18 अगस्त 2026
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सूरत साइबर फ्रॉड: ₹1.52 करोड़ के निवेश घोटाले का मास्टरमाइंड रियाज खंभालिया से गिरफ्तार

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सूरत साइबर फ्रॉड: ₹1.52 करोड़ के निवेश घोटाले का मास्टरमाइंड रियाज खंभालिया से गिरफ्तार

सारांश

सूरत साइबर पुलिस ने ₹1.52 करोड़ के निवेश घोटाले के मास्टरमाइंड रियाज उर्फ शोएब मिर्जा को खंभालिया से दबोचा। आरोपी फर्जी बैंक खाते मुहैया कराकर ठगी की रकम को ठिकाने लगाता था। एनसीसीआरपी पर 22 राज्यों में 318 शिकायतें दर्ज हैं, जो इस नेटवर्क की व्यापकता दर्शाती हैं।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने रियाज उर्फ शोएब मिर्जा (32) को 18 अगस्त 2026 को खंभालिया, देवभूमि द्वारका से गिरफ्तार किया।
पीड़ित से 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच फर्जी वेबसाइट के ज़रिए ₹1,52,63,198 ठगे गए।
रियाज पहले गिरफ्तार आरोपियों को 3% कमीशन देकर बैंक खाते हासिल करता था और फरार आरोपियों को मनी ट्रांसफर के लिए देता था।
एनसीसीआरपी पर जाँच में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 318 शिकायतें सामने आईं।
इस मामले में पहले अहमदाबाद के तीन आरोपी — मिनेश कुमार सोलंकी, अनिल गुप्ता और विकास सिंह भदौरिया — गिरफ्तार हो चुके हैं।
अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ जाँच जारी है।

सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने ₹1.52 करोड़ के ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी मामले के मास्टरमाइंड रियाज उर्फ शोएब मिर्जा (32) को 18 अगस्त 2026 को देवभूमि द्वारका जिले के खंभालिया स्थित उसके नए आवास से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर फ्रॉड की रकम को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करता था।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता को 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच निशाना बनाया गया। आरोपियों ने शेयर बाज़ार में डॉलर-निवेश के ज़रिए अधिक रिटर्न का झाँसा दिया और एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजकर पीड़ित को उस पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए मना लिया।

इसके बाद पीड़ित ने ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर फर्जी वेबसाइटों तथा कस्टमर सर्विस चैनलों के माध्यम से बताए गए विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹1,52,63,198 ट्रांसफर कर दिए। जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की, तो उसे रोक दिया गया। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी कैसे हुई

पुलिस इंस्पेक्टर वाई.एस. सिसोदिया और उनकी टीम ने असिस्टेंट पुलिस कॉन्स्टेबल हार्दिक कुमार गगजीभाई सहित अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर तकनीकी इनपुट के आधार पर आरोपी की लोकेशन खंभालिया में ट्रेस की। इसके बाद देवभूमि द्वारका एक विशेष टीम भेजी गई, जिसने रियाज को उसके नए घर से दबोचा।

आरोपी की भूमिका और नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, रियाज ने इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों को तीन प्रतिशत कमीशन देकर उनसे बैंक खाते हासिल किए। ये खाते उसने फरार आरोपियों को साइबर फ्रॉड की रकम ट्रांसफर करने के लिए मुहैया कराए और बदले में कमीशन लिया।

गौरतलब है कि इस मामले में पहले अहमदाबाद के मिनेश कुमार सोलंकी (26), अनिल गुप्ता (39) और विकास सिंह भदौरिया (34) को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक इंडसइंड बैंक खाते से जुड़ी 7 एनसीसीआरपी शिकायतें भी सामने आई हैं, जो कथित तौर पर रियाज ने पहले गिरफ्तार आरोपियों में से एक से कमीशन पर हासिल किया था।

22 राज्यों में फैला धोखाधड़ी का जाल

एफआईआर में दर्ज बैंक खातों की राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर जाँच करने पर पता चला कि 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 318 शिकायतें दर्ज हैं। इनमें सर्वाधिक तमिलनाडु से 60, केरल से 43, महाराष्ट्र से 35, तेलंगाना से 26, कर्नाटक से 26 और गुजरात से 49 शिकायतें शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली से 6, उत्तर प्रदेश से 17, राजस्थान से 8 और पश्चिम बंगाल से 8 शिकायतें भी दर्ज हैं।

आगे की जाँच

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अभी भी कई आरोपी फरार हैं और उनके खिलाफ जाँच जारी है। यह मामला देशव्यापी साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसमें मनी-म्यूलिंग के लिए संगठित रूप से बैंक खाते जुटाए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनके KYC और फ्रॉड-डिटेक्शन तंत्र इतने लंबे समय तक क्यों चूकते रहे। गिरफ्तारियाँ ज़रूरी हैं, लेकिन जब तक मनी-म्यूल नेटवर्क की जड़ें — यानी खाता-किराया बाज़ार — नहीं तोड़ी जातीं, नए रियाज तैयार होते रहेंगे।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत साइबर फ्रॉड मामले में रियाज मिर्जा को कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
रियाज उर्फ शोएब मिर्जा को 18 अगस्त 2026 को गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के खंभालिया स्थित उसके नए आवास से गिरफ्तार किया गया। तकनीकी इनपुट के आधार पर सूरत साइबर क्राइम पुलिस की टीम ने उसकी लोकेशन ट्रेस की थी।
पीड़ित के साथ ₹1.52 करोड़ की ठगी कैसे हुई?
आरोपियों ने शेयर बाज़ार में डॉलर-निवेश पर अधिक रिटर्न का झाँसा देकर पीड़ित को एक फर्जी वेबसाइट पर रजिस्टर कराया। 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹1,52,63,198 ट्रांसफर किए, जिसके बाद उसे रकम निकालने से रोक दिया गया।
रियाज मिर्जा की इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क में क्या भूमिका थी?
रियाज मुख्य रूप से मनी-म्यूल के रूप में काम करता था। वह पहले गिरफ्तार आरोपियों को 3% कमीशन देकर उनसे बैंक खाते खरीदता था और फिर ये खाते फरार आरोपियों को साइबर फ्रॉड की रकम ट्रांसफर करने के लिए उपलब्ध कराता था।
इस मामले में कितने राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं?
राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) पर जाँच में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 318 शिकायतें सामने आईं। सर्वाधिक शिकायतें तमिलनाडु (60), केरल (43), गुजरात (49) और महाराष्ट्र (35) से दर्ज हैं।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं?
रियाज मिर्जा की गिरफ्तारी से पहले अहमदाबाद के मिनेश कुमार सोलंकी (26), अनिल गुप्ता (39) और विकास सिंह भदौरिया (34) को गिरफ्तार किया जा चुका था। पुलिस के अनुसार, अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ जाँच अभी जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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