झारखंड शराब घोटाला: ईडी ने पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 7 जुलाई को झारखंड के पूर्व उत्पाद एवं वित्त मंत्री तथा कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रामेश्वर उरांव से रांची स्थित अपने क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ शुरू की। कथित अवैध बालू और शराब सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एजेंसी ने उन्हें दूसरा समन जारी कर तलब किया था, जिसके बाद वे पूर्वाह्न करीब 11 बजे ईडी कार्यालय पहुँचे।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने 23 अगस्त 2023 को रांची के बरियातू स्थित सरहुल नगर में रामेश्वर उरांव के आवास 'रागिनी विला' पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की बरियातू शाखा में स्थित उनके बैंक लॉकर की भी जाँच कर उसे जब्त किया गया था। एजेंसी ने बाद में 19 सितंबर 2023 को डिजिटल उपकरणों और जब्त सामग्री के संरक्षण के लिए रिटेंशन आदेश जारी किया, जिसे 20 सितंबर 2023 को दिल्ली स्थित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने मंजूरी दी।
पुत्र रोहित उरांव से भी पूछताछ
इससे एक दिन पहले सोमवार को ईडी ने रामेश्वर उरांव के पुत्र रोहित उरांव से भी लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने उनसे अगस्त 2023 की छापेमारी में बरामद करीब ₹30 लाख नकद, बैंक लॉकर, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय दस्तावेजों के बारे में सवाल किए। कथित बेनामी निवेश, बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेन-देन को लेकर भी जानकारी माँगी गई। सूत्रों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सवालों पर रोहित उरांव स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
2021 की उत्पाद नीति पर जाँच
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने पूछताछ के दौरान वर्ष 2021 की झारखंड उत्पाद नीति और निजी कंपनियों को थोक शराब लाइसेंस दिए जाने के फैसलों को लेकर भी सवाल किए। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तत्कालीन उत्पाद मंत्री रामेश्वर उरांव के कार्यकाल में कथित शराब सिंडिकेट को लाभ पहुँचाने में उनके पुत्र या परिवार की कोई भूमिका थी या नहीं।
पहले समन पर नहीं हुए थे पेश
गौरतलब है कि ईडी ने रामेश्वर उरांव को इससे पहले 30 जून को भी समन जारी किया था। उस समय उन्होंने आवश्यक दस्तावेज तैयार करने के लिए समय माँगा था, जिसके बाद एजेंसी ने दूसरा समन जारी कर उन्हें मंगलवार 7 जुलाई को उपस्थित होने का निर्देश दिया। यह मामला झारखंड की राजनीति में उस वक्त और अहमियत रखता है जब राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार दबाव बनाए हुए है।