9 जुलाई 2026
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ईडी की पश्चिम बंगाल में बड़ी छापेमारी: क्रिप्टो-चिट फंड धोखाधड़ी मामले में अंडाल, हावड़ा, नदिया में तलाशी

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ईडी की पश्चिम बंगाल में बड़ी छापेमारी: क्रिप्टो-चिट फंड धोखाधड़ी मामले में अंडाल, हावड़ा, नदिया में तलाशी

सारांश

ईडी ने 9 जुलाई को पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में एक साथ छापेमारी की — निशाने पर हैं क्रिप्टो निवेश के नाम पर ठगी करने वाला पिता-पुत्र, एक कथित चिट फंड संचालक और 'स्टॉक गुरुकुल' कंपनी का मालिक। दुबई कनेक्शन और भारी बैंक लेनदेन ने जांच को नया मोड़ दिया है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के अंडाल (पश्चिम बर्दवान), हावड़ा और नदिया जिलों में एक साथ छापेमारी की।
दिलीप मलिक और उनके बेटे दिगंत मलिक पर क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी और दुबई से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का आरोप है।
दिगंत मलिक को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है; हाल ही में बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन मिलने के बाद नई छापेमारी हुई।
सौरव चटर्जी (हावड़ा) पर कई चिट फंड व शेयर बाजार कारोबारों से जुड़े होने का आरोप।
शुभ्र कांति नाग उर्फ बाबाई नाग (नदिया) पर 'स्टॉक गुरुकुल' नामक कथित फर्जी चिट फंड कंपनी के ज़रिए गबन और धोखाधड़ी का आरोप।
सभी स्थानों पर तलाशी के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती की गई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 9 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के कई जिलों में एक साथ छापेमारी की, जो क्रिप्टोकरेंसी निवेश, शेयर बाजार प्रशिक्षण योजनाओं और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े चिट फंड धोखाधड़ी मामले की जांच का हिस्सा है। पश्चिम बर्दवान, हावड़ा और नदिया जिलों में केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ एक साथ तलाशी ली गई।

मुख्य घटनाक्रम

छापेमारी की पहली कार्रवाई पश्चिम बर्दवान जिले के अंडाल स्थित श्रीपल्ली सुभाषनगर रिक्शाडांगा इलाके में ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ईसीएल) कर्मचारी दिलीप मलिक के आवास पर हुई। इसी के साथ हावड़ा के बेत्रा थाना क्षेत्र के कुचिल सरकार लेन निवासी सौरव चटर्जी के घर और नदिया जिले के कालीनारायणपुर निवासी कारोबारी शुभ्र कांति नाग उर्फ बाबाई नाग से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ली गई।

आरोपियों पर क्या हैं आरोप

जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, दिलीप मलिक और उनके बेटे दिगंत मलिक पर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। कथित तौर पर पिता-पुत्र ने कोलकाता के फेयरली प्लेस में एक कार्यालय खोलकर लोगों को क्रिप्टो निवेश के लिए प्रोत्साहित किया और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार कर करोड़ों रुपये जुटाए। सूत्रों के अनुसार, इन आरोपियों के तार दुबई के एक कारोबारी से जुड़े बताए जाते हैं और यह धन विदेश में मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए खपाया गया।

गौरतलब है कि दिगंत मलिक को इससे पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। हाल ही में जांच एजेंसी को उनके बैंक खाते में भारी धनराशि के लेनदेन के सुराग मिले, जिसके बाद यह ताज़ा छापेमारी की गई।

सौरव चटर्जी पर आरोप है कि वे कई चिट फंड कंपनियों और शेयर बाजार से जुड़े कारोबारों से संबद्ध हैं। वहीं शुभ्र कांति नाग पर शेयर बाजार प्रशिक्षण और निवेश के नाम पर 'स्टॉक गुरुकुल' नामक एक कथित फर्जी चिट फंड कंपनी चलाने का आरोप है, जिस पर गबन और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं।

जांच का दायरा और पृष्ठभूमि

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में चिट फंड घोटालों की जांच वर्षों से जारी है। शारदा और रोज़ वैली जैसे बड़े घोटालों के बाद ईडी राज्य में इस तरह की योजनाओं पर लगातार नज़र बनाए हुए है। क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए पैसा जुटाने की नई पद्धति ने इन मामलों को और जटिल बना दिया है। यह Nवीं ऐसी घटना है जिसमें पारंपरिक चिट फंड ढाँचे को डिजिटल निवेश के आवरण में संचालित किया गया।

आम जनता पर असर

इन योजनाओं में कथित तौर पर सामान्य निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए गए। क्रिप्टोकरेंसी और शेयर बाजार प्रशिक्षण के नाम पर चलाई जाने वाली ऐसी फर्जी योजनाएँ मध्यमवर्गीय और निम्न-आय वर्ग के निवेशकों को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं, जो त्वरित रिटर्न के वादे पर अपनी बचत लगा देते हैं।

क्या होगा आगे

जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाएगी। दुबई कनेक्शन को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की के कदम उठाए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह चिंताजनक है। क्रिप्टोकरेंसी और 'स्टॉक गुरुकुल' जैसे नामों का इस्तेमाल यह दर्शाता है कि धोखाधड़ी की पद्धतियाँ परिष्कृत हो रही हैं, जबकि नियामकीय निगरानी पीछे चल रही है। दुबई कनेक्शन यदि सिद्ध होता है, तो यह मामला महज़ स्थानीय ठगी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है। असली सवाल यह है कि इन योजनाओं में पैसा लगाने वाले आम निवेशकों को राहत कब और कैसे मिलेगी — जो अब तक की जांचों में प्रायः पीछे छूट जाते हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने 9 जुलाई को पश्चिम बंगाल में छापेमारी क्यों की?
प्रवर्तन निदेशालय ने क्रिप्टोकरेंसी निवेश, शेयर बाजार प्रशिक्षण योजनाओं और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चिट फंड धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत यह कार्रवाई की। हाल ही में संदिग्ध बैंक लेनदेन के सुराग मिलने के बाद छापेमारी का निर्णय लिया गया।
दिलीप मलिक और दिगंत मलिक पर क्या आरोप हैं?
पिता दिलीप मलिक और बेटे दिगंत मलिक पर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। कथित तौर पर दोनों ने कोलकाता के फेयरली प्लेस में कार्यालय खोलकर और सोशल मीडिया के ज़रिए प्रचार कर लोगों से पैसे जुटाए, जिन्हें दुबई के एक कारोबारी के माध्यम से विदेश में लॉन्डर किया गया।
'स्टॉक गुरुकुल' क्या है और इस पर क्या आरोप हैं?
'स्टॉक गुरुकुल' नदिया जिले के कारोबारी शुभ्र कांति नाग उर्फ बाबाई नाग द्वारा कथित तौर पर शेयर बाजार प्रशिक्षण और निवेश के नाम पर चलाई जाने वाली एक कंपनी है। इस पर गबन और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं और ईडी ने इससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली है।
इस मामले में दुबई कनेक्शन क्या है?
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, आरोपियों के तार दुबई के एक कारोबारी से जुड़े हैं और धोखाधड़ी से जुटाई गई धनराशि को विदेश में मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए खपाया गया। यह अंतरराष्ट्रीय आयाम जांच को और जटिल बनाता है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
तलाशी के दौरान मिले दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की के कदम उठाए जा सकते हैं। दुबई कनेक्शन की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग लिया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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