चामराजनगर एनकाउंटर: विधानसभा में भाजपा का हंगामा, अशोक बोले — 'सरकार ने हत्याएं की हैं'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में सोमवार, 17 अगस्त 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चामराजनगर जिले के रिजर्व फॉरेस्ट में तीन शिकारियों की एनकाउंटर में हुई मौत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने एनकाउंटर की आड़ में हत्याएं की हैं और सदन में तत्काल बयान देने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। उन्होंने दावा किया कि मारे गए लोगों के परिवारों और स्थानीय किसानों ने ऑपरेशन की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अशोक ने यह भी कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक ने इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है और कर्नाटक में रहने वाले लाखों तमिल भाषी नागरिकों को सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए।
भाजपा के वरिष्ठ विधायक वी. सुनील कुमार ने सवाल किया, 'घटना को 24 घंटे बीत चुके हैं, तीन लोगों की जान जा चुकी है और सरकार बयान नहीं देना चाहती — यह कैसे हो सकता है?' उन्होंने माँग की कि वन एवं पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सदन में आकर स्पष्टीकरण दें।
सरकार की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसी भी मामले से भाग नहीं रही। उन्होंने कहा, 'हम बयान देंगे, कोई समस्या नहीं है। पहले नोटिस दें।' परमेश्वर ने यह भी स्पष्ट किया कि सदन में किसी मुद्दे को उठाने से पहले नोटिस देना प्रक्रियागत आवश्यकता है।
विधानसभा अध्यक्ष जीएस पाटिल ने बताया कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने सुबह उनसे संपर्क किया था और प्रश्नकाल के बाद सदन में बयान देने की बात कही थी। अध्यक्ष ने मंत्री को प्रश्नकाल के बाद बयान देने का निर्देश दिया था।
15 अगस्त का एनकाउंटर: क्या हुआ था
15 अगस्त 2026 को कावेरी वाइल्डलाइफ सेंचुरी के शंघ्या वन क्षेत्र में अवैध शिकार विरोधी अभियान के दौरान वन कर्मियों ने तीन शिकारियों को गोली मार दी। वन अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से देसी बंदूक और हिरण का मांस जब्त किया गया। अधिकारियों का कहना है कि शिकारियों ने पहले वन कर्मियों पर गोली चलाने की कोशिश की, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मारे गए तीनों व्यक्ति आदतन अपराधी थे और संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से घुसे थे। हालांकि, इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर तीव्र विरोध प्रदर्शन हुए, वन कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई और न्यायिक जाँच की माँग उठाई गई।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में मानव-वन्यजीव संघर्ष और वन अधिकारों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। भाजपा सदस्यों ने सदन में विरोध-प्रदर्शन किया और तत्काल बयान की माँग पर अड़े रहे। अशोक ने यह भी पूछा कि अब तक किसी भी पुलिस या वन अधिकारी को निलंबित क्यों नहीं किया गया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के सदन में बयान देने के बाद ही इस विवाद की दिशा स्पष्ट होगी। न्यायिक जाँच की माँग और एफआईआर के मद्देनज़र यह मामला अदालत तक भी पहुँच सकता है। आने वाले दिनों में सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है, खासकर तब जब पड़ोसी राज्य तमिलनाडु ने भी इस मामले में रुचि दिखाई है।