों टैंक के अंदर थे।
दमकल विभाग की कार्रवाई
डिविजनल फायर ऑफिसर रंजीत सिंह खाडिया ने बताया कि उन्हें सुबह 10:22 बजे कॉल आई कि एक व्यक्ति टैंक में गिर गया है, लेकिन मौके पर पहुँचने पर पता चला कि यह एक इंडस्ट्रियल यूनिट है और अंदर एक नहीं, बल्कि चार लोग फँसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि टैंक में काफी जहरीली गैस मौजूद थी। दमकल टीम ने चारों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
जाँच और कानूनी कार्रवाई
डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जाँच में सामने आया कि किसी भी व्यक्ति ने सेफ्टी उपकरण नहीं पहने थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद संबंधित धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जाँच जारी है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं।
आम जनता और मजदूरों पर असर
यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गंभीर तस्वीर पेश करता है। गौरतलब है कि भूमिगत टैंकों की सफाई के दौरान कन्फाइंड स्पेस में जहरीली गैस से होने वाली मौतें भारत में एक बार-बार दोहराई जाने वाली त्रासदी है। ऐसे हादसों में अक्सर असंगठित क्षेत्र के मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिन्हें न तो उचित प्रशिक्षण मिलता है और न ही सुरक्षा उपकरण।
आगे क्या होगा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अतिरिक्त धाराएँ जोड़ेगी। फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने के लिए जाँच जारी है। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य किया जाए।