19 अगस्त 2026
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हनूर एनकाउंटर पर तमिलनाडु का प्रस्ताव कर्नाटक का अपमान — BJP नेता आर. अशोक

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हनूर एनकाउंटर पर तमिलनाडु का प्रस्ताव कर्नाटक का अपमान — BJP नेता आर. अशोक

सारांश

हनूर जंगल में 15 अगस्त को हुई मुठभेड़ अब दो राज्यों के बीच राजनीतिक टकराव बन गई है। तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव को BJP नेता आर. अशोक ने कर्नाटक का अपमान करार दिया और राज्य सरकार पर तथ्य छिपाने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर.
अशोक ने 19 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव को कर्नाटक का अपमान बताया।
15 अगस्त को हनूर वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में तीन कथित शिकारी मारे गए थे।
तमिलनाडु सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को ₹15 से 20 लाख मुआवजा देने की खबरों पर अशोक ने आपत्ति जताई।
सहायक वन संरक्षक मारिस्वामी के अनुसार संदिग्धों ने पहले वन कर्मियों पर गोली चलाई; घटनास्थल से देसी बंदूकें और गोला-बारूद बरामद।
BJP ने कर्नाटक सरकार पर तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हुए व्यापक जाँच की माँग की।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार, 19 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव की कड़ी निंदा की, जिसमें चामराजनगर जिले के हनूर वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ का मुद्दा उठाया गया था। इस एनकाउंटर में 15 अगस्त को तीन कथित शिकारियों की मौत हो गई थी। अशोक ने बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह मामला सीधे कर्नाटक से जुड़ा है और इसे राज्य की सीमाओं के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास किया है। यह प्रस्ताव हमारे राज्य का अपमान है। यह कर्नाटक से जुड़ा मामला है और इसे यहीं सुलझाया जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुठभेड़ में मारे गए तीनों व्यक्ति कर्नाटक के मतदाता थे।

अशोक ने तमिलनाडु सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को ₹15 से 20 लाख मुआवजा देने की खबरों पर भी सवाल उठाए और इसे अनुचित बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस घटना को भाषाई विवाद का रूप देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

वन विभाग का पक्ष

सहायक वन संरक्षक मारिस्वामी ने बताया कि 15 अगस्त को सुबह करीब 5 बजे ऑपरेशन के दौरान कथित शिकारियों के एक समूह ने पहले वन कर्मचारियों पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में कर्मचारियों ने आत्मरक्षा में फायरिंग की। उनके अनुसार, इससे पहले की रात वन कर्मियों को जंगल के भीतर टॉर्च की रोशनी और गोली चलने की आवाज की सूचना मिली थी।

मारिस्वामी ने बताया कि वन अधिकारियों ने दो टीमें गठित कीं और कराडिकलगुड्डा पहाड़ी पर चढ़कर संदिग्धों को देखा। चेतावनी दिए जाने के बावजूद संदिग्ध शिकारियों ने गोलीबारी जारी रखी। गोलीबारी रुकने के बाद वन कर्मचारी उस स्थान पर पहुँचे तो तीन लोग गोली लगने से जमीन पर पड़े मिले।

उन्होंने बताया कि वह स्थान संबंधित व्यक्तियों के गाँव से जंगल के भीतर लगभग 5 किलोमीटर दूर था, जबकि पैदल पहुँचने के लिए 7 से 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

बरामदगी और साक्ष्य

वन विभाग ने घटनास्थल और संदिग्धों के बैग से कई सामग्री जब्त की, जिनमें देसी बंदूकें, गोला-बारूद, खाने-पीने का सामान, जूते-चप्पल और शिकार से संबंधित अन्य उपकरण शामिल हैं। मारिस्वामी के अनुसार खाद्य सामग्री की मात्रा से स्पष्ट होता है कि उस समूह ने कथित तौर पर जंगल में कई दिनों तक रहने की पूर्व-योजना बनाई थी।

