17 अगस्त 2026
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चामराजनगर मुठभेड़: कर्नाटक सरकार का बचाव — वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में चलाई गोली, 3 कथित शिकारी ढेर

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चामराजनगर मुठभेड़: कर्नाटक सरकार का बचाव — वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में चलाई गोली, 3 कथित शिकारी ढेर

सारांश

चामराजनगर के जंगल में 15 अगस्त की सुबह हुई मुठभेड़ ने कर्नाटक को दो मोर्चों पर खड़ा कर दिया — एक तरफ वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी, दूसरी तरफ मारे गए परिवारों के सवाल। सरकार आत्मरक्षा का तर्क दे रही है, परिवार किसान होने का दावा कर रहे हैं।

मुख्य बातें

15 अगस्त 2026 की सुबह चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में हुई मुठभेड़ में वन विभाग की जवाबी फायरिंग में 3 कथित शिकारी मारे गए।
वन और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विधानसभा में कहा कि वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, कोई दुर्भावना नहीं थी।
ऑपरेशन 14 अगस्त रात 8 बजे शुरू होकर 15 अगस्त सुबह 5:30 बजे तक चला; मौके से 34.5 किग्रा संदिग्ध वन्यजीव मांस बरामद।
तीनों व्यक्ति रिजर्व फॉरेस्ट में लगभग 8 किलोमीटर अंदर तक घुसे थे; करीब 10 वनकर्मी भी चोटिल हुए।
अशोक ने जवाबदेही की माँग की; परिवारों ने शिकारी होने के दावे को नकारा।
फरार कथित शिकारी महिमा दास की तलाश जारी है।

कर्नाटक के चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में 15 अगस्त 2026 की सुबह हुई मुठभेड़ में वन विभाग की जवाबी फायरिंग में तीन कथित शिकारी मारे गए। राज्य सरकार ने सोमवार को विधानसभा में स्पष्ट किया कि वनकर्मियों ने शिकारियों की गोलीबारी के जवाब में आत्मरक्षा में हथियार चलाए थे और इस कार्रवाई के पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी।

मुठभेड़ का पूरा घटनाक्रम

14 अगस्त की रात करीब 8 बजे वन विभाग को सूचना मिली कि हथियारबंद शिकारी कावेरी वाइल्डलाइफ रिजर्व के हनूर सब-डिविजन के शाग्या इलाके में घुस आए हैं। विभाग ने तत्काल दो टीमें गठित कीं, जो दो वाहनों से उस क्षेत्र में पहुँचीं और हनूर फॉरेस्ट रेंज में तलाशी अभियान शुरू किया।

15 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे टीमों को जंगल के भीतर टॉर्च की रोशनी दिखी। वे उस दिशा में आगे बढ़े, जो गाँव की सीमा से लगभग पाँच किलोमीटर दूर थी। कराडिकल्लू इलाके में पहुँचने पर वनकर्मियों ने देखा कि कुछ लोग बड़ी चट्टानों की आड़ लेकर उन पर गोलियाँ चला रहे हैं।

वन और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विधानसभा में बताया कि शिकारी ऊँची जगह पर मोर्चा जमाए हुए थे और वनकर्मियों पर लगातार फायरिंग कर रहे थे। जवाबी गोलीबारी में शिकारियों को कमर के ऊपर गोलियाँ लगीं। घायलों की चीखें सुनकर वनकर्मी उनकी ओर बढ़े और तीन लोगों को जमीन पर पड़ा पाया। उन्हें तत्काल कोल्लेगल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ तीनों की मौत हो गई। बाद में शव मैसूरु के मुर्दाघर भेजे गए। यह ऑपरेशन 15 अगस्त की सुबह 5:30 बजे तक चला।

सरकार की सफाई और मंत्री का बयान

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा, 'गोलीबारी के पीछे कोई गलत इरादा या मकसद नहीं था।' उन्होंने कहा कि वन अधिकारियों को अपनी जान बचाने के लिए हथियार इस्तेमाल करने का कानूनी अधिकार है और सरकार इस घटना पर विस्तृत बयान देने को तैयार है।

