कावेरी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में जिलेटिन धमाकों की जांच जारी, CM शिवकुमार बोले — रिपोर्ट आने पर देंगे जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में 15 अगस्त को दो शिकार-रोधी कैंपों (एंटी-पोचिंग कैंप) को कथित तौर पर जिलेटिन विस्फोटकों से उड़ाने की घटना ने कर्नाटक के वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है। यह धमाके उसी दिन हुए जब हनूर के पास जंगल में हुई मुठभेड़ में तीन कथित शिकारी मारे गए थे — हालाँकि इस घटना का पता तीन दिन बाद चला। चामराजनगर ज़िले में हुई इस घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि वन मंत्री जांच की निगरानी कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
वन अधिकारियों के अनुसार, होलेमुरुदट्टी, मिंचिनारेहल्ला और नाला बोली में स्थित कम से कम दो एंटी-पोचिंग कैंपों पर जिलेटिन स्टिक से हमला किया गया। इसके अलावा, सात अन्य कैंपों में अज्ञात बदमाशों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की। धमाकों के वक्त कैंपों में कोई वनकर्मी मौजूद नहीं था, जिससे वन अधिकारी बड़ी त्रासदी से बाल-बाल बच गए।
सीएम शिवकुमार की प्रतिक्रिया
बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'मुझे भी कुछ जानकारी मिली है। वन मंत्री जांच की निगरानी कर रहे हैं। मैं इस दौरान कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद हम विवरण देंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि हनूर गोलीबारी मामले की गहन जांच जारी है और जांच पूरी होने पर ही आगे बयान दिया जाएगा। वन मंत्री ईश्वर खंड्रे के स्थान पर रामलिंगा रेड्डी इस जांच की निगरानी कर रहे हैं।
वन कर्मचारियों की सुरक्षा पर चिंता
इस घटना ने कावेरी वन्यजीव अभयारण्य में तैनात वन विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में हुआ जब हनूर मुठभेड़ के बाद इलाके में पहले से ही तनाव का माहौल था। वनकर्मियों के बीच आशंका है कि ये हमले मुठभेड़ में मारे गए कथित शिकारियों के साथियों की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई हो सकती है, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
तमिलनाडु कनेक्शन की आशंका
अधिकारियों के सामने यह सवाल भी उठा है कि क्या इन धमाकों में तमिलनाडु से आए शिकारियों का हाथ है — एक आशंका जिसे मुख्यमंत्री ने फिलहाल जांच के दायरे में बताया है। कावेरी वन्यजीव अभयारण्य कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा के निकट स्थित है और यहाँ अंतरराज्यीय शिकार गिरोहों की सक्रियता पहले भी दर्ज की जा चुकी है।
आगे क्या होगा
जांच एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे यह स्थापित करें कि धमाके हनूर मुठभेड़ से सीधे जुड़े थे या नहीं, और जिलेटिन विस्फोटकों की आपूर्ति का स्रोत क्या था। वन विभाग ने प्रभावित कैंपों में सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच रिपोर्ट आने के बाद सरकार विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करेगी।