सूरत साइबर क्राइम ब्रांच की कार्रवाई: नकली शेयर ट्रेडिंग ऐप से ₹1.10 करोड़ की ठगी, मुंबई से तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
सूरत सिटी की साइबर क्राइम ब्रांच ने 29 सितंबर 2026 को मुंबई से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन पर शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर एक पीड़ित से ₹1.10 करोड़ से अधिक की ठगी करने का आरोप है। जिस बैंक खाते का इस्तेमाल इस धोखाधड़ी में हुआ, उसके विरुद्ध नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर अलग-अलग राज्यों से कुल 29 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें कथित तौर पर ₹16.13 करोड़ की धोखाधड़ी का उल्लेख है।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी भूमिका
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान राहुल रजक (27 वर्ष), आशीष सोनार (37 वर्ष) और भूषण सेंडने (34 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, राहुल रजक ने अपने नाम से एक फर्म बनाई, उद्यम सर्टिफिकेट लिया और IDFC बैंक में एक करंट अकाउंट खुलवाया, जिसे उसने ₹10,000 में आशीष सोनार को सौंप दिया।
सोनार ने कथित तौर पर वही अकाउंट ₹30,000 में भूषण सेंडने को दिया। सेंडने ने आगे उसे ₹20,000 में एक और अज्ञात आरोपी को बेच दिया। पुलिस के अनुसार तीनों को बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले कुल मिलाकर ₹60,000 कमीशन मिला।
ठगी का तरीका: नकली ऐप और झूठे मुनाफे का जाल
पुलिस के अनुसार यह मामला तब शुरू हुआ जब शिकायतकर्ता से शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का वादा करते हुए संपर्क किया गया। आरोपियों ने उसे एक नकली एक्सिस बैंक ऐप की APK फाइल भेजी और दावा किया कि वे बैंक की कस्टमर केयर सेवा से बात कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता को ऐप डाउनलोड करने, डीमैट अकाउंट बनाने और उसके ज़रिए ट्रेडिंग करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद उससे अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह उसने कुल ₹1,10,90,000 जमा किए।
जब शिकायतकर्ता ने अपना निवेश और कथित मुनाफा निकालना चाहा, तो आरोपियों ने 'निकासी शुल्क' और 'अन्य चार्ज' के नाम पर और पैसे माँगने शुरू किए। उसे केवल ₹5,000 निकालने की अनुमति मिली जबकि शेष ₹1,10,85,000 ब्लॉक रहे, जिसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
बैंक खाते में करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन
पुलिस की जाँच में सामने आया कि 18 अक्टूबर 2025 से 9 जनवरी 2026 के बीच इस करंट अकाउंट के ज़रिए ₹2,41,03,506 का लेन-देन हुआ। NCRP पर खोज करने पर इसी खाते से जुड़ी 29 शिकायतें सामने आईं, जिनमें कुल कथित धोखाधड़ी ₹16,13,44,790 यानी लगभग ₹16.13 करोड़ बताई गई है।
यह आँकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि यह गिरोह एक बड़े और संगठित साइबर-फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो एक ही बैंक खाते का उपयोग एकाधिक पीड़ितों के खिलाफ करता था।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस की अपील
डीसीपी (साइबर क्राइम सेल) विशाखा जैन ने बताया, 'गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने के लिए कुल मिलाकर ₹60,000 कमीशन के तौर पर मिले थे।' तीनों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5) और सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम, 2008 की धारा 66(D) के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी में शामिल अन्य आरोपियों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। साइबर क्राइम ब्रांच ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन शेयर मार्केट में असाधारण रिटर्न का वादा करने वाले विज्ञापनों और अनजान APK फाइलों से बचें तथा बिना सत्यापन के किसी अजनबी के खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।