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क्या हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव ही श्रीमद्भागवत कथा का वास्तविक मर्म है? : सीएम योगी

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क्या हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव ही श्रीमद्भागवत कथा का वास्तविक मर्म है? : सीएम योगी

मुख्य बातें

हर परिस्थिति में धर्म के प्रति समर्पण बनाए रखें।
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान और भक्ति का स्रोत है।
भारत की संस्कृति और परंपराओं का महत्व समझें।
कथा सुनने से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
गोरखपुर में यह कथा लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।

गोरखपुर, 10 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर परिस्थिति में सनातन धर्म के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखना, यही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का वास्तविक मर्म है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के ज्ञान का बोध कराने वाली, भक्ति से जोड़ने वाली और मुक्ति का मार्ग दिखाने वाली कथा है।

मुख्यमंत्री योगी ने गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं एवं राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि समारोह के उपलक्ष्य में बुधवार शाम श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के विराम सत्र पर अपने विचार व्यक्त किए।

मंदिर के दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण करने और व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद सीएम योगी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पहली बार पांच हजार वर्ष पूर्व स्वामी शुकदेव जी ने महाराजा परीक्षित को मृत्यु के भय से मुक्त करने के लिए सुनाई थी। तब से यह कथा कोटि-कोटि सनातन धर्मावलंबियों की मुक्ति का माध्यम बन रही है।

सीएम योगी ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा उद्घोष करती है कि भारत में जन्म लेना दुर्लभ है। उसमें भी मनुष्य रूप में जन्म लेना और भी दुर्लभ है। सनातन भारत ने ज्ञान, भक्ति और मुक्ति के दाता, जीवन के रहस्यों का उद्घाटन करने वाली श्रीमद्भागवत कथा का उपहार दिया है।

उन्होंने कहा कि कथा का वास्तविक मर्म यह है कि हम हर हाल में अपने धर्म और देश के प्रति अडिग रहें। किसी भी परिस्थिति में बिना झुके, बिना रुके, बिना डिगे सनातन और भारत के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखें। व्यासपीठ पर विराजमान कथा व्यास, परिधान पीठ गोपाल मंदिर श्रीअयोध्याधाम से पधारे जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इसका आनंद यहां आए श्रद्धालुओं के साथ मीडिया के जरिए लाखों लोगों ने प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामदिनेशाचार्य जी रामानंदाचार्य परंपरा से आते हैं। अगले वर्ष उनके श्रीमुख से यहां श्रीराम कथा का भी श्रवण कराया जाएगा। कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाया गया है कि भारत की संस्कृति और परंपराएं हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हैं। यह समय की मांग है कि हम अपने धर्म और संस्कृति के प्रति सजग रहें। यह संदेश हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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