चामराजनगर: शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में 10 एकड़ जंगल जला, वन विभाग को प्रतिशोधी आगजनी का संदेह
सारांश
मुख्य बातें
चामराजनगर जिले के कोल्लेगल तालुका के शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में 20 अगस्त को लगभग 10 एकड़ वन भूमि आग की चपेट में आ गई। वन अधिकारियों को संदेह है कि यह आग जानबूझकर लगाई गई है — और यह घटना उस मुठभेड़ के ठीक कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें हनूर वन क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों ने कथित तौर पर आत्मरक्षा में तीन संदिग्ध शिकारियों को मार गिराया था।
मुख्य घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, शिलुबेपुरा वन क्षेत्र में लगी इस आग को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में स्थित अवैध शिकार विरोधी शिविरों (एपीसी) को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। वन विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या आगजनी और शिविरों पर हमले एक ही सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं।
चिंताएँ तब और बढ़ गईं जब कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित अवैध शिकार विरोधी शिविरों को कथित तौर पर जिलेटिन विस्फोटकों से निशाना बनाया गया। अधिकारियों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य वन कर्मियों में भय पैदा करना और अभ्यारण्य में चल रहे अवैध शिकार विरोधी अभियानों को पटरी से उतारना है।
हनूर मुठभेड़ की पृष्ठभूमि
हनूर वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के बाद से यह पूरा इलाका तनाव में है। विपक्षी दलों और स्थानीय समूहों ने तीनों मृतकों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। गौरतलब है कि यह मुठभेड़ उस समय हुई जब वन विभाग ने कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा के पास हनूर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय शिकारियों के एक बड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाई थी।
विभाग द्वारा एकत्र की गई जानकारी के अनुसार, ये शिकारी गिरोह कथित तौर पर माँग के आधार पर वन्यजीवों का मांस और खाल की आपूर्ति करते हैं। कथित तौर पर इन गिरोहों को बेंगलुरु और देश के अन्य महानगरों से आदेश मिलते हैं।
अवैध शिकार का व्यापक संकट
वन विभाग ने 2011 से वन्यजीव शिकार के मामलों का डेटा एकत्र किया है। इस अवधि में कथित तौर पर 3,200 से अधिक अवैध शिकार के मामले दर्ज किए गए हैं — एक आँकड़ा जो इस क्षेत्र में शिकार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है।
सरकार और वन विभाग की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि वन विभाग अवैध शिकार में शामिल लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की योजना बना रहा है। आगजनी और विस्फोटकों के उपयोग की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किए जाने की संभावना है।
क्या होगा आगे
वन विभाग आगजनी, शिविरों पर हमलों और शिकारियों के नेटवर्क के बीच संभावित कड़ी की जांच जारी रखे हुए है। विपक्ष की माँग पर हनूर मुठभेड़ की जांच का दायरा भी तय होना बाकी है। आने वाले दिनों में कर्नाटक सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।