मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष: आचार्य प्रमोद कृष्णम बोले — 'भारतीय लोकतंत्र का नया अध्याय'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर गाजियाबाद में धार्मिक-सामाजिक क्षेत्र के著名 चिंतक आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उन्हें बधाई दी और इस यात्रा को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक नया अध्याय बताया। मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी और 2014 से वे देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
'नेहरू को पढ़ा, मोदी को देखा'
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, 'पंडित जवाहरलाल नेहरू को हमने नहीं देखा, लेकिन उनके बारे में पढ़ा और सुना है। इंदिरा गांधी को देखा भी है। नरेंद्र मोदी के जीवन के ये 25 वर्ष भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का नया अध्याय हैं।' उन्होंने इस मौके को 'सिल्वर जुबली' करार देते हुए कामना की कि प्रधानमंत्री की 'गोल्डन जुबली' भी इसी प्रकार मनाई जाए।
भारत की वैश्विक पहचान में बदलाव
कृष्णम ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के इन 25 वर्षों में भारत की अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक पहचान में उल्लेखनीय बदलाव आया है। उनके अनुसार, एक समय था जब भारत की तुलना पाकिस्तान जैसे देशों से की जाती थी, जबकि आज भारत की तुलना चीन, रूस और अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों से होती है। यह बदलाव, उनके मतानुसार, भारत के बढ़ते कूटनीतिक और आर्थिक कद को दर्शाता है।
सनातन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उल्लेख
आचार्य कृष्णम ने मोदी सरकार के कार्यकाल में सनातन से जुड़े मुद्दों के वैश्विक मंच पर चर्चा में आने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने श्री कल्कि धाम, कुंभ, महाकुंभ, रामेश्वरम, सोमनाथ और केदारनाथ जैसे धार्मिक स्थलों के विकास और उनकी वैश्विक पहचान का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन सांस्कृतिक और धार्मिक विषयों ने भारत की पहचान को दुनिया के सामने मजबूत किया है।
अनुच्छेद 370 और राष्ट्रीय एकता
राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर कृष्णम ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने और कश्मीर के लाल चौक पर वंदे मातरम गाए जाने जैसे प्रतीकात्मक घटनाक्रमों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल गुजरात तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने अपना जीवन देश और 'भारत की मिट्टी' को समर्पित किया है।
राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा आकाशवाणी के बाहर किए गए धरने पर प्रतिक्रिया देते हुए आचार्य कृष्णम ने कहा, 'राहुल गांधी धरना देने में एक्सपर्ट हो गए हैं। उन्हें इसकी प्रैक्टिस 2047 तक करते रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'कांग्रेस की बर्बादी का अगर कोई जिम्मेदार है, तो वह राहुल गांधी हैं।' यह टिप्पणी कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल उत्पन्न करने वाली मानी जा रही है।
गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण हुए — यह यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री पद से शुरू होकर लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने तक पहुँची है। यह राजनीतिक दीर्घायुता आधुनिक भारतीय लोकतंत्र में विरल मानी जाती है।