अंडर-17 रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026: भारत ने 13 मेडल जीते, सितेंदर मलिक ने लगातार दूसरा गोल्ड दर्ज किया
सारांश
मुख्य बातें
अंडर-17 रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में भारत ने कुल 13 मेडल के साथ अपना अभियान समाप्त किया — पुरुष और महिला फ्रीस्टाइल दोनों वर्गों में शानदार प्रदर्शन के दम पर। अज़रबैजान के बाकू में आयोजित इस प्रतियोगिता के अंतिम दिन भारत ने तीन और मेडल अपनी झोली में डाले, जिनमें 17 वर्षीय सितेंदर मलिक का स्वर्ण पदक सबसे चमकदार रहा।
सितेंदर मलिक का ऐतिहासिक खिताब बचाव
60 किलोग्राम वर्ग में सितेंदर मलिक ने फाइनल में रूस के सर्गेई कर्मरियन को 3-1 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। शांत और सटीक रेसलिंग से भरे इस मुकाबले में सितेंदर ने साल 2025 के अपने अंडर-17 वर्ल्ड टाइटल का सफलतापूर्वक बचाव किया। इसी के साथ वे दो अंडर-17/कैडेट वर्ल्ड खिताब जीतने वाले भारत के दूसरे पुरुष फ्रीस्टाइल रेसलर बन गए।
यह उपलब्धि उन्हें दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार की श्रेणी में खड़ा करती है, जिन्होंने 1998 और 1999 में कैडेट वर्ल्ड खिताब जीते थे। गौरतलब है कि सुशील कुमार के बाद किसी भारतीय पुरुष फ्रीस्टाइल रेसलर ने यह कारनामा नहीं किया था — सितेंदर ने दो दशकों से अधिक समय बाद यह खाई पाटी है।
अंतिम दिन के अन्य मेडल विजेता
45 किलोग्राम वर्ग में हनुमंत राजेंद्र जाधव ने ब्रॉन्ज मेडल प्ले-ऑफ में ईरान के महदी दावूद डमरचेली को 7-1 के बड़े अंतर से हराया। फुर्ती और तकनीकी दक्षता का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जाधव ने भारत के लिए एकतरफा जीत दर्ज की।
92 किलोग्राम वर्ग में सक्षम ने ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में ईरान के मोहम्मद रजा बेहरांग इसाजादेह को 3-2 (वीपीओ1) से हराया। अहम पलों में मजबूत डिफेंस और संयम का परिचय देते हुए सक्षम ने यह कांटे का मुकाबला अपने नाम किया।
पूरे अभियान का मेडल विवरण
पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग में भारत के लिए सितेंदर (60 किग्रा) ने गोल्ड, आर्यन (48 किग्रा) ने सिल्वर, तथा हनुमंत राजेंद्र जाधव (45 किग्रा), प्रथमेश सूर्यकांत पाटिल (55 किग्रा), सक्षम (92 किग्रा) और अरुष राणा (110 किग्रा) ने ब्रॉन्ज मेडल जीते।
महिला कुश्ती वर्ग में संध्या विश्नोई (46 किग्रा), अक्षरा (53 किग्रा) और निकिता सहरावत (57 किग्रा) ने सिल्वर मेडल हासिल किए। वहीं कामना बबल (49 किग्रा), अवांशिका (61 किग्रा), तान्या (69 किग्रा) और गरिमा (73 किग्रा) ने ब्रॉन्ज मेडल जीते।
भारतीय कुश्ती के लिए व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जूनियर रेसलिंग अपनी पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत कर रही है। 13 मेडल का यह आँकड़ा दर्शाता है कि भारत की ग्रासरूट कुश्ती प्रतिभा पाइपलाइन मजबूत है — और सितेंदर जैसे रेसलर भविष्य के ओलंपिक अभियानों की नींव बन सकते हैं।
पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग के समापन के साथ ही अंडर-17 वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 का आधिकारिक समापन हुआ। अब नज़रें इन युवा रेसलरों के सीनियर सर्किट में कदम रखने पर टिकी होंगी।