झारखंड शराब घोटाला: ईडी के समन पर नहीं पहुँचे रोहित उरांव, पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव 30 जून को तलब
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में कांग्रेस विधायक एवं पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के पुत्र रोहित उरांव को 29 जून 2026 को पूछताछ के लिए रांची स्थित अपने कार्यालय में बुलाया था, किंतु वे उपस्थित नहीं हुए। रोहित ने एजेंसी को पत्र भेजकर दस्तावेज़ तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा है। वहीं, स्वयं पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव को 30 जून को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।
समन पर अनुपस्थिति की वजह
सूत्रों के अनुसार, रोहित उरांव और रामेश्वर उरांव दोनों ने ईडी को भेजे अलग-अलग पत्रों में कहा है कि अपने पक्ष से जुड़े आवश्यक दस्तावेज़ जुटाने में उन्हें कुछ और वक्त चाहिए। फिलहाल एजेंसी ने इस अनुरोध पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है। बताया जा रहा है कि यदि दोनों निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होते, तो ईडी एक सप्ताह के भीतर नए समन जारी कर सकती है।
जाँच का दायरा और मनी ट्रेल
ईडी इस मामले में कथित मनी ट्रेल और झारखंड की नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन के दौरान निजी कंपनियों की भूमिका की जाँच कर रही है। एजेंसी को संदेह है कि छत्तीसगढ़ की कुछ कंपनियों को झारखंड में शराब आपूर्ति और मैनपावर सप्लाई का काम दिलाने की प्रक्रिया में रोहित उरांव की भूमिका रही होगी। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की कंपनी श्री ओम साई बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड को झारखंड में प्रवेश दिलाने और उसे ठेका मिलने से जुड़े वित्तीय लेनदेन तथा डिजिटल साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
पूर्व छापेमारी और नकद बरामदगी
गौरतलब है कि ईडी 23 अगस्त 2023 को रांची, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा और कोलकाता समेत 32 ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। इस कार्रवाई के दौरान रोहित उरांव के रांची स्थित आवास से ₹30 लाख नकद बरामद किए गए थे। एजेंसी उस बरामदगी और कथित निवेश के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
मामले की कानूनी पृष्ठभूमि
ईडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज कांड संख्या 9/2025 को आधार बनाते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईसीआईआर संख्या 10/2025 दर्ज की है। एसीबी ने नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे, उत्पाद विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह, विनय सिंह समेत 10 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था।
आगे क्या होगा
एजेंसी ने इस मामले में पहले गिरफ्तार कुछ आरोपियों से जेल में भी पूछताछ की है। अब जाँच का दायरा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक विस्तृत होने के बाद इस मामले पर सभी की नज़रें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ईडी रामेश्वर उरांव और रोहित उरांव के अनुरोध को स्वीकार करती है या 30 जून को अनुपस्थिति की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करती है।