चामराजनगर में 12 साल की घायल बाघिन पकड़ी, मद्दुर रिहायशी इलाकों में मचाई थी दहशत
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के चामराजनगर जिले में बांदीपुर वन विभाग की टीम ने मद्दुर कॉलोनी के निकट रिहायशी इलाकों में घूम रही 12 वर्षीय बाघिन को सफलतापूर्वक पकड़ लिया। कई दिनों तक ग्रामीणों में भय का माहौल बनाए रखने वाली यह बाघिन कथित तौर पर सीने में चोट के कारण जंगल वापस लौटने में असमर्थ थी।
कैसे शुरू हुई घटना
मंगलवार को गुंड्लुपेट तालुक के मड्डुर गांव निवासी राजेंद्र अपने खेत में काम कर रहे थे, तभी बाघिन महज कुछ मीटर की दूरी पर आ गई। जान बचाने के लिए राजेंद्र तत्काल गांव की ओर दौड़े और सुरक्षित निकल गए। उनकी सूचना पर बांदीपुर वन विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे।
वन विभाग का ऑपरेशन
वन अधिकारियों ने ड्रोन कैमरे की मदद से बाघिन की गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखी और उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद रात भर चले लंबे ऑपरेशन के बाद टीम ने बाघिन को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की। ऑपरेशन की सफलता के बाद स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली।
बाघिन की स्वास्थ्य स्थिति
वन अधिकारियों को संदेह है कि किसी अन्य बाघ के साथ लड़ाई में बाघिन के सीने में चोट लगी होगी, जिसके कारण वह जंगल वापस नहीं लौट पा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, अब उसकी विस्तृत चिकित्सा जांच की जाएगी। उसके उपचार, पुनर्वास या पुनः वन में छोड़ने का निर्णय स्वास्थ्य स्थिति के आकलन के बाद लिया जाएगा।
कर्नाटक में बाघों की बढ़ती आवाजाही
यह घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में बाघों की मानव-बस्ती के निकट आवाजाही की घटनाएं चर्चा में हैं। गौरतलब है कि कोप्पल जिले की किष्किंधा पहाड़ियों में कैमरा ट्रैप में बाघ की गतिविधि कैद हुई है — यह लगभग पाँच दशकों में पहली बार है जब हम्पी के निकट के जंगलों में बाघ देखा गया है। 1970 के दशक के बाद इन जंगलों में बाघ की उपस्थिति दर्ज नहीं हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाघ संभवतः आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम वन्यजीव कॉरिडोर से आया होगा और पिछले कई महीनों से किष्किंधा पहाड़ियों में विचरण कर रहा होगा। स्थानीय लोगों को सलाह दी गई है कि वे अकेले उस क्षेत्र में न जाएं और रात में घरों के बाहर न सोएं।
आगे क्या होगा
पकड़ी गई बाघिन की मेडिकल जांच के बाद वन विभाग उसके भविष्य का निर्णय करेगा। विशेषज्ञ इस घटना को मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती प्रवृत्ति के संदर्भ में देख रहे हैं और वन क्षेत्रों के निकट रहने वाले समुदायों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।