मंत्री ने यह भी बताया कि मारे गए तीनों व्यक्ति रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर लगभग आठ किलोमीटर तक घुसे हुए थे और उनके पास वहाँ प्रवेश की कोई अनुमति नहीं थी। ऑपरेशन के दौरान वन विभाग को मौके से लगभग 34.5 किलोग्राम संदिग्ध वन्यजीव मांस भी बरामद हुआ।

परिवारों के इस दावे को कि वे मवेशियों की तलाश में जंगल गए थे, रेड्डी ने खारिज करते हुए कहा कि उस इलाके में कोई मृत मवेशी नहीं मिला। मुठभेड़ में लगभग 10 वनकर्मी भी चोटिल हुए, जिनका इलाज किया गया। घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और जवाबदेही की माँग

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने विधानसभा में सरकार के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'लोग सरकार के दावों पर सवाल उठा रहे हैं। जिन लोगों को गोली मारी गई, उन्हें दूर की जगह क्यों ले जाया गया?' अशोक ने मौतों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की।

मौके से फरार हुए एक अन्य कथित शिकारी की पहचान महिमा दास के रूप में की गई है, जिसकी तलाश जारी है।

परिवारों का विरोध और विवाद

मारे गए तीनों व्यक्तियों के परिवारों ने वन विभाग के इस दावे को चुनौती दी है कि वे आदतन शिकारी थे। परिवारों का कहना है कि वे किसान थे और किसी अन्य कारण से जंगल में गए थे, न कि शिकार के लिए। यह विवाद घटना की जाँच और जवाबदेही के सवाल को और जटिल बनाता है।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में वन्यजीव संरक्षण और आदिवासी-वनाधिकार के बीच टकराव की घटनाएँ लगातार सुर्खियों में हैं। मामले की जाँच के नतीजे और अदालत में इसकी परिणति आगे की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 34.5 किलोग्राम मांस की बरामदगी और परिवारों के 'किसान' दावे के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है। असली सवाल यह है कि जब घायलों को 'दूर की जगह' ले जाया गया — जैसा विपक्ष ने उठाया — तो प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। वन्यजीव संरक्षण और आदिवासी-ग्रामीण अधिकारों के बीच यह टकराव नया नहीं है, लेकिन हर बार जब मौतें होती हैं, तो पारदर्शी जाँच ही एकमात्र रास्ता है — राजनीतिक बयानबाजी नहीं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चामराजनगर मुठभेड़ में क्या हुआ था?
15 अगस्त 2026 की सुबह कावेरी वाइल्डलाइफ रिजर्व के हनूर सब-डिविजन में वन विभाग की टीमों और कथित शिकारियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें जवाबी फायरिंग में तीन कथित शिकारी मारे गए और लगभग 10 वनकर्मी चोटिल हुए। मौके से 34.5 किलोग्राम संदिग्ध वन्यजीव मांस भी बरामद हुआ।
कर्नाटक सरकार ने मुठभेड़ पर क्या कहा?
वन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने विधानसभा में कहा कि वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई क्योंकि शिकारी ऊँची जगह से लगातार फायरिंग कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी और सरकार विस्तृत बयान देने को तैयार है।
मारे गए लोगों के परिवारों का क्या कहना है?
परिवारों ने वन विभाग के 'आदतन शिकारी' वाले दावे को सिरे से नकारा है। उनका कहना है कि मारे गए व्यक्ति किसान थे और शिकार से संबंधित किसी काम के लिए नहीं, बल्कि अन्य कारणों से जंगल में गए थे।
विपक्ष ने इस मामले में क्या सवाल उठाए हैं?
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने विधानसभा में पूछा कि घायलों को दूर की जगह क्यों ले जाया गया और मौतों के लिए जवाबदेही कौन तय करेगा। उन्होंने सरकार के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जाँच की माँग की।
इस मुठभेड़ में कितने वनकर्मी शामिल थे और क्या कोई गिरफ्तारी हुई?
वन विभाग ने दो टीमें गठित की थीं जो दो वाहनों से मौके पर पहुँची थीं। मुठभेड़ में लगभग 10 वनकर्मी चोटिल हुए। घटना से जुड़ा एक कथित शिकारी महिमा दास फरार है और उसकी तलाश जारी है; मामला दर्ज कर लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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