महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि: CM योगी बोले — सामाजिक समता से एकजुट हुआ हिंदू समाज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार, 30 सितंबर को गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित पुण्यतिथि समारोह में कहा कि महंत अवैद्यनाथ ने सामाजिक समता को आधार बनाकर बिखरी हुई हिंदू शक्ति को एकसूत्र में पिरोने का जीवनपर्यंत प्रयास किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू समाज की असली ताकत उसकी आत्म-परिमार्जन की क्षमता में निहित है।
समारोह का संदर्भ
यह कार्यक्रम युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित 'सप्त दिवसीय पुण्यतिथि समारोह' का हिस्सा था। 23 से 29 सितंबर तक श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान-यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसके साथ देश, काल और समाज से जुड़े समसामयिक विषयों पर वैचारिक संगोष्ठियाँ भी आयोजित की गईं। देश के विभिन्न हिस्सों से संत और विद्वान इस आयोजन में सम्मिलित हुए।
दोनों संतों की विरासत पर CM योगी का संबोधन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ हिंदू समाज की एकता के लिए प्रचंड हिंदुत्व के वेग को आगे बढ़ाने के पक्षधर थे, जबकि महंत अवैद्यनाथ ने सहभोज जैसे अभियानों के माध्यम से सामाजिक समता के आधार पर समाज को जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में रामलला का प्रकटीकरण हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सानिध्य में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 'राष्ट्रीय राम जन्मभूमि मुक्ति समिति' गठित की, जिसका नेतृत्व महंत अवैद्यनाथ ने संभाला।
योगी ने इसे गुरु परंपरा का विस्तार बताते हुए कहा कि समय, समाज और राष्ट्र की आवश्यकता के अनुरूप विचारों को लोकोपयोगी बनाना ही महापुरुषों का गुण है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ इसी चिंतन को आगे बढ़ाती रहेगी।
शिक्षा और स्वावलंबन में योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीयता के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थाएँ महंत दिग्विजयनाथ की दूरदृष्टि थी। महंत अवैद्यनाथ ने शिक्षा को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर विशेष बल दिया। बालिकाओं को पढ़ाई के साथ सिलाई-कढ़ाई जैसे व्यावसायिक कौशल सिखाने की व्यवस्था की गई और खेल प्रतिभाओं के लिए छात्रवृत्ति का प्रावधान किया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 1977 में प्रताप आश्रम और बाद में अन्य छात्रावास स्थापित किए गए।
अन्य वक्ताओं की प्रतिक्रियाएँ
राजस्थान के विधायक महंत बालकनाथ ने कहा कि दोनों ब्रह्मलीन संतों ने नाथ संप्रदाय और गोरक्षपीठ की पहचान देशभर में स्थापित की और मुख्यमंत्री योगी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमलाचार्य ने कहा कि महंत अवैद्यनाथ के प्रयासों का परिणाम है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हुआ। कुशीनगर सांसद विजय दुबे ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को पाँच सौ वर्षों की प्रतीक्षा के फलीभूत होने से जोड़ा।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह ने कहा कि दोनों संतों ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से पूर्वांचल में शिक्षा की अलख जगाई। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने कहा कि दोनों संतों ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और कर्तव्यबोध का आधार बनाया।
RSS के गोरक्ष प्रांत के प्रांत संघचालक महेंद्र अग्रवाल ने कहा कि गोरक्षपीठ और संघ के विचारों में सदैव सामंजस्य रहा है। महापौर मंगलेश श्रीवास्तव ने शिक्षा क्षेत्र में दोनों संतों के योगदान को अनुकरणीय बताया।
कार्यक्रम की विशेष झलकियाँ
कार्यक्रम की शुरुआत महाराणा प्रताप कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं की सरस्वती वंदना से हुई। डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी ने वैदिक मंगलाचरण किया, मृत्युंजय उपाध्याय व गौरव तिवारी ने गोरक्ष अष्टक और डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने महंत अवैद्यनाथ स्तोत्र प्रस्तुत किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित बाबू रामजन्म सिंह की पुस्तक 'जटायु' का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री योगी ने स्थिरता को जीवन में सिद्धि का सबसे बड़ा मंत्र बताते हुए आह्वान किया कि जिन महापुरुषों का गुणगान करते हैं, उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का भी प्रयास होना चाहिए। गोरक्षपीठ की यह परंपरा आगे भी सामाजिक एकता और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में सक्रिय रहेगी।