BJP का आरोप — सरकार छिपा रही है तथ्य

अशोक ने कहा कि घटना के बाद से प्रतिदिन नए दस्तावेज जारी हो रहे हैं, जो वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने घटना के दौरान फरार हुए एक व्यक्ति के कथित तौर पर जारी वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें उस व्यक्ति ने दावा किया कि वह पुलिस के डर से सामने नहीं आया।

अशोक ने आरोप लगाया, 'ये सभी घटनाक्रम बताते हैं कि कर्नाटक सरकार कुछ छिपा रही है।' उनका कहना था कि यदि राज्य सरकार ने शुरुआत में ही पारदर्शी जाँच कराई होती, तो तमिलनाडु को इस मामले में हस्तक्षेप का अवसर नहीं मिलता।

आगे क्या होगा

अशोक ने कर्नाटक सरकार से हनूर एनकाउंटर की व्यापक और स्वतंत्र जाँच का आदेश देने तथा तथ्यों को सार्वजनिक करने की अपील की। यह विवाद अब दो पड़ोसी राज्यों के बीच राजनीतिक तनाव का रूप लेता दिख रहा है, और जब तक कर्नाटक सरकार जाँच की दिशा स्पष्ट नहीं करती, यह मामला और उलझ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि कर्नाटक सरकार ने खुद पारदर्शी जाँच में इतनी देरी क्यों की — क्योंकि इसी शून्य ने पड़ोसी राज्य को हस्तक्षेप का मौका दिया। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर जो सवाल उठ रहे हैं, वे केवल विपक्ष के आरोप नहीं हैं; फरार व्यक्ति का वीडियो और प्रतिदिन बदलती दस्तावेज़ी कहानी इस मामले को और जटिल बनाती है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनूर एनकाउंटर क्या है और यह कब हुआ?
हनूर एनकाउंटर कर्नाटक के चामराजनगर जिले के हनूर वन क्षेत्र में 15 अगस्त को सुबह करीब 5 बजे हुई एक मुठभेड़ है, जिसमें तीन कथित शिकारी मारे गए। वन अधिकारियों के अनुसार संदिग्धों ने पहले उन पर गोली चलाई, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।
तमिलनाडु विधानसभा ने इस मामले में प्रस्ताव क्यों पास किया?
मुठभेड़ में मारे गए व्यक्तियों के तमिलनाडु से संबंध होने की खबरों के बाद तमिलनाडु विधानसभा ने इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित किया। तमिलनाडु सरकार ने मृतकों के परिवारों को ₹15 से 20 लाख मुआवजा देने की भी घोषणा की बताई जा रही है।
BJP ने तमिलनाडु के प्रस्ताव पर क्या आपत्ति जताई?
कर्नाटक BJP नेता आर. अशोक ने इस प्रस्ताव को कर्नाटक का अपमान बताया और कहा कि यह मामला कर्नाटक से जुड़ा है, इसलिए इसे राज्य के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु के नेताओं को इसे भाषाई मुद्दा न बनाने की चेतावनी भी दी।
वन विभाग ने घटनास्थल से क्या बरामद किया?
सहायक वन संरक्षक मारिस्वामी के अनुसार घटनास्थल और संदिग्धों के बैग से देसी बंदूकें, गोला-बारूद, खाने-पीने का सामान, जूते-चप्पल और शिकार से जुड़े उपकरण बरामद किए गए। खाद्य सामग्री की मात्रा से संकेत मिलता है कि समूह ने कई दिनों तक जंगल में रहने की योजना बनाई थी।
BJP ने कर्नाटक सरकार से क्या माँग की है?
आर. अशोक ने कर्नाटक सरकार से हनूर एनकाउंटर की व्यापक और पारदर्शी जाँच का आदेश देने तथा सभी तथ्यों को सार्वजनिक करने की अपील की है। उनका आरोप है कि सरकार की शुरुआती निष्क्रियता ने ही तमिलनाडु को इस मामले में हस्तक्षेप का अवसर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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