4 अक्टूबर 2026
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योगी आदित्यनाथ बोले — जातीय विभाजन राष्ट्र के प्रति अपराध, चाहिए 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत'

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योगी आदित्यनाथ बोले — जातीय विभाजन राष्ट्र के प्रति अपराध, चाहिए 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत'

सारांश

लखनऊ में शिक्षक कार्यशाला से योगी आदित्यनाथ का सीधा संदेश — जातीय विभाजन राष्ट्र के प्रति अपराध है। गुलामी के दौर की विभाजनकारी प्रवृत्ति आज भी जारी है और शिक्षकों को इसे विफल करना होगा। 2047 के विकसित भारत का रास्ता 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' से होकर जाता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में कहा — जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज बाँटना राष्ट्र के प्रति अपराध है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष पर आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में उन्होंने 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश में 2017 से 2026 के बीच 275 करोड़ पौधे लगाए गए; इस वर्ष 35 करोड़ पौधारोपण हुआ।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएँ जुड़े हैं।
कार्यक्रम में टॉप-10 स्कूलों को सम्मानित किया गया, जिनमें सीतापुर, लखनऊ, रायबरेली, गाजियाबाद, अमेठी, बुलंदशहर, चित्रकूट और मुजफ्फरनगर के स्कूल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से 2047 के विकसित भारत के लिए युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में स्पष्ट कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को तोड़ना राष्ट्र और भारत माता के प्रति सीधा अपराध है। उन्होंने कहा कि देश को जातीय खेमों में लड़ता हुआ भारत नहीं, बल्कि 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' चाहिए। यह संदेश उन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में दिया।

कार्यक्रम और संदर्भ

यह कार्यशाला डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में आयोजित हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हुआ और मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर इसका विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गायत्री परिवार ने यज्ञ के माध्यम से समाज को जोड़कर सामाजिक एकता का आदर्श प्रस्तुत किया। पंडित श्रीराम शर्मा ने संगठन को अपना नाम देने की बजाय विचार को प्रधानता दी — और यही कारण है कि 100 वर्षों की साधना के बाद भी यह संस्था जीवंत है।

राष्ट्रीय एकता पर मुख्य संदेश

योगी आदित्यनाथ ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि गुलामी के दौर में भी एक वर्ग समाज को बाँटने में लगा था, जबकि दूसरा वर्ग समाज को जोड़कर स्वाधीनता की हुंकार भर रहा था। उन्होंने चेताया कि आज भी वही विभाजनकारी प्रवृत्ति अलग-अलग रूपों में दिखाई दे रही है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे ऐसी विभाजनकारी ताकतों को सफल न होने दें।

मुख्यमंत्री ने 1923 में गीता प्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि रास्ते भले अलग थे, किंतु तीनों संस्थाओं ने जनचेतना जगाने और समाज को सनातन मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।

शिक्षकों की भूमिका और भारत को विश्वगुरु बनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज की चेतना और 'युग निर्माता' बताया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक जागृत होकर ईमानदारी से अपने दायित्व निभाएँ, तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने भारत की गुरुकुल परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि इसी परंपरा ने तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय, तथा चाणक्य-चंद्रगुप्त और महर्षि सांदीपनि-कृष्ण जैसी गुरु-शिष्य जोड़ियाँ दीं।

उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का जुड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को सही मार्गदर्शन दिया जाए तो आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनेगा।

पर्यावरण और सामाजिक समता पर जोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में 2017 से 2026 के बीच 275 करोड़ पौधे लगाए गए हैं, जिनमें इस वर्ष अकेले 35 करोड़ पौधारोपण हुआ। उन्होंने नदियों को मानव शरीर की धमनियों के समान बताते हुए कहा कि जीवनदायिनी नदियों को अविरल और निर्मल बनाना होगा। संयुक्त परिवारों के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि परिवारों का सिकुड़ना बिखराव और तनाव बढ़ा रहा है।

सम्मान और अन्य वक्ता

कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूलों को सम्मानित किया गया, जिनमें सीतापुर इंटर कॉलेज, लखनऊ पब्लिक स्कूल, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल और मुजफ्फरनगर का एमजी पब्लिक स्कूल सहित अन्य शामिल हैं। विधायक राजेश्वर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शिक्षा का बजट बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर घटी है। डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ और स्वार्थ आज मनुष्य की आंतरिक चुनौतियाँ हैं और भारतीय संस्कृति के मूल भाव को नई पीढ़ी में स्थापित करना ही भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री ने 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की याद दिलाते हुए शिक्षकों और गायत्री परिवार से अगले 100 वर्षों का संकल्प लेने का आह्वान किया — यह संदेश उन शक्तियों के लिए स्पष्ट चेतावनी भी थी जो सामाजिक विभाजन को अपना राजनीतिक हथियार बनाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ पिछड़े और दलित वर्गों के बीच यह प्रश्न बना हुआ है कि क्या सामाजिक एकता की बात सामाजिक न्याय की माँगों को नेपथ्य में धकेलने का माध्यम तो नहीं बन रही। शिक्षकों से 'विभाजनकारी ताकतों को रोकने' का आह्वान सुनने में नैतिक लगता है, लेकिन यह तय करने की शक्ति किसके पास होगी कि 'विभाजनकारी' कौन है — यही असली जवाबदेही का सवाल है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगी आदित्यनाथ ने 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' का आह्वान कहाँ और क्यों किया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार की शताब्दी वर्ष पर आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में यह आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बाँटना राष्ट्र के प्रति अपराध है और देश को एकजुट, समृद्ध भारत चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों से क्या अपेक्षा जताई?
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युग निर्माता बताते हुए कहा कि यदि वे ईमानदारी से अपने दायित्व निभाएँ तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने शिक्षकों से 2047 के विकसित भारत के लिए युवा पीढ़ी को सही दिशा देने और विभाजनकारी ताकतों को विफल करने का आह्वान किया।
गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष पर योगी ने क्या कहा?
योगी ने कहा कि गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा ने संगठन को अपना नाम देने की बजाय विचार को प्राथमिकता दी, इसीलिए यह 100 वर्षों बाद भी जीवंत है। उन्होंने 1923 में गीता प्रेस, 1925 में RSS और 1926 में गायत्री परिवार की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि तीनों ने जनचेतना जगाने और समाज को सनातन मूल्यों से जोड़ने का काम किया।
उत्तर प्रदेश में पौधारोपण अभियान के बारे में मुख्यमंत्री ने क्या बताया?
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में 275 करोड़ पौधे लगाए गए हैं और इस वर्ष अकेले 35 करोड़ पौधारोपण हुआ। उन्होंने नदियों को मानव शरीर की धमनियों के समान बताते हुए उन्हें अविरल और निर्मल बनाने की ज़रूरत पर बल दिया।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा क्या है और इसमें कितने छात्र जुड़े हैं?
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल भाव को स्थापित करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इससे 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएँ जुड़ चुके हैं, और कार्यशाला में इस परीक्षा के टॉप-10 स्कूलों को सम्मानित किया गया।
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