7 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

RBI ने रेपो रेट 5.50% किया, फ्लोटिंग होम लोन धारकों की EMI बढ़ने के आसार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
RBI ने रेपो रेट 5.50% किया, फ्लोटिंग होम लोन धारकों की EMI बढ़ने के आसार

सारांश

RBI ने रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% कर दिया है और नीति का रुख 'संतुलित सख्ती' पर ला दिया है। फ्लोटिंग होम लोन धारकों की EMI या टेन्योर बढ़ने की आशंका है। गवर्नर मल्होत्रा ने दर कटौती की किसी भी निकट-भविष्य की संभावना से इनकार किया है।

मुख्य बातें

RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50% कर दिया।
फ्लोटिंग रेट होम लोन पर ब्याज दर 8% से बढ़कर लगभग 8.25% तक पहुँचने का अनुमान।
बैंकों के पास दो विकल्प — EMI बढ़ाएँ या ऋण अवधि (टेन्योर) बढ़ाएँ ।
RBI ने मौद्रिक नीति का रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' किया।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने निकट भविष्य में दर कटौती की संभावना से इनकार किया।
पश्चिम एशिया तनाव, $100/बैरल से ऊपर कच्चा तेल और वैश्विक अनिश्चितता इस निर्णय की पृष्ठभूमि में।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर उसे 5.25% से 5.50% पर पहुँचा दिया, जिसके बाद फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन चुका रहे लाखों ग्राहकों की कर्ज लागत बढ़ने का अनुमान है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।

फ्लोटिंग रेट लोन पर सीधा असर

भारत में अधिकांश खुदरा होम लोन ग्राहक फ्लोटिंग रेट विकल्प चुनते हैं, क्योंकि यह फिक्स्ड रेट लोन की तुलना में 1% से 2.5% तक सस्ता पड़ता है। फ्लोटिंग रेट लोन सीधे रेपो रेट या अन्य बाज़ार-आधारित बेंचमार्क से जुड़े होते हैं, इसलिए नीतिगत दर में हर बदलाव का प्रभाव इन उधारकर्ताओं पर तत्काल पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ग्राहक अभी 8% ब्याज दर पर होम लोन चुका रहा है और बैंक पूरी बढ़ोतरी ग्राहक पर स्थानांतरित करता है, तो उसकी प्रभावी दर बढ़कर लगभग 8.25% हो सकती है।

बैंकों के पास दो विकल्प

दर बढ़ोतरी के बाद बैंकों के पास आमतौर पर दो रास्ते होते हैं — वे या तो ग्राहक की मासिक किस्त (EMI) बढ़ा सकते हैं, या फिर EMI को यथावत रखते हुए ऋण अवधि (टेन्योर) में विस्तार कर सकते हैं। अंततः यह निर्णय संबंधित बैंक की नीति और ग्राहक के लोन अनुबंध पर निर्भर करेगा।

विशेषज्ञों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक की आधिकारिक सूचनाओं और वेबसाइट पर नज़र बनाए रखें, क्योंकि अलग-अलग बैंक इस बदलाव को अपने-अपने तरीके से लागू कर सकते हैं।

मौद्रिक नीति का रुख बदला

RBI ने केवल रेपो रेट नहीं बढ़ाया — केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' यानी 'संतुलित सख्ती' अपना लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, आगे की नीतिगत कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी या यथास्थिति के रूप में हो सकती है।

गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, $100 प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें, खाद्य महंगाई और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताएँ मिलकर अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रही हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब घर खरीदने का सपना देख रहे मध्यम वर्ग और नए उधारकर्ताओं के लिए वहनीयता पहले से ही एक बड़ी चुनौती है। बढ़ती EMI न केवल पारिवारिक बजट पर भार डालती है, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र की माँग को भी धीमा कर सकती है।

आगे की दिशा

RBI के 'संतुलित सख्ती' के रुख के मद्देनज़र, बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि अगली मौद्रिक नीति बैठक में दरों का भविष्य काफी हद तक मुद्रास्फीति के आँकड़ों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल होम लोन लेने की योजना बना रहे नए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे फिक्स्ड बनाम फ्लोटिंग विकल्प पर सावधानी से विचार करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए माँग में और नरमी का जोखिम। केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता इस बात पर टिकी होगी कि वह इस सख्त रुख को वास्तव में आँकड़ों पर आधारित रखे, न कि बाज़ार की प्रतिक्रिया से प्रभावित हो।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI ने रेपो रेट कितना बढ़ाया और अब यह कितना है?
RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की, जिससे यह 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया। यह निर्णय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिया गया।
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन EMI पर क्या असर होगा?
फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की ब्याज दर 8% से बढ़कर लगभग 8.25% तक हो सकती है, जिससे EMI बढ़ेगी या ऋण अवधि लंबी हो सकती है। अंतिम प्रभाव बैंक की नीति पर निर्भर करेगा।
फ्लोटिंग रेट और फिक्स्ड रेट होम लोन में क्या फर्क है?
फ्लोटिंग रेट लोन सीधे रेपो रेट या बाज़ार बेंचमार्क से जुड़े होते हैं और दर में बदलाव पर स्वतः प्रभावित होते हैं। फिक्स्ड रेट लोन पर ब्याज दर पूरे कार्यकाल में स्थिर रहती है, लेकिन यह फ्लोटिंग रेट से आमतौर पर 1% से 2.5% तक अधिक होती है।
RBI के 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख का क्या मतलब है?
'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' यानी 'संतुलित सख्ती' का अर्थ है कि RBI आगे भी परिस्थितियों के अनुसार दरें बढ़ा सकता है या यथास्थिति बनाए रख सकता है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।
होम लोन धारकों को अभी क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा उधारकर्ता अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट और सूचनाओं पर नज़र रखें, क्योंकि बैंक अलग-अलग तरीके से दर परिवर्तन लागू करते हैं। नए उधारकर्ता फिक्स्ड बनाम फ्लोटिंग विकल्प पर सावधानी से विचार करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले