हनूर एनकाउंटर पर तमिलनाडु का प्रस्ताव कर्नाटक का अपमान — BJP नेता आर. अशोक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार, 19 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव की कड़ी निंदा की, जिसमें चामराजनगर जिले के हनूर वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ का मुद्दा उठाया गया था। इस एनकाउंटर में 15 अगस्त को तीन कथित शिकारियों की मौत हो गई थी। अशोक ने बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह मामला सीधे कर्नाटक से जुड़ा है और इसे राज्य की सीमाओं के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास किया है। यह प्रस्ताव हमारे राज्य का अपमान है। यह कर्नाटक से जुड़ा मामला है और इसे यहीं सुलझाया जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुठभेड़ में मारे गए तीनों व्यक्ति कर्नाटक के मतदाता थे।
अशोक ने तमिलनाडु सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को ₹15 से 20 लाख मुआवजा देने की खबरों पर भी सवाल उठाए और इसे अनुचित बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस घटना को भाषाई विवाद का रूप देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
वन विभाग का पक्ष
सहायक वन संरक्षक मारिस्वामी ने बताया कि 15 अगस्त को सुबह करीब 5 बजे ऑपरेशन के दौरान कथित शिकारियों के एक समूह ने पहले वन कर्मचारियों पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में कर्मचारियों ने आत्मरक्षा में फायरिंग की। उनके अनुसार, इससे पहले की रात वन कर्मियों को जंगल के भीतर टॉर्च की रोशनी और गोली चलने की आवाज की सूचना मिली थी।
मारिस्वामी ने बताया कि वन अधिकारियों ने दो टीमें गठित कीं और कराडिकलगुड्डा पहाड़ी पर चढ़कर संदिग्धों को देखा। चेतावनी दिए जाने के बावजूद संदिग्ध शिकारियों ने गोलीबारी जारी रखी। गोलीबारी रुकने के बाद वन कर्मचारी उस स्थान पर पहुँचे तो तीन लोग गोली लगने से जमीन पर पड़े मिले।
उन्होंने बताया कि वह स्थान संबंधित व्यक्तियों के गाँव से जंगल के भीतर लगभग 5 किलोमीटर दूर था, जबकि पैदल पहुँचने के लिए 7 से 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
बरामदगी और साक्ष्य
वन विभाग ने घटनास्थल और संदिग्धों के बैग से कई सामग्री जब्त की, जिनमें देसी बंदूकें, गोला-बारूद, खाने-पीने का सामान, जूते-चप्पल और शिकार से संबंधित अन्य उपकरण शामिल हैं। मारिस्वामी के अनुसार खाद्य सामग्री की मात्रा से स्पष्ट होता है कि उस समूह ने कथित तौर पर जंगल में कई दिनों तक रहने की पूर्व-योजना बनाई थी।
BJP का आरोप — सरकार छिपा रही है तथ्य
अशोक ने कहा कि घटना के बाद से प्रतिदिन नए दस्तावेज जारी हो रहे हैं, जो वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने घटना के दौरान फरार हुए एक व्यक्ति के कथित तौर पर जारी वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें उस व्यक्ति ने दावा किया कि वह पुलिस के डर से सामने नहीं आया।
अशोक ने आरोप लगाया, 'ये सभी घटनाक्रम बताते हैं कि कर्नाटक सरकार कुछ छिपा रही है।' उनका कहना था कि यदि राज्य सरकार ने शुरुआत में ही पारदर्शी जाँच कराई होती, तो तमिलनाडु को इस मामले में हस्तक्षेप का अवसर नहीं मिलता।
आगे क्या होगा
अशोक ने कर्नाटक सरकार से हनूर एनकाउंटर की व्यापक और स्वतंत्र जाँच का आदेश देने तथा तथ्यों को सार्वजनिक करने की अपील की। यह विवाद अब दो पड़ोसी राज्यों के बीच राजनीतिक तनाव का रूप लेता दिख रहा है, और जब तक कर्नाटक सरकार जाँच की दिशा स्पष्ट नहीं करती, यह मामला और उलझ सकता है।