₹700 करोड़ के कथित जीएसटी फर्जीवाड़े में ईडी की बड़ी छापेमारी, जमशेदपुर और बंगाल में एक साथ तलाशी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 सितंबर 2026 को ₹700 करोड़ से अधिक के कथित जीएसटी फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड और पश्चिम बंगाल में एक साथ कई ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई जमशेदपुर के उद्योगपति ज्ञान चंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल से जुड़े परिसरों सहित पश्चिम बंगाल में भी एक साथ की जा रही है।
कहाँ-कहाँ हुई छापेमारी
सूत्रों के अनुसार, जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित कांट्रैक्टर्स एरिया में जायसवाल के आवास पर तलाशी ली गई। इसके अलावा बर्मामाइंस, जुगसलाई और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उनसे जुड़े कारोबारी परिसरों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। आदित्यपुर के हथियाडीह स्थित शारदा एंडेवर से जुड़े परिसर की भी तलाशी बताई जा रही है।
ईडी की अलग-अलग टीमें पश्चिम बंगाल में भी समानांतर रूप से तलाशी अभियान चला रही हैं। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही सीमित रखी गई है।
क्या है कथित फर्जीवाड़े का तरीका
जांच एजेंसी को कथित तौर पर ऐसी कंपनियों और फर्मों के नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली है, जिनके माध्यम से बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने और उसे आगे बढ़ाने का आरोप है। रिपोर्टों के अनुसार, इस नेटवर्क में फर्जी कंपनियों के नाम पर बिल तैयार कर जीएसटी क्रेडिट का कथित तौर पर अवैध तरीके से उपयोग किया जाता रहा।
गौरतलब है कि ज्ञान चंद जायसवाल इससे पहले भी जीएसटी से जुड़े एक अन्य मामले में जांच के दायरे में रह चुके हैं। बुधवार की ताज़ा कार्रवाई को उसी तरह के कथित फर्जी बिलिंग और वित्तीय लेन-देन के बड़े नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है।
डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं
ईडी की टीमें कारोबारी लेन-देन, खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
यह कार्रवाई कथित जीएसटी फर्जीवाड़े से जुड़े उस व्यापक नेटवर्क की जांच का हिस्सा बताई जा रही है, जिसमें कोलकाता से जुड़े कुछ कारोबारी और कथित सिंडिकेट भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं।
आगे क्या होगा
ईडी की ओर से तलाशी पूरी होने और जांच के प्रारंभिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कार्रवाई में कितनी संपत्तियों, कंपनियों और वित्तीय लेन-देन को जांच के दायरे में लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, फर्जी आईटीसी नेटवर्क के मामलों में आमतौर पर संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो सकती है, यदि दस्तावेजी साक्ष्य पर्याप्त पाए जाते हैं।