7 अक्टूबर 2026
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राजभर का विपक्ष पर तंज: '2014 में चुनाव आयोग कांग्रेस की मुट्ठी में था, तो मोदी PM कैसे बने?'

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राजभर का विपक्ष पर तंज: '2014 में चुनाव आयोग कांग्रेस की मुट्ठी में था, तो मोदी PM कैसे बने?'

सारांश

ओम प्रकाश राजभर ने इंडिया गठबंधन के चुनाव आयोग विरोध को 'ड्रामा' बताते हुए उल्टा सवाल दाग दिया — 2014 में आयोग कांग्रेस की मुट्ठी में था, तो मोदी पीएम कैसे बने? सपा पर क्रॉस वोटिंग के डर से प्रत्याशी न उतारने का आरोप लगाते हुए राजभर ने विपक्ष की 'वोट चोरी' की दलील को एक ही तर्क में पलट दिया।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में इंडिया गठबंधन के चुनाव आयोग विरोध प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
राजभर ने पूछा — यदि 2014 से पहले चुनाव आयोग कांग्रेस की 'मुट्ठी में' था, तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री कैसे बने?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ माँग को बताया बेबुनियाद — कुमार को पद पर मात्र दो साल हुए हैं।
राहुल गांधी के 'मिलने नहीं दिया जा रहा' वाले दावे पर कहा — नोटिस दीजिए, सिस्टम के ज़रिए मुलाकात हो जाएगी।
सपा पर आरोप — प्रत्याशी नहीं उतारा क्योंकि क्रॉस वोटिंग का डर था (राजभर का दावा, साक्ष्य-रहित)।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सैफई महोत्सव वाले बयान का राजभर ने खुलकर समर्थन किया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर तीखा पलटवार किया। राजभर ने सीधे सवाल उठाया कि यदि 2014 से पहले चुनाव आयोग कांग्रेस की 'मुट्ठी में' था, तो उसी आयोग ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री कैसे बना दिया।

राजभर का सीधा सवाल

राजभर ने तंज कसते हुए कहा, 'साल 2014 से पहले पूरे देश के सिस्टम पर कांग्रेस का कब्जा था। चुनाव आयोग कांग्रेस की मुट्ठी में था, तो अगर ऐसा था तो चुनाव आयोग और कांग्रेस पार्टी ने मिलकर साल 2014 में पीएम मोदी को प्रधानमंत्री कैसे बना दिया?' उनका यह बयान इंडिया गठबंधन द्वारा 'वोट चोरी' के आरोपों और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोपों के जवाब में आया।

समाजवादी पार्टी और योगी सरकार पर निशाना

सुभासपा प्रमुख ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी समान तर्क से हमला बोला। उन्होंने कहा, '2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव का पूरे सिस्टम पर कब्जा था। तो क्या अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से मिलकर अपने सिस्टम से योगी को मुख्यमंत्री बना दिया?' राजभर ने यह भी कहा कि अखिलेश की सत्ता को लगभग 10 साल बीत चुके हैं, इसलिए मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप बेबुनियाद हैं, जो स्वयं मात्र दो वर्षों से इस पद पर हैं।

विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इस दावे पर कि उन्हें चुनाव आयुक्त से मिलने नहीं दिया जा रहा, राजभर ने कहा, 'मिलने का टाइम मांग लें, मिल जाएगा। मिलने का सिस्टम है, आप नोटिस दीजिए कि हम मिलना चाहते हैं, चुनाव आयोग आपसे मिल लेगा। बाहर बोलने से थोड़े ही मिलेगा।' उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपनी हार को पहले से स्वीकार कर चुका है और जनता को भ्रमित करने के लिए 'ड्रामा' कर रहा है।

सपा प्रत्याशी न उतारने पर बड़ा दावा

सपा की चुनावी रणनीति और अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट 'बात तीन की नहीं, बात चार सौ तीन की है' पर राजभर ने आरोप लगाया कि सपा ने प्रत्याशी इसलिए नहीं उतारा क्योंकि उसे क्रॉस वोटिंग का डर था। गौरतलब है कि यह आरोप राजभर ने किसी साक्ष्य के बिना लगाया है, इसलिए यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक दावा माना जाना चाहिए।

सैफई महोत्सव और योगी के बयान का समर्थन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'पहले परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान था' वाले बयान का राजभर ने खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में 5-6 घंटे बिजली मिलती थी, जबकि सैफई में 24 घंटे बिजली रहती थी और राज्य के विकास का पैसा वहाँ महोत्सव पर खर्च होता था। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह विपक्ष के मूल सवाल — मौजूदा चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता — से ध्यान हटाने का प्रयास भी है। 2014 के उदाहरण का इस्तेमाल 2026 की शिकायतों को खारिज करने के लिए करना तार्किक रूप से अधूरा है, क्योंकि संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल किसी एक कालखंड तक सीमित नहीं रहता। सपा पर क्रॉस वोटिंग और सीबीआई के दबाव का आरोप राजभर ने बिना किसी प्रमाण के लगाया है — यह मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर बिना पर्याप्त जाँच के प्रसारित हो जाता है। असली सवाल यह है कि क्या सत्तारूढ़ दल के सहयोगी इन आरोपों की जाँच के लिए स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र का समर्थन करेंगे — जो इस बयान में कहीं नहीं है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने चुनाव आयोग पर क्या कहा?
राजभर ने कहा कि 2014 से पहले चुनाव आयोग कांग्रेस की 'मुट्ठी में' था, फिर भी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने — इससे विपक्ष का 'वोट चोरी' का तर्क खुद ही खोखला साबित होता है। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को 'ड्रामा' करार दिया।
इंडिया गठबंधन ने ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों माँगा?
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। राजभर ने इस माँग को यह कहते हुए खारिज किया कि कुमार मात्र दो साल से इस पद पर हैं।
राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाया?
राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने चुनाव में प्रत्याशी इसलिए नहीं उतारा क्योंकि उसे क्रॉस वोटिंग का डर था। यह राजभर का व्यक्तिगत राजनीतिक दावा है जिसके लिए कोई स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है।
राहुल गांधी की चुनाव आयुक्त से मुलाकात की माँग पर राजभर ने क्या कहा?
राजभर ने कहा कि राहुल गांधी नोटिस देकर समय माँगें, चुनाव आयोग उनसे मिलेगा। मीडिया में बाहर बयान देने से मुलाकात नहीं होती — इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सैफई महोत्सव पर राजभर ने क्या रुख अपनाया?
राजभर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने कहा था कि पहले 'परिवारवाद ही विकास था और सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान था।' राजभर ने दावा किया कि तब प्रदेश में 5-6 घंटे बिजली मिलती थी जबकि सैफई में 24 घंटे आपूर्ति रहती थी।
राष्ट्र प्रेस
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