29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सनातन धर्म की एकता ही असली ताकत है: गोरखपुर में बोले CM योगी आदित्यनाथ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सनातन धर्म की एकता ही असली ताकत है: गोरखपुर में बोले CM योगी आदित्यनाथ

सारांश

गोरखनाथ मंदिर के मंच से CM योगी का संदेश सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं था — यह सनातन समाज को एकजुट करने का आह्वान था। 140 करोड़ की एकजुट हुंकार और अयोध्या के गौरव को जोड़ते हुए उन्होंने विभाजन को पराजय का पर्याय बताया।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 29 सितंबर को गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में सनातन धर्म की एकता को देश की सुरक्षा और मजबूती का आधार बताया।
यह कार्यक्रम महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सप्त दिवसीय समारोह का हिस्सा था।
योगी ने कहा कि 140 करोड़ लोग एकजुट हों तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती; अलग-अलग स्वर पराजय का कारण बनते हैं।
1932 में महंत दिग्विजयनाथ द्वारा स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद आज 50 से 55 संस्थाएँ संचालित करती है।
1949 में रामलला प्रकटीकरण की रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी।
गोरक्षपीठ में जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं — सभी एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार, 29 सितंबर को गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही देश की सुरक्षा और मजबूती निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंथ और संप्रदाय की उपासना पद्धतियाँ भले ही अलग हों, समस्त समाज का कल्याण वृहद सनातन धर्म की एकजुटता में ही संभव है।

मुख्य संबोधन और संदेश

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, 'यदि 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरें तो दुनिया की कोई भी ताकत उनके सामने नहीं ठहर सकती।' उन्होंने चेतावनी दी कि अलग-अलग गति प्रगति नहीं बल्कि दुर्गति का कारण बनती है और अलग-अलग स्वर ताकत नहीं, पराजय को आमंत्रित करते हैं।

उन्होंने अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्हें सनातन का वैभव बर्दाश्त नहीं, वे दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने रामभक्तों से आग्रह किया कि जिस तरह हनुमान जी ने कालनेमि को पहचाना था, उसी तरह भ्रम फैलाने वालों को भी पहचानना होगा।

पुण्यतिथि समारोह और ऐतिहासिक संदर्भ

यह व्याख्यान युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित सप्त दिवसीय समारोह का हिस्सा था। मुख्यमंत्री ने दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया।

योगी ने बताया कि महंत दिग्विजयनाथ भारत की आज़ादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं मानते थे — उनके लिए सांस्कृतिक स्वतंत्रता भी उतनी ही आवश्यक थी। उन्होंने 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस की सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी।

शिक्षा और सामाजिक योगदान

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था, तब महंत दिग्विजयनाथ ने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। महाराणा प्रताप को आदर्श बनाने के पीछे स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म का भाव था।

आज इस परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएँ संचालित हैं, जिनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में भी महंत दिग्विजयनाथ की महत्वपूर्ण भूमिका रही — उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए मठ की संपत्ति और दो संस्थाएँ बिना किसी श्रेय की चिंता किए सरकार को सौंप दीं।

योगी ने यह भी रेखांकित किया कि महंत दिग्विजयनाथ ने उस दौर में बालिका शिक्षा के लिए विद्यालय और महाविद्यालय स्थापित किए, और गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने तथा बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही।

सनातन एकता और गोरक्षपीठ की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और विंध्यवासिनी धाम का भव्य स्वरूप सामने आया है। उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन आयोजनों ने विश्व के सामने सनातन परंपरा का सामर्थ्य प्रस्तुत किया।

योगी ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होते हुए भी पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहाँ जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता — सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं और सभी आचार्यों व संतों को समान सम्मान मिलता है। महंत दिग्विजयनाथ ने बिखरे नाथ संप्रदाय को अखिल भारतीय भेष बारह पंथ योगी महासभा के रूप में एकजुट किया था।

आगे की राह

मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों आचार्यों ने जिन विषयों के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाना आवश्यक है। गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद इस दिशा में दोनों आचार्यों के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं। 500 वर्षों बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण को उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों के लिए गौरव का क्षण बताया। सनातन समाज की एकजुटता को और सुदृढ़ करने की दिशा में यह समारोह एक प्रेरणा-स्रोत बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

महाकुंभ और काशी विश्वनाथ धाम को एक सूत्र में पिरोकर वे जो आख्यान गढ़ रहे हैं, वह 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। 'भ्रम फैलाने वालों को पहचानो' जैसे वाक्य सुनने में आध्यात्मिक लगते हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इन्हें विपक्ष पर सीधे निशाने के रूप में पढ़ते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि गोरक्षपीठ की सामाजिक-शैक्षणिक विरासत — 50 से अधिक संस्थाएँ, बालिका शिक्षा, चिकित्सा सेवाएँ — इस राजनीतिक संदेश को एक विश्वसनीय सांस्कृतिक आधार देती है जिसे नज़रअंदाज़ करना विश्लेषण को अधूरा छोड़ देता है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM योगी ने गोरखपुर में सनातन एकता पर क्या कहा?
CM योगी आदित्यनाथ ने 29 सितंबर को गोरखनाथ मंदिर में कहा कि सनातन धर्म की एकता में ही देश की सुरक्षा और मजबूती है। उन्होंने कहा कि यदि 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरें तो दुनिया की कोई ताकत सामने नहीं ठहर सकती।
गोरखनाथ मंदिर में यह समारोह किस अवसर पर आयोजित हुआ?
यह सप्त दिवसीय समारोह युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। CM योगी ने इस अवसर पर दोनों आचार्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
महंत दिग्विजयनाथ का अयोध्या आंदोलन में क्या योगदान था?
1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ सक्रिय भूमिका में थे। इसकी रणनीति देवीपाटन में महंत दिग्विजयनाथ, महाराजा बलरामपुर और तत्कालीन गोंडा जिलाधिकारी केके नायर के बीच बनी थी।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कब और क्यों हुई?
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना 1932 में महंत दिग्विजयनाथ ने की थी, जब देश गुलाम था और संसाधनों का अभाव था। आज इस परिषद के अंतर्गत 50 से 55 संस्थाएँ संचालित हैं, जिनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और अस्पताल शामिल हैं।
गोरक्षपीठ सनातन धर्म की एकता में किस तरह योगदान देती है?
CM योगी के अनुसार गोरक्षपीठ नाथ परंपरा की पीठ होते हुए भी पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहाँ जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता और सभी जातियों के लोग एक पंक्ति में अन्न ग्रहण करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले