वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले से किसान की मौत, ग्रामीणों ने बगहा मार्ग जाम किया
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के वाल्मीकिनगर फॉरेस्ट रेंज में शनिवार, 15 अगस्त को एक बाघ के हमले में 45 वर्षीय किसान विजय हलदर की मौत हो गई। घटना के बाद भड़के ग्रामीणों ने वाल्मीकिनगर-बगहा मुख्य सड़क पर शव रखकर यातायात बाधित कर दिया और वन विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
कैसे हुई घटना
विजय हलदर सुबह करीब 11 बजे भेदिहारी चौक के पास दक्षिण टोला में अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी जंगल से एक बाघ निकला और उन पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक और तीव्र था कि हलदर की मौके पर ही मौत हो गई। इलाके में बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए।
ग्रामीणों का विरोध और सड़क जाम
गुस्साए ग्रामीणों ने विजय हलदर का शव वाल्मीकिनगर-बगहा सड़क पर रख दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग पर आरोप लगाया कि बस्ती के पास बाघ की मौजूदगी की खबरें आने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। तनाव के दौरान ग्रामीणों ने कथित तौर पर वन विभाग की एक गाड़ी पलट दी और एक वन रक्षक के साथ मारपीट की।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
सूचना मिलते ही एसडीएम चांदनी कुमारी, एसडीपीओ निहार भूषण और एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट अवधेश कुमार पुलिस और सशस्त्र जवानों के साथ मौके पर पहुँचे। स्थिति नियंत्रण के लिए वाल्मीकिनगर, नौरंगिया और लौकेरिया पुलिस स्टेशनों की टीमें भी तैनात की गईं। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
मुआवजे का आश्वासन
वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि मृतक के परिवार को सरकारी प्रावधानों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और वन विभाग में रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम हटा लिया। रेंजर ने यह भी बताया कि बाघ का पता लगाने के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है और वन कर्मचारी जानवर की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं हमले
यह घटना अकेली नहीं है — गौरतलब है कि करीब 15 दिन पहले एक बाघ ने 62 वर्षीय किसान अकलू यादव पर उस वक्त हमला किया था जब वह बकरियाँ चरा रहे थे। गंभीर रूप से घायल यादव की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इससे पहले वीटीआर से सटे नौरंगिया गाँव में धान के खेत में काम कर रही एक महिला की भी बाघ के हमले में जान जा चुकी है। यह तीसरी घटना है जिसने रिजर्व के आसपास रहने वाले हजारों ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में वन विभाग पर मुआवजा और सुरक्षा उपायों को लेकर दबाव और बढ़ने की आशंका है।