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चामराजनगर: शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में 10 एकड़ जंगल जला, वन विभाग को प्रतिशोधी आगजनी का संदेह

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चामराजनगर: शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में 10 एकड़ जंगल जला, वन विभाग को प्रतिशोधी आगजनी का संदेह

सारांश

चामराजनगर के शिलुबेपुरा वन में 10 एकड़ जली — लेकिन यह महज़ जंगल की आग नहीं है। तीन शिकारियों की मुठभेड़ के बाद अवैध शिकार विरोधी शिविरों पर जिलेटिन विस्फोटक और अब आगजनी — वन विभाग इसे एक सुनियोजित प्रतिशोध मान रहा है, जिसके तार बेंगलुरु तक जुड़े बताए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

20 अगस्त को चामराजनगर के शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ जंगल आग से जल गया।
वन अधिकारियों को संदेह है कि यह हनूर मुठभेड़ के बाद की प्रतिशोधी कार्रवाई है, जिसमें तीन संदिग्ध शिकारियों को मार गिराया गया था।
कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य के अवैध शिकार विरोधी शिविरों पर कथित तौर पर जिलेटिन विस्फोटकों से भी हमला किया गया।
वन विभाग के डेटा के अनुसार, 2011 से अब तक 3,200 से अधिक अवैध शिकार के मामले दर्ज हो चुके हैं।
शिकारी गिरोह कथित तौर पर बेंगलुरु और अन्य महानगरों से आदेश पर वन्यजीव मांस व खाल की आपूर्ति करते हैं।
विपक्ष और स्थानीय समूहों ने हनूर मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की माँग की है।

चामराजनगर जिले के कोल्लेगल तालुका के शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में 20 अगस्त को लगभग 10 एकड़ वन भूमि आग की चपेट में आ गई। वन अधिकारियों को संदेह है कि यह आग जानबूझकर लगाई गई है — और यह घटना उस मुठभेड़ के ठीक कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें हनूर वन क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों ने कथित तौर पर आत्मरक्षा में तीन संदिग्ध शिकारियों को मार गिराया था।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में लगी इस आग को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में स्थित अवैध शिकार विरोधी शिविरों (एपीसी) को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या आगजनी और शिविरों पर हमले एक ही सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं।

चिंताएँ तब और बढ़ गईं जब कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित अवैध शिकार विरोधी शिविरों को कथित तौर पर जिलेटिन विस्फोटकों से निशाना बनाया गया। अधिकारियों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य वन कर्मियों में भय पैदा करना और अभ्यारण्य में चल रहे अवैध शिकार विरोधी अभियानों को पटरी से उतारना है।

हनूर मुठभेड़ की पृष्ठभूमि

हनूर वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के बाद से यह पूरा इलाका तनाव में है। विपक्षी दलों और स्थानीय समूहों ने तीनों मृतकों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। गौरतलब है कि यह मुठभेड़ उस समय हुई जब वन विभाग ने कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा के पास हनूर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय शिकारियों के एक बड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाई थी।

विभाग द्वारा एकत्र की गई जानकारी के अनुसार, ये शिकारी गिरोह कथित तौर पर माँग के आधार पर वन्यजीवों का मांस और खाल की आपूर्ति करते हैं। कथित तौर पर इन गिरोहों को बेंगलुरु और देश के अन्य महानगरों से आदेश मिलते हैं।

अवैध शिकार का व्यापक संकट

वन विभाग ने 2011 से वन्यजीव शिकार के मामलों का डेटा एकत्र किया है। इस अवधि में कथित तौर पर 3,200 से अधिक अवैध शिकार के मामले दर्ज किए गए हैं — एक आँकड़ा जो इस क्षेत्र में शिकार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है।

सरकार और वन विभाग की प्रतिक्रिया

अधिकारियों ने बताया कि वन विभाग अवैध शिकार में शामिल लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की योजना बना रहा है। आगजनी और विस्फोटकों के उपयोग की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किए जाने की संभावना है।

क्या होगा आगे

वन विभाग आगजनी, शिविरों पर हमलों और शिकारियों के नेटवर्क के बीच संभावित कड़ी की जांच जारी रखे हुए है। विपक्ष की माँग पर हनूर मुठभेड़ की जांच का दायरा भी तय होना बाकी है। आने वाले दिनों में कर्नाटक सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह सवाल उठाते हैं कि क्या मौजूदा सुरक्षा ढाँचा पर्याप्त है। दूसरी ओर, हनूर मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की माँग को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — जवाबदेही और वन-सुरक्षा दोनों एक साथ ज़रूरी हैं। 2,200 से अधिक मामलों के बावजूद नेटवर्क का बेंगलुरु तक फैला होना यह भी दर्शाता है कि जब तक माँग-पक्ष पर कार्रवाई नहीं होती, जंगल में तैनाती बढ़ाना अधूरा उपाय ही रहेगा।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चामराजनगर के शिलुबेपुरा वन में आग कब और कितने क्षेत्र में लगी?
20 अगस्त को चामराजनगर जिले के कोल्लेगल तालुका के शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ वन भूमि आग की चपेट में आई। वन अधिकारियों को संदेह है कि यह आग जानबूझकर लगाई गई है।
वन विभाग को इस आगजनी के पीछे प्रतिशोध का संदेह क्यों है?
यह आग हनूर वन क्षेत्र में उस मुठभेड़ के कुछ दिनों बाद लगी, जिसमें वन कर्मियों ने कथित तौर पर आत्मरक्षा में तीन संदिग्ध शिकारियों को मार गिराया था। अधिकारियों का मानना है कि आगजनी और शिविरों पर हमले वन कर्मियों को डराने और अभियान बाधित करने की कोशिश है।
कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य के शिविरों पर क्या हमला हुआ?
कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित अवैध शिकार विरोधी शिविरों को कथित तौर पर जिलेटिन विस्फोटकों से निशाना बनाया गया। यह घटना भी तीन शिकारियों की मुठभेड़ के बाद की प्रतिशोधी कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है।
कर्नाटक में अवैध शिकार की स्थिति कितनी गंभीर है?
वन विभाग के डेटा के अनुसार, 2011 से अब तक कथित तौर पर 3,200 से अधिक अवैध शिकार के मामले दर्ज किए गए हैं। शिकारी गिरोह कथित तौर पर बेंगलुरु और अन्य महानगरों से माँग पर वन्यजीव मांस व खाल की आपूर्ति करते हैं।
हनूर मुठभेड़ पर विपक्ष का क्या रुख है?
विपक्षी दलों और स्थानीय समूहों ने मुठभेड़ में मारे गए तीनों व्यक्तियों की निष्पक्ष जांच की माँग की है। उनका कहना है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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