26 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चामराजनगर में 12 साल की घायल बाघिन पकड़ी, मद्दुर रिहायशी इलाकों में मचाई थी दहशत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चामराजनगर में 12 साल की घायल बाघिन पकड़ी, मद्दुर रिहायशी इलाकों में मचाई थी दहशत

सारांश

कर्नाटक के चामराजनगर में मद्दुर कॉलोनी के पास घूम रही 12 साल की घायल बाघिन को बांदीपुर वन विभाग ने रात भर के ऑपरेशन में पकड़ा। ड्रोन से ट्रैकिंग के बाद सफल रेस्क्यू; बाघिन के सीने में चोट की आशंका।

मुख्य बातें

चामराजनगर जिले के मद्दुर कॉलोनी के पास 12 वर्षीय बाघिन को बांदीपुर वन विभाग ने सुरक्षित पकड़ा।
बाघिन के सीने में चोट होने की आशंका; संभवतः किसी अन्य बाघ से लड़ाई में लगी।
राजेंद्र नामक किसान ने खेत में बाघिन को देखकर सूचना दी, जिसके बाद ऑपरेशन शुरू हुआ।
ड्रोन कैमरे से बाघिन को ट्रैक कर रात भर के ऑपरेशन में पकड़ा गया।
कोप्पल जिले की किष्किंधा पहाड़ियों में पाँच दशकों बाद बाघ की उपस्थिति दर्ज; श्रीशैलम कॉरिडोर से आने की संभावना।
बाघिन की विस्तृत चिकित्सा जांच के बाद उपचार, पुनर्वास या वन में छोड़ने का निर्णय होगा।

कर्नाटक के चामराजनगर जिले में बांदीपुर वन विभाग की टीम ने मद्दुर कॉलोनी के निकट रिहायशी इलाकों में घूम रही 12 वर्षीय बाघिन को सफलतापूर्वक पकड़ लिया। कई दिनों तक ग्रामीणों में भय का माहौल बनाए रखने वाली यह बाघिन कथित तौर पर सीने में चोट के कारण जंगल वापस लौटने में असमर्थ थी।

कैसे शुरू हुई घटना

मंगलवार को गुंड्लुपेट तालुक के मड्डुर गांव निवासी राजेंद्र अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी बाघिन महज कुछ मीटर की दूरी पर आ गई। जान बचाने के लिए राजेंद्र तत्काल गांव की ओर दौड़े और सुरक्षित निकल गए। उनकी सूचना पर बांदीपुर वन विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे।

वन विभाग का ऑपरेशन

वन अधिकारियों ने ड्रोन कैमरे की मदद से बाघिन की गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखी और उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद रात भर चले लंबे ऑपरेशन के बाद टीम ने बाघिन को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की। ऑपरेशन की सफलता के बाद स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली।

बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति

वन अधिकारियों को संदेह है कि किसी अन्य बाघ के साथ लड़ाई में बाघिन के सीने में चोट लगी होगी, जिसके कारण वह जंगल वापस नहीं लौट पा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, अब उसकी विस्तृत चिकित्सा जांच की जाएगी। उसके उपचार, पुनर्वास या पुनः वन में छोड़ने का निर्णय स्वास्थ्य स्थिति के आकलन के बाद लिया जाएगा।

कर्नाटक में बाघों की बढ़ती आवाजाही

यह घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में बाघों की मानव-बस्ती के निकट आवाजाही की घटनाएं चर्चा में हैं। गौरतलब है कि कोप्पल जिले की किष्किंधा पहाड़ियों में कैमरा ट्रैप में बाघ की गतिविधि कैद हुई है — यह लगभग पाँच दशकों में पहली बार है जब हम्पी के निकट के जंगलों में बाघ देखा गया है। 1970 के दशक के बाद इन जंगलों में बाघ की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाघ संभवतः आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम वन्यजीव कॉरिडोर से आया होगा और पिछले कई महीनों से किष्किंधा पहाड़ियों में विचरण कर रहा होगा। स्थानीय लोगों को सलाह दी गई है कि वे अकेले उस क्षेत्र में न जाएं और रात में घरों के बाहर न सोएं।

आगे क्या होगा

पकड़ी गई बाघिन की मेडिकल जांच के बाद वन विभाग उसके भविष्य का निर्णय करेगा। विशेषज्ञ इस घटना को मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती प्रवृत्ति के संदर्भ में देख रहे हैं और वन क्षेत्रों के निकट रहने वाले समुदायों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी दीर्घकालिक बफर-ज़ोन नीति पर अमल ढीला रहा है। किष्किंधा पहाड़ियों में पाँच दशक बाद बाघ की वापसी संरक्षण की सफलता का संकेत ज़रूर है, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या स्थानीय समुदायों को इस विस्तार के लिए पर्याप्त रूप से तैयार किया गया था।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चामराजनगर में पकड़ी गई बाघिन कहाँ घूम रही थी?
बाघिन कर्नाटक के चामराजनगर जिले के गुंड्लुपेट तालुक स्थित मड्डुर कॉलोनी और आसपास के रिहायशी इलाकों में घूम रही थी। कथित तौर पर सीने में चोट के कारण वह जंगल वापस नहीं लौट पा रही थी।
बाघिन को पकड़ने का ऑपरेशन कैसे हुआ?
बांदीपुर वन विभाग की टीम ने ड्रोन कैमरे की मदद से बाघिन की गतिविधियों को ट्रैक किया और उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद रात भर चले ऑपरेशन में बाघिन को सुरक्षित पकड़ा गया।
बाघिन की चोट के बारे में क्या जानकारी है?
वन अधिकारियों को संदेह है कि किसी अन्य बाघ के साथ लड़ाई में बाघिन के सीने में चोट लगी। अब उसकी विस्तृत चिकित्सा जांच की जाएगी और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उपचार, पुनर्वास या वन में छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।
किष्किंधा पहाड़ियों में बाघ की वापसी क्यों महत्वपूर्ण है?
कोप्पल जिले की किष्किंधा पहाड़ियों में लगभग पाँच दशकों बाद बाघ की उपस्थिति कैमरा ट्रैप में दर्ज हुई है। 1970 के दशक के बाद पहली बार हम्पी के निकट के जंगलों में बाघ देखा गया है, जो इस क्षेत्र में बाघ की दुर्लभ वापसी का संकेत है।
स्थानीय लोगों के लिए वन विभाग की क्या सलाह है?
वन विभाग ने स्थानीय लोगों को सलाह दी है कि वे अकेले उस क्षेत्र में न जाएं और रात में घरों के बाहर न सोएं। बाघिन के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन सतर्कता बनाए रखने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले