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RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% किया, होम लोन और छोटे कारोबार होंगे प्रभावित

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RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% किया, होम लोन और छोटे कारोबार होंगे प्रभावित

सारांश

RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% किया — और विशेषज्ञ इसे महज शुरुआत मान रहे हैं। HDFC बैंक की अर्थशास्त्री इसे बढ़ोतरी के एक पूरे चक्र की शुरुआत बता रही हैं, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा के अनुसार दिसंबर और फरवरी में और झटके आ सकते हैं।

मुख्य बातें

RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है।
होम लोन ग्राहकों और छोटे कारोबारों के लिए कर्ज लेना महंगा होने की उम्मीद है।
RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5.2% और विकास दर का अनुमान 7.1% किया।
मदन सबनवीस (बैंक ऑफ बड़ौदा) के अनुसार चालू वर्ष में 50 आधार अंकों की और सख्ती संभव — दिसंबर और फरवरी में बढ़ोतरी का अनुमान।
साक्षी गुप्ता (HDFC बैंक) ने इसे 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' चक्र की शुरुआत बताया, न कि एकमुश्त कदम।
RBI ने कोई नया विशेष लिक्विडिटी उपाय घोषित नहीं किया; VRRR के जरिए चरणबद्ध नियंत्रण जारी रहेगा।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है, जिससे होम लोन ग्राहकों और छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज लेना महंगा होने की आशंका है। 7 अक्टूबर 2026 को शीर्ष बैंकरों और अर्थशास्त्रियों ने इस निर्णय को 'संतुलित और पूर्व-सावधानी वाला कदम' बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास गति को प्रभावित किए बिना महंगाई के दबाव को काबू में रखना है।

RBI के फैसले की पृष्ठभूमि

केंद्रीय बैंक ने ऊर्जा कीमतों में उछाल, कमजोर मानसून और अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न आपूर्ति-पक्ष के दबाव के बीच बढ़ते महंगाई जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंक भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी के रास्ते पर हैं।

गौरतलब है कि RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया है, जबकि विकास दर का अनुमान 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है।

शीर्ष बैंकरों की प्रतिक्रिया

इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने इस बढ़ोतरी को 'संतुलित और पूर्व-सावधानी वाला कदम' बताया। उन्होंने कहा, 'ऊंची ब्याज दरों का असर स्वाभाविक रूप से कर्ज लेने वालों — खासकर होम लोन ग्राहकों और छोटे कारोबारों — पर पड़ेगा। बैंकों को ऊंची ब्याज दरों के असर को कर्ज लेने वालों तक पहुंचाने और साथ ही उत्पादक कर्ज की मांग को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाना होगा।'

HDFC बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि RBI ने प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अनुरूप ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू किया है। उनके अनुसार, 'मौद्रिक नीति के रुख में 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर बदलाव संकेत देता है कि आज की दर वृद्धि किसी एक बार के कदम के बजाय ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चक्र की शुरुआत है।'

आम जनता और छोटे कारोबार पर असर

रेपो रेट में बढ़ोतरी का सीधा असर उन लाखों होम लोन और व्यावसायिक कर्ज लेने वालों पर पड़ेगा, जिनकी ब्याज दरें बाह्य बेंचमार्क से जुड़ी हैं। छोटे कारोबारियों के लिए कार्यशील पूंजी का खर्च बढ़ सकता है, जिससे उनकी लाभप्रदता पर दबाव आ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकों को ग्राहकों पर बोझ डालने से पहले अपनी जमा और उधार दरों के बीच संतुलन बनाना होगा।

विशेषज्ञों का आकलन: आगे और बढ़ोतरी संभव

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने महंगाई संबंधी चिंताओं को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताया। उन्हें चालू वर्ष के दौरान 50 आधार अंकों की और सख्ती की उम्मीद है — उनके अनुसार दिसंबर में एक और बढ़ोतरी और उसके बाद फरवरी में एक और वृद्धि संभव है।

सबनवीस ने यह भी रेखांकित किया, 'इस नीति का दिलचस्प पहलू यह है कि RBI ने किसी विशेष लिक्विडिटी उपाय की घोषणा नहीं की है। यह संकेत देता है कि VRRR के जरिए लिक्विडिटी को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित करने का मौजूदा तरीका जारी रहेगा।'

आने वाले महीनों में RBI का रुख और वैश्विक मुद्रास्फीति के संकेत मिलकर यह तय करेंगे कि दर बढ़ोतरी का यह सिलसिला कहाँ जाकर रुकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन HDFC बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा दोनों के विशेषज्ञ इसे एक लंबे सख्ती-चक्र की पहली कड़ी बता रहे हैं — यही असली खबर है। ऐसे समय में जब विकास दर का अनुमान 7.1% है, RBI दरों को कहाँ तक ले जाएगा, यह सवाल उन करोड़ों परिवारों के लिए निर्णायक है जिनकी EMI सीधे रेपो रेट से जुड़ी है। महंगाई अनुमान को 5.2% तक संशोधित करना यह भी बताता है कि केंद्रीय बैंक के पास राहत देने की गुंजाइश फिलहाल सीमित है। नीति-निर्माताओं की असली परीक्षा यह होगी कि वे विकास को नुकसान पहुंचाए बिना मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य की ओर वापस ला पाते हैं या नहीं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने रेपो रेट कितना बढ़ाया और अब यह कितना है?
RBI ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है, जिससे यह बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है। यह निर्णय 7 अक्टूबर 2026 को घोषित किया गया।
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन पर क्या असर पड़ेगा?
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन की ब्याज दरें भी बढ़ेंगी, जिससे EMI महंगी हो सकती है। जिन ग्राहकों का लोन बाह्य बेंचमार्क से जुड़ा है, उन पर यह असर सीधे और जल्दी पड़ेगा।
क्या आगे और रेपो रेट बढ़ोतरी होगी?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के अनुसार चालू वर्ष में 50 आधार अंकों की और सख्ती संभव है, जिसमें दिसंबर और फरवरी में बढ़ोतरी का अनुमान है। HDFC बैंक की साक्षी गुप्ता ने भी इसे एक पूरे बढ़ोतरी चक्र की शुरुआत बताया है।
RBI ने यह फैसला क्यों लिया?
RBI ने ऊर्जा कीमतों में उछाल, कमजोर मानसून और अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न आपूर्ति-पक्ष के दबाव तथा घरेलू महंगाई जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 5.2% और विकास दर का अनुमान 7.1% किया है।
RBI ने लिक्विडिटी के लिए कोई नया उपाय क्यों नहीं किया?
मदन सबनवीस के अनुसार RBI ने कोई विशेष लिक्विडिटी उपाय घोषित नहीं किया, जो संकेत देता है कि VRRR के जरिए लिक्विडिटी को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित करने का मौजूदा तरीका जